लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आम लोगों को राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। EWS प्रमाण पत्र, खतौनी, दाखिल-खारिज और जमीन की पैमाइश जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसका सीधा फायदा उन लाखों लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पढ़ाई, नौकरी, जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक संबंधी काम या दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है।
सरकारी सेवाओं में देरी आम नागरिकों के लिए लंबे समय से बड़ी समस्या रही है। खासकर राजस्व विभाग से संबंधित मामलों में आवेदन करने के बाद लोगों को कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता है। अब व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाते हुए अलग-अलग सेवाओं के निस्तारण की समय सीमा पर विशेष निगरानी की तैयारी है। इससे आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी।
EWS प्रमाण पत्र के आवेदकों को राहत
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाण पत्र का इस्तेमाल शिक्षा और सरकारी नौकरियों में निर्धारित आरक्षण का लाभ लेने सहित विभिन्न कामों में किया जाता है। भर्ती या प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिलने से कई बार अभ्यर्थियों को परेशानी होती है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे आवेदनों को समयबद्ध तरीके से निपटाना है। आवेदन और जरूरी दस्तावेज सही होने पर संबंधित अधिकारियों को निर्धारित अवधि के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को खास राहत मिल सकती है।
हालांकि आवेदकों को यह ध्यान रखना होगा कि EWS प्रमाण पत्र के लिए निर्धारित पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें पूरी करनी होंगी। गलत या अधूरी जानकारी होने पर आवेदन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
खतौनी के लिए भी प्रक्रिया आसान
जमीन से जुड़े कामों में खतौनी बेहद महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेख है। जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर बैंक ऋण और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक इसकी आवश्यकता पड़ती है। ग्रामीण इलाकों में जमीन के मालिकाना हक और रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के लिए भी खतौनी महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से भू-अभिलेखों को ऑनलाइन देखने की सुविधा पहले से उपलब्ध है। अब राजस्व सेवाओं को समयबद्ध बनाने पर जोर बढ़ने से लोगों को रिकॉर्ड और प्रमाणित दस्तावेज हासिल करने में और सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
लोग यूपी भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड संबंधी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के कारण सामान्य जानकारी देखने के लिए हर बार तहसील कार्यालय जाने की जरूरत कम हुई है।
दाखिल-खारिज के मामलों में देरी होगी कम
जमीन या संपत्ति खरीदने के बाद दाखिल-खारिज यानी नामांतरण की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके जरिए राजस्व रिकॉर्ड में नए अधिकारधारक का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होती है। कई मामलों में नामांतरण लंबित रहने के कारण आगे जमीन से जुड़े काम प्रभावित होते हैं।
समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिए जाने से दाखिल-खारिज के मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। जिन मामलों में किसी तरह का विवाद या कानूनी अड़चन नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने पर जोर रहेगा।
विवादित मामलों में स्वाभाविक रूप से दस्तावेजों की जांच, पक्षकारों की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के कारण अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर प्रक्रिया अलग हो सकती है।
जमीन की पैमाइश भी महत्वपूर्ण
जमीन की सीमा को लेकर होने वाले विवाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सामने आते हैं। खेत या भूखंड की वास्तविक सीमा तय करने के लिए राजस्व विभाग से पैमाइश कराई जाती है। कई बार पैमाइश में देरी के कारण पड़ोसियों या सहखातेदारों के बीच विवाद बढ़ जाता है।
पैमाइश से संबंधित आवेदन को भी समय पर निपटाने पर जोर दिया जा रहा है। आवेदन मिलने के बाद संबंधित राजस्व कर्मियों को नियमानुसार रिकॉर्ड देखकर मौके पर पैमाइश की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। समय सीमा की निगरानी प्रभावी होने से आवेदकों को लंबे इंतजार से राहत मिल सकती है।
ऑनलाइन सेवाओं से कम होंगे तहसील के चक्कर
उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की कई सेवाओं का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। आय, जाति और निवास जैसे प्रमाण पत्रों के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि भू-अभिलेखों के लिए यूपी भूलेख जैसी ऑनलाइन सेवाएं मौजूद हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आवेदक कई मामलों में आवेदन और उसकी स्थिति से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से हासिल कर सकता है। इससे सरकारी कार्यालय में जाकर बार-बार जानकारी लेने की जरूरत कम होती है।
हालांकि जमीन से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं में मौके पर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच या संबंधित पक्षों की सुनवाई जरूरी हो सकती है। ऐसे मामलों में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होना संभव नहीं है।
आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
समयबद्ध सेवा का फायदा तभी आसानी से मिलेगा जब आवेदन में दी गई जानकारी सही और दस्तावेज पूरे हों। नाम, पिता का नाम, पता, आधार या अन्य पहचान संबंधी जानकारी में अंतर होने पर सत्यापन में परेशानी आ सकती है।
जमीन से संबंधित आवेदन में गाटा या खसरा संख्या, संबंधित राजस्व गांव, तहसील और उपलब्ध अभिलेख सही तरीके से देना महत्वपूर्ण है। दाखिल-खारिज के मामले में रजिस्ट्री और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी भी सही होनी चाहिए।
आवेदन जमा करने के बाद उसकी रसीद या आवेदन संख्या सुरक्षित रखना भी जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन की स्थिति देखने या किसी स्तर पर शिकायत करने में यही संख्या काम आती है।
तय समय में काम नहीं हुआ तो बढ़ेगी जवाबदेही
समय सीमा निर्धारित करने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही है। यदि कोई आवेदन सभी जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बावजूद अनावश्यक रूप से लंबित रहता है तो आवेदक संबंधित विभाग के शिकायत निवारण माध्यमों का उपयोग कर सकता है।
उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई-समाधान यानी IGRS व्यवस्था भी शिकायत दर्ज कराने का माध्यम है। इसके जरिए नागरिक सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं और लंबित मामलों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।
लाखों लोगों के रोजमर्रा के काम से जुड़ा फैसला
EWS प्रमाण पत्र हो या खतौनी, दाखिल-खारिज हो या जमीन की पैमाइश—ये ऐसी सेवाएं हैं जिनकी जरूरत आम लोगों को सीधे तौर पर पड़ती है। इनके समय पर उपलब्ध होने से छात्रों, नौकरी के अभ्यर्थियों, किसानों, जमीन मालिकों और संपत्ति खरीदने वालों को राहत मिल सकती है।
समयबद्ध व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को छोटी-छोटी राजस्व सेवाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही आवेदन किस स्तर पर लंबित है, इसकी जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
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