AMBIKAPUR अंबिकापुर। नशीले इंजेक्शन बेचने के आरोप में पकड़े गए युवक को न्यायालय ने 12 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम जमा नहीं करने की स्थिति में उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपी को करीब एक साल पहले मेडिकल कॉलेज के पास पकड़ा गया था और उसके बैग से बड़ी संख्या में रेक्सोजेसिक और एविल इंजेक्शन बरामद किए गए थे। जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के दर्रीपारा निवासी सूरज यादव को 29 सितंबर 2025 की रात आबकारी विभाग की टीम ने मेडिकल कॉलेज के पास पकड़ा था। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने बाइक सवार सूरज को रोककर उसकी तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान युवक के पास मौजूद पिट्ठू बैग की जांच की गई। बैग से 99 रेक्सोजेसिक और 79 एविल इंजेक्शन बरामद किए गए। इस तरह उसके कब्जे से कुल 178 इंजेक्शन मिले थे।
आबकारी विभाग के मुताबिक, आरोपी इन इंजेक्शनों को बिक्री के उद्देश्य से लेकर जा रहा था। बरामदगी के बाद उसके खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच पूरी करने के बाद विशेष न्यायालय में चालान पेश किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी सूरज यादव को जमानत नहीं मिल सकी थी। इसके चलते वह न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश नारकोटिक्स एक्ट अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने सूरज यादव को दोषी करार दिया। कोर्ट ने नशीले इंजेक्शन की अवैध बिक्री से जुड़े अपराध को गंभीर मानते हुए उसे 12 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय के आदेश के मुताबिक, अर्थदंड जमा नहीं करने पर सूरज को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। नशीले इंजेक्शन के दुरुपयोग के मामलों को लेकर प्रशासन लगातार कार्रवाई करता रहा है। बिना वैध अनुमति ऐसी दवाओं की बिक्री और परिवहन पर नारकोटिक्स कानून के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। करीब एक साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में बड़ी मात्रा में इंजेक्शन की बरामदगी महत्वपूर्ण रही। अब दोषी को न्यायालय द्वारा निर्धारित 12 साल का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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