लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक अपने अंतर्जनपदीय तबादले का इंतजार कर रहे हैं। करीब छह हजार शिक्षकों ने एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। इनमें दिव्यांग शिक्षक, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक और पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक शामिल हैं। लंबे समय से तबादले की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षकों की नजर अब अंतिम सूची पर टिकी हुई है।
सबसे ज्यादा उम्मीद उन दंपती शिक्षकों को है, जिन्हें लंबे अंतराल के बाद अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का अवसर मिला है। कई शिक्षक ऐसे हैं जिनकी तैनाती पति या पत्नी से अलग जिले में है। नौकरी के कारण परिवार को अलग-अलग जिलों में रहना पड़ रहा है। ऐसे शिक्षक चाहते हैं कि उन्हें पति या पत्नी की तैनाती वाले जिले अथवा उसके नजदीक स्थानांतरण मिल जाए।
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग ने जून 2026 में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की थी। शासन की ओर से दिशा-निर्देश जारी होने के बाद पात्र शिक्षकों से आवेदन लिए गए। लगभग छह हजार से अधिक शिक्षकों के आवेदन सामने आने के बाद उनके सत्यापन और पात्रता की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
दंपती शिक्षकों को 11 साल बाद मौका
इस स्थानांतरण प्रक्रिया में दंपती शिक्षकों का मामला खास तौर पर चर्चा में रहा। लंबे समय बाद ऐसे शिक्षकों को एक जिले से दूसरे जिले में तबादले का अवसर मिलने से बड़ी संख्या में आवेदन किए गए।
पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में होने के बावजूद अलग-अलग जिलों में तैनात होने के कारण परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल तक प्रभावित होती है। रोजाना लंबी दूरी तय करना संभव नहीं होने पर पति-पत्नी को अलग-अलग स्थानों पर रहना पड़ता है।
इसी वजह से दंपती शिक्षक लंबे समय से स्थानांतरण में प्राथमिकता की मांग करते रहे हैं। नई प्रक्रिया शुरू होने पर उन्हें उम्मीद जगी कि वर्षों से चली आ रही उनकी समस्या का समाधान हो सकेगा।
हाईकोर्ट के बाद दोबारा आवेदन का अवसर
दंपती शिक्षकों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा परिषद ने आवेदन के लिए अतिरिक्त अवसर भी दिया। पात्र दंपती शिक्षकों को पांच अगस्त तक ऑफलाइन आवेदन करने का मौका दिया गया।
इससे उन शिक्षकों को राहत मिली जो पहले किसी वजह से आवेदन नहीं कर पाए थे या जिन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया था। हालांकि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल अंतिम स्थानांतरण सूची को लेकर है।
आखिर क्यों हो रही देरी?
शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं होती। आवेदन में दिए गए आधार की जांच, सेवा संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन, जिले में उपलब्ध रिक्त पद और संबंधित विद्यालयों में शिक्षकों की जरूरत जैसे कई पहलुओं को देखना पड़ता है।
दिव्यांग शिक्षकों के मामलों में प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। इसी तरह गंभीर बीमारी के आधार पर स्थानांतरण मांगने वाले शिक्षकों के मेडिकल दस्तावेजों की जांच की जाती है।
दूसरी तरफ शिक्षा विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि किसी शिक्षक का स्थानांतरण करने के बाद संबंधित विद्यालय शिक्षकविहीन न हो जाए। जिन स्कूलों में पहले से शिक्षकों की संख्या बेहद कम है, वहां से स्थानांतरण करना व्यावहारिक समस्या पैदा कर सकता है।
यही वजह है कि स्थानांतरण सूची तैयार करने से पहले शिक्षक संख्या, छात्र संख्या, रिक्त पद और जरूरत वाले विद्यालयों का डाटा महत्वपूर्ण हो जाता है।
एकल और शिक्षकविहीन स्कूल भी बड़ी चुनौती
प्रदेश में शिक्षक स्थानांतरण की प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती ऐसे विद्यालयों की है जहां शिक्षक संख्या पहले ही कम है। यदि वहां से शिक्षक को दूसरे जिले में भेज दिया जाता है तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
विभाग को स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक की व्यक्तिगत परिस्थितियों और स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। जिन जिलों में शिक्षक अधिक हैं वहां से स्थानांतरण अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन पहले से शिक्षक कमी वाले जिलों के मामलों में निर्णय कठिन हो जाता है।
सरप्लस शिक्षकों के समायोजन को लेकर भी अलग-अलग जिलों में प्रक्रिया चलाई गई है। विद्यालयवार और विषयवार रिक्तियों की जानकारी तैयार करने का उद्देश्य यही है कि जहां शिक्षक ज्यादा हैं वहां से जरूरत वाले स्कूलों में उन्हें भेजा जा सके।
शिक्षक पूछ रहे—कब आएगी सूची?
