लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सत्ता और वोट बैंक की राजनीति के कारण देश को विभाजन की त्रासदी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बिना नाम लिए सपा नेता आजम खां को प्रदेश का गृह मंत्री बनाने से जुड़े शिवपाल यादव के बयान पर भी निशाना साधा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी सत्ता में लौटने की स्थिति में एक ऐसे व्यक्ति को गृह मंत्री बनाने की बात कर रही है, जिसके नाम पर विश्वविद्यालय बनाया गया और जिसकी राजनीति को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घोषणाएं उत्तर प्रदेश में दोबारा दंगों और अराजकता का माहौल पैदा करने की मानसिकता को दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह सोच बेहद शर्मनाक है और प्रदेश की जनता को इससे सबक लेने की आवश्यकता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने मोहम्मदाबाद के नवाब की संपत्ति को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी, जबकि वह व्यक्ति मुस्लिम लीग का कोषाध्यक्ष था और देश के विभाजन की राजनीति से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पैरवी करना और उन्हें सम्मान देने की बात कहना विपक्ष की वास्तविक सोच को उजागर करता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के दंगों से जुड़े लोगों को तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर सम्मानित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने की जल्दबाजी और लालच में कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व ने एक समृद्ध राष्ट्र को बांटने का काम किया। वर्ष 1947 में जिन लोगों की निगाह केवल सत्ता पर थी, वे विभाजन की त्रासदी को रोकने के बजाय मौन बने रहे। योगी ने दावा किया कि विभाजन के दौरान पाकिस्तान को पंजाब और सिंध जैसे कुछ ऐसे भूभाग भी सौंप दिए गए, जिनकी उसने कभी मांग नहीं की थी।

उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर और जमीन छोड़नी पड़ी। बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और अनेक परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए। विभाजन की त्रासदी केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ा सबक है। नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि किन परिस्थितियों और किन राजनीतिक निर्णयों के कारण देश को इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी झेलनी पड़ी।

मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं और दलित समुदाय के लोगों पर कथित अत्याचारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक खिसकने के डर से विपक्षी दल ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा कि जब निर्दोष लोगों पर अत्याचार होता है तो राजनीतिक फायदे और नुकसान से ऊपर उठकर आवाज उठानी चाहिए। विभाजन और उसके बाद हुई हिंसा की घटनाओं को केवल सुनने या किसी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उनसे सीख लेने की जरूरत है।

सीएम योगी ने कहा कि भारत विरोधी ताकतें अलग-अलग मंचों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके देश में अव्यवस्था तथा अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसी स्थिति में केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। देश की सुरक्षा, एकता और विकास में बाधा डालने वालों के खिलाफ समाज को भी सजग रहना चाहिए।

उन्होंने लोगों से स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी को विभाजन की विभीषिका के बारे में जागरूक करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं तक इतिहास के तथ्यों और विभाजन की त्रासदी के वास्तविक जिम्मेदार लोगों की जानकारी सही तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे किसी भ्रामक प्रचार का शिकार न हों। उन्होंने नागरिकों से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में योगदान देने का आह्वान किया।

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