प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में विशेष शिक्षक यानी स्पेशल एजुकेटर की भर्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने 4,900 विशेष शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन की उस अनिवार्य शर्त को वैध माना है, जिसके तहत आवेदन के लिए अभ्यर्थी का संविदा, दैनिक वेतन या आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत वर्तमान में कार्यरत होना जरूरी किया गया था। अदालत ने इस शर्त को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पहले लंबे समय तक काम करने का अनुभव किसी अभ्यर्थी को भर्ती विज्ञापन में तय अनिवार्य पात्रता शर्त से छूट नहीं दिला सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने **राकेश कुमार एवं 12 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं चार अन्य** मामले में सुनाया। मामला रिट-ए संख्या 9303/2026 से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती विज्ञापन के सामान्य निर्देश संख्या-2 को चुनौती दी थी और चयन प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग की थी। अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
4,900 पदों की भर्ती से जुड़ा विवाद
उत्तर प्रदेश में विशेष शिक्षकों के 4,900 पदों को भरने की प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने 13 जून 2026 को विज्ञापन जारी किया था। इसमें उम्मीदवारों की पात्रता और आवेदन से जुड़ी कई शर्तें निर्धारित की गई थीं।
विवाद मुख्य रूप से विज्ञापन के सामान्य निर्देश संख्या-2 को लेकर था। इसके अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को यह साबित करने के लिए अनुबंध पत्र या कार्यालय आदेश देना था कि वे संविदा, दैनिक वेतन अथवा आउटसोर्सिंग के आधार पर वर्तमान में काम कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के लिए यही शर्त परेशानी का कारण बनी। वे पहले विशेष शिक्षक के रूप में काम कर चुके थे, लेकिन मई 2019 से कार्यरत नहीं थे। ऐसे में वर्तमान सेवा से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण वे निर्धारित पात्रता के दायरे से बाहर हो रहे थे।
पुराने अनुभव को बनाया आधार
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उन्होंने विशेष शिक्षक के रूप में पहले लंबे समय तक सेवाएं दी हैं। ऐसे में केवल इस आधार पर उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए कि विज्ञापन जारी होने के समय वे संविदा या दूसरी निर्धारित व्यवस्था के तहत कार्यरत नहीं थे।
उनका दावा था कि पूर्व में किए गए कार्य और अनुभव को देखते हुए उन्हें भी चयन प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाना चाहिए।
लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों और विज्ञापन में तय पात्रता के अनुसार ही संचालित होगी। पूर्व अनुभव चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, वह उस अनिवार्य पात्रता शर्त की जगह नहीं ले सकता जो भर्ती प्रक्रिया को नियंत्रित कर रही है।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंचे थे अभ्यर्थी
इस विवाद की पृष्ठभूमि पुरानी है। याचिकाकर्ताओं ने इससे पहले भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनकी रिट याचिका संख्या 12972/2019 को हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया था।
उस समय सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का संदर्भ देते हुए कहा गया था कि संविदा कर्मचारी की संविदा अवधि समाप्त होने के बाद उसे उस पद पर बने रहने का स्वतः कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।
इसके बाद मामला विशेष अपील के माध्यम से आगे बढ़ा। खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को तत्कालीन सरकारी नीति के तहत नियमित नियुक्ति के लिए किए गए दावों पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 15 जून 2026 को बेसिक शिक्षा अधिकारी महराजगंज ने याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन खारिज कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी महत्वपूर्ण
विशेष शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी महत्वपूर्ण निर्देश दे चुका है। फरवरी 2026 के एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के TET योग्य अभ्यर्थियों और भारतीय पुनर्वास परिषद यानी RCI द्वारा निर्धारित योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों की पात्रता के सत्यापन के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाई गई 20 फरवरी 2016 की कटऑफ तारीख हटाते हुए पात्रता मानदंड पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को विचार के दायरे में लाने को कहा था। साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी को दस्तावेजों की जांच और उचित सिफारिश करने के निर्देश दिए गए थे।
मौजूदा मामले में हाईकोर्ट के सामने सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता उस वर्ग में आते हैं जिसके लिए संबंधित भर्ती प्रक्रिया और पात्रता निर्धारित की गई है।
वर्तमान में सेवा में होना क्यों बना अहम?
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता संबंधित समय पर सेवा में नहीं थे। इसी वजह से वे उस पात्र वर्ग में नहीं आते जिसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
अदालत ने कहा कि किसी न्यायसंगत रियायत की मांग को केवल रिट याचिका के माध्यम से लागू किए जाने योग्य कानूनी अधिकार में नहीं बदला जा सकता। इसी प्रकार पहले किया गया कार्य विज्ञापन में निर्धारित वर्तमान पात्रता शर्त का विकल्प नहीं बन सकता।
इस टिप्पणी का व्यापक अर्थ यह है कि भर्ती में पुराना अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन जब विज्ञापन में कोई खास अनिवार्य पात्रता निर्धारित हो तो अभ्यर्थी को उसे पूरा करना ही होगा।
अंतरिम आदेश से भी नहीं मिला स्थायी अधिकार
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू 24 जून 2026 को दिया गया अंतरिम आदेश था। इसके आधार पर याचिकाकर्ताओं को चयन प्रक्रिया के कुछ चरणों में शामिल होने का अवसर मिला था।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से इसे भी अपने पक्ष में आधार बनाने का प्रयास किया गया। लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश की प्रकृति अस्थायी होती है।
यदि किसी अभ्यर्थी को अदालत के अंतरिम आदेश के आधार पर परीक्षा, स्क्रीनिंग या चयन प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलता है तो इससे उसे स्वतः नियुक्ति या चयन का स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। अंतिम अधिकार मामले के अंतिम फैसले और मूल पात्रता पर निर्भर करता है।
भर्ती के नियमों का पालन जरूरी
हाईकोर्ट का यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अदालत ने एक बार फिर इस सिद्धांत पर जोर दिया है कि भर्ती विज्ञापन में निर्धारित आवश्यक योग्यता और पात्रता शर्तों का पालन करना जरूरी है।
हाल ही में एक अन्य शिक्षक भर्ती मामले में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि अभ्यर्थी के पास भर्ती की अंतिम तारीख तक निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। उस मामले में चार सहायक अध्यापकों की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने संबंधित प्रशासनिक आदेशों को बरकरार रखा था।
इससे यह स्पष्ट होता है कि भर्ती प्रक्रिया में पात्रता की कटऑफ तारीख और विज्ञापन की अनिवार्य शर्तों को अदालतें महत्वपूर्ण मान रही हैं।
याचिका खारिज करते हुए शर्त को माना वैध
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विज्ञापन के सामान्य निर्देश संख्या-2 में कोई संवैधानिक या कानूनी खामी नहीं पाई। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता संबंधित समय पर सेवा में नहीं थे, इसलिए वे निर्धारित पात्र वर्ग में शामिल नहीं होते।
इसी आधार पर राकेश कुमार और 12 अन्य की याचिका खारिज कर दी गई। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि केवल पुराना अनुभव दिखाकर वर्तमान में कार्यरत होने की अनिवार्य शर्त को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है जो पहले विशेष शिक्षक के तौर पर काम कर चुके हैं लेकिन संबंधित भर्ती की पात्रता तय किए जाने के समय सेवा में नहीं थे। वहीं निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ रहेगा।