आवेदन करने वाले शिक्षकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंतिम स्थानांतरण सूची कब जारी होगी। पहले से चल रही प्रक्रिया के दौरान सूची तैयार होने और उसके जारी होने का इंतजार लगातार लंबा हुआ है।
हालांकि उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय सूचनाओं में अभी ऐसी निश्चित नई तारीख सामने नहीं आई है, जिसे अंतिम स्थानांतरण सूची जारी करने की पक्की तारीख कहा जा सके। ऐसे में शिक्षकों को विभाग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
सोशल मीडिया और शिक्षक समूहों में संभावित तारीखों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहते हैं, लेकिन जब तक बेसिक शिक्षा विभाग या बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से आदेश जारी न हो, ऐसी तारीखों को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
मनचाहा जिला मिलेगा या नहीं?
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन करने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक शिक्षक को उसकी पहली पसंद का जिला मिलना निश्चित है। स्थानांतरण उपलब्ध पदों, निर्धारित प्राथमिकताओं, पात्रता और विभागीय नियमों के अनुसार किया जाता है।
किसी लोकप्रिय या बड़े शहर वाले जिले में जाने के इच्छुक शिक्षकों की संख्या उपलब्ध रिक्तियों से अधिक हो सकती है। ऐसी स्थिति में सभी आवेदकों को पसंद का जिला देना संभव नहीं होगा।
दिव्यांगता, गंभीर बीमारी और दंपती जैसी श्रेणियों को नियमों के मुताबिक प्राथमिकता मिल सकती है, लेकिन अंतिम आवंटन उपलब्ध रिक्तियों और विभाग की निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
ऑनलाइन अफवाहों से रहें सावधान
तबादला सूची का इंतजार कर रहे शिक्षकों के बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। कभी सूची जारी होने की तारीख बताई जाती है तो कभी कथित स्थानांतरण सूची प्रसारित होने लगती है।
शिक्षकों के लिए बेहतर होगा कि किसी वायरल मैसेज या अनधिकृत सूची पर भरोसा करने के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा परिषद और संबंधित आधिकारिक आदेशों को ही अंतिम मानें।
छह हजार परिवारों की उम्मीदें सूची पर टिकीं
यह मामला केवल करीब छह हजार शिक्षकों के तबादले का नहीं बल्कि उनसे जुड़े हजारों परिवारों का भी है। खासकर पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में नौकरी करने वाले परिवारों के लिए स्थानांतरण का फैसला रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।
दिव्यांग और गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिक्षकों के लिए भी घर या बेहतर चिकित्सा सुविधा के नजदीक तैनाती महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि शिक्षक स्थानांतरण सूची जल्द जारी करने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल अंतिम सूची की निश्चित तारीख घोषित होने की स्पष्ट ताजा जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रक्रिया से जुड़े शिक्षक विभागीय आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सूची जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि छह हजार से अधिक आवेदकों में कितने शिक्षकों को अंतर्जनपदीय तबादले का लाभ मिलता है और कितनों को उनकी पसंद का जिला मिल पाता है।