अवैध रेत उत्खनन पर बवाल: जिला पंचायत सदस्यों ने बरभाटा घाट पहुंचकर उठाए सवाल
छग
Sarangarh. सारंगढ़। क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर शनिवार देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिला पंचायत सदस्यों की एक टीम बरभाटा घाट पहुंची। जनप्रतिनिधियों के घाट पर पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्रित हो गए। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि बरभाटा घाट पर पोकलेन मशीन के जरिए खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है, जबकि इसके लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति या रॉयल्टी भुगतान की पुष्टि नहीं हो सकी। जिला पंचायत सदस्यों ने मौके पर आरोप लगाया कि बरभाटा घाट से बिना रॉयल्टी रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह गतिविधि कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने खनिज विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनपद प्रशासन के अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया। हालांकि जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस दौरान प्रत्येक विभाग ने कार्रवाई की जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डाल दी।
किसी भी विभाग ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की पहल नहीं की, जिससे जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने भी जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि क्षेत्र में काफी समय से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन से जहां शासन को राजस्व की क्षति हो रही है, वहीं नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
नदी के किनारों का कटाव बढ़ रहा है और आसपास के खेतों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय भारी मशीनों से रेत निकाली जाती है, जिससे आवाज और कंपन के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। जिला पंचायत सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि बरभाटा घाट सहित क्षेत्र में चल रहे अवैध रेत उत्खनन पर शीघ्र रोक नहीं लगाई गई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच टीम भेजकर अवैध उत्खनन में शामिल लोगों, मशीनों और वाहनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस चेतावनी के बाद क्या ठोस कदम उठाता है।