लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोंडा में बर्तन कारोबारी विनोद कुमार साहनी की मौत को लेकर सियासत तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के अपनी ही सरकार की व्यवस्था के खिलाफ धरने पर बैठने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर सियासी तंज कसा है। अखिलेश ने संजय निषाद को संदेश देते हुए कहा कि सरकार में रहते हुए केवल धरना देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि सरकार पर इतना दबाव बनाना होगा कि वह कार्रवाई करने को मजबूर हो। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसकी सहयोगी निषाद पार्टी के रिश्तों को भी चर्चा में ला दिया है।
गोंडा के परसपुर क्षेत्र के रहने वाले बर्तन कारोबारी विनोद साहनी पर हमला हुआ था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सामने आते ही मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया। संजय निषाद के साथ समाजवादी पार्टी के नेता भी विरोध में दिखाई दिए। बिहार के पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आए।
लखनऊ में धरने पर बैठ गए संजय निषाद
विनोद साहनी की मौत के बाद संजय निषाद गुरुवार देर शाम लखनऊ में केजीएमयू के पोस्टमार्टम हाउस के पास धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एक कैबिनेट मंत्री के अपनी ही सरकार के दौरान इस तरह धरने पर बैठने से राजनीतिक सवाल खड़े हो गए। विपक्ष ने इसे सरकार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ गठबंधन के भीतर असंतोष से जोड़कर देखा। समाजवादी पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सरकार में शामिल मंत्री को न्याय के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी।
अखिलेश ने दिया संजय निषाद को सियासी संदेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को भाजपा सरकार पर हमला करने का मौका बनाया। उन्होंने विनोद साहनी मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके साथ ही संजय निषाद के धरने को लेकर भी राजनीतिक संदेश दिया।
अखिलेश का हमला इस बात पर केंद्रित रहा कि सत्ता में भागीदार होने के बावजूद संजय निषाद को अपने समाज और समर्थकों के लिए कार्रवाई कराने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। सपा की तरफ से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भाजपा के साथ रहते हुए पद तो मिल सकता है, लेकिन राजनीतिक सम्मान और प्रभाव का सवाल अलग है।
इसी संदर्भ में संजय निषाद को यह सियासी नसीहत दी गई कि केवल धरना देने के बजाय सरकार पर ऐसा दबाव बनाया जाए जिससे कार्रवाई सुनिश्चित हो। इस बयान के जरिए सपा ने एक तरफ सरकार को घेरने की कोशिश की तो दूसरी तरफ निषाद वोटरों को भी राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।
लखनऊ के बाद गोंडा पहुंचे संजय निषाद
लखनऊ में विरोध के बाद शुक्रवार को संजय निषाद गोंडा पहुंचे। यहां उन्होंने समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखीं। उन्होंने आरोपियों पर कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की मांग उठाई। इसके अलावा मामले में कथित लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
संजय निषाद ने पकड़े गए आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए बाकी आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार करने को कहा। उनके गोंडा पहुंचने से पहले ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
भारी पुलिस बल देखकर संजय निषाद ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या निषाद समाज के लोग अपराधी हैं जो इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है। उन्होंने अधिकारियों को समाज में बढ़ रहे आक्रोश को समझने की नसीहत भी दी।
तीन आरोपी गिरफ्तार तीन पुलिसकर्मी निलंबित
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही लापरवाही के आरोप में थानाध्यक्ष कमल शंकर चतुर्वेदी, चौकी प्रभारी अंकित सिंह और एक बीट आरक्षी को निलंबित किया गया है। विभागीय जांच भी शुरू की गई है। अन्य आरोपियों की तलाश के लिए टीमें लगाई गई हैं।
शुक्रवार को गोंडा में संजय निषाद का प्रदर्शन भी जारी रहा। बाद में जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई अहम जानकारी
इस मामले में शुरुआती समय में हमले को लेकर अलग-अलग दावे किए गए थे। संजय निषाद ने गोली और चाकू से हमला किए जाने की बात कही थी। हालांकि बाद में सामने आई पोस्टमार्टम संबंधी जानकारी में गोली या धारदार हथियार से लगे घाव नहीं मिलने की बात कही गई। मामले की जांच जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
इसलिए हत्या के तरीके और पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की अंतिम जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।
सपा और निषाद पार्टी एक मंच पर दिखीं
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प राजनीतिक पहलू यह रहा कि भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता एक ही विरोध प्रदर्शन में नजर आए। लखनऊ में संजय निषाद के साथ सपा नेता राजपाल कश्यप भी धरने में शामिल हुए।
यूपी की राजनीति में निषाद समुदाय का अपना चुनावी महत्व है। पूर्वांचल समेत कई क्षेत्रों में निषाद, मल्लाह, केवट और संबंधित समुदाय चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि विनोद साहनी की मौत से जुड़ा मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है बल्कि राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बन गया है।
अखिलेश ने भाजपा पर बोला हमला
अखिलेश यादव ने विनोद साहनी की मौत को लेकर भाजपा सरकार को घेरते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। सपा इस मामले के जरिए कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक न्याय का मुद्दा भी उठा रही है। दूसरी ओर संजय निषाद लगातार अपनी पार्टी और समाज के कार्यकर्ताओं को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
संजय निषाद का अपनी ही गठबंधन सरकार के दौरान धरने पर बैठना विपक्ष को राजनीतिक हमला करने का बड़ा मौका दे रहा है। अखिलेश यादव इसी स्थिति को आधार बनाकर यह सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार में शामिल दल के नेता को अपनी मांगों के लिए धरना देना पड़ रहा है तो गठबंधन में उसकी वास्तविक ताकत कितनी है।
गठबंधन की राजनीति पर भी नजर
निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी है और संजय निषाद योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में उनके धरने को सामान्य विपक्षी आंदोलन की तरह नहीं देखा जा रहा है। हालांकि इस घटनाक्रम को सीधे तौर पर गठबंधन टूटने या किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
संजय निषाद ने मुख्य रूप से विनोद साहनी के परिवार को न्याय दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन किया है। फिर भी अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने मामले में नया राजनीतिक कोण जोड़ दिया है।
अब इस मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई के साथ-साथ भाजपा और निषाद पार्टी के नेताओं के अगले बयानों पर भी नजर रहेगी। फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का संदेश दिया है। दूसरी ओर विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की कानून-व्यवस्था और सहयोगी दलों के सम्मान से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।