लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बारिश के कारण खराब हुई सड़कों की तत्काल पहचान कर उन्हें दुरुस्त कराया जाए और लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न होने दी जाए। उन्होंने सड़क मरम्मत और गड्ढामुक्ति के काम में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क से जुड़ी समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए और संबंधित विभाग अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें।
बारिश के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में सड़कों पर गड्ढे बनने, सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और जलभराव के कारण नुकसान की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग के साथ सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े अन्य विभागों तथा स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
खराब सड़कों की तत्काल पहचान के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि मानसून के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का सर्वे कराया जाए।
कहां सड़क पूरी तरह खराब हो गई है, कहां बड़े गड्ढे बन गए हैं और किन स्थानों पर केवल पैचवर्क की जरूरत है, इसकी स्पष्ट जानकारी तैयार की जाए।
इस आधार पर मरम्मत की प्राथमिकता तय की जा सकती है।
जिन मार्गों पर यातायात ज्यादा है या जिन सड़कों से अस्पताल, स्कूल, औद्योगिक क्षेत्र और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान जुड़े हैं, वहां काम को प्राथमिकता देने की जरूरत होगी।
गड्ढों से लोगों को न हो परेशानी
बारिश के बाद सड़कों पर बने गड्ढे केवल यातायात धीमा नहीं करते बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ाते हैं।
खासकर रात में पानी से भरे गड्ढों का अंदाजा बाइक और स्कूटर चालकों को नहीं लग पाता।
तेज रफ्तार वाहन अचानक गड्ढे से बचने की कोशिश करते हैं तो हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री ने इसी समस्या को देखते हुए सड़क मरम्मत के काम को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है।
सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराया जाए।
सिर्फ पैचवर्क नहीं गुणवत्ता भी जरूरी
सड़क मरम्मत में अक्सर यह शिकायत सामने आती है कि गड्ढे भरने के कुछ समय बाद सड़क दोबारा खराब हो जाती है।
इसलिए मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा है।
अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि सड़क की मरम्मत निर्धारित मानकों के अनुसार हो और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता ठीक रहे।
अगर सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त है तो केवल गड्ढे भरने के बजाय जरूरत के अनुसार उसकी ऊपरी परत दोबारा तैयार करनी पड़ सकती है।
इससे मरम्मत लंबे समय तक टिकाऊ रह सकेगी।
लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश यह भी है कि सड़क मरम्मत के काम में अनावश्यक देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में काम की नियमित निगरानी करनी होगी।
केवल ठेकेदार के भरोसे काम छोड़ने के बजाय अधिकारियों को मौके पर जाकर गुणवत्ता की जांच करने की जरूरत होगी।
अगर मरम्मत के तुरंत बाद सड़क फिर खराब होती है तो निर्माण सामग्री और काम की गुणवत्ता की जांच की जा सकती है।
ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण होगा।
कई विभागों के पास होती हैं सड़कें
उत्तर प्रदेश में सभी सड़कें केवल लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं हैं।
नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, विकास प्राधिकरण और दूसरी सरकारी एजेंसियों के पास भी अलग-अलग सड़कें हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों की जिम्मेदारी अलग एजेंसियों की होती है।
इसी वजह से सड़क खराब होने पर कई बार विभागीय जिम्मेदारी तय करने में समय लग जाता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी ताकि विभाग तय करने के चक्कर में मरम्मत का काम न रुके।
शहरों में जलभराव से सड़कें ज्यादा प्रभावित
शहरी इलाकों में सड़क खराब होने का एक बड़ा कारण जलभराव है।
अगर बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहता है तो वह सड़क की सतह और नीचे की परतों को कमजोर कर सकता है।
इसके बाद भारी वाहनों के दबाव से सड़क टूटने लगती है और गड्ढे बन जाते हैं।
इसलिए केवल सड़क की मरम्मत करना स्थायी समाधान नहीं होगा।
जहां बार-बार जलभराव होता है वहां नालियों और ड्रेनेज सिस्टम को भी ठीक करना जरूरी होगा।
अगर पानी की निकासी बेहतर होगी तो नई बनी या मरम्मत की गई सड़क ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकती है।
ग्रामीण सड़कों पर भी ध्यान जरूरी
बारिश का असर केवल शहरों की सड़कों पर नहीं पड़ता।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई संपर्क मार्ग मानसून के दौरान खराब हो जाते हैं।
गांवों को तहसील, ब्लॉक मुख्यालय, बाजार, अस्पताल और स्कूल से जोड़ने वाली सड़कों का खराब होना लोगों के रोजमर्रा के जीवन को सीधे प्रभावित करता है।
किसानों के लिए भी ग्रामीण सड़कें बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन्हीं रास्तों से कृषि उत्पाद मंडियों तक पहुंचाए जाते हैं।
इसलिए सड़क सुधार अभियान में ग्रामीण मार्गों को भी प्राथमिकता देने की जरूरत होगी।
त्योहारों से पहले बेहतर सड़कों की जरूरत
सितंबर के बाद उत्तर प्रदेश में त्योहारों का लंबा दौर शुरू हो जाता है।
इस दौरान शहरों और बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा यातायात रहता है।
कई धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है।
ऐसे में खराब सड़कें ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की समस्या बढ़ा सकती हैं।
इसी वजह से मानसून के बाद सड़क मरम्मत के काम को तेजी से पूरा करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सड़क निर्माण के बाद निगरानी पर जोर
किसी सड़क को ठीक करने के बाद उसका नियमित निरीक्षण भी जरूरी है।
अगर शुरुआत में छोटी दरार या हल्का गड्ढा दिखाई देता है तो उसे तुरंत ठीक करने पर कम खर्च आता है।
लेकिन वही नुकसान बढ़ने के बाद पूरी सड़क की मरम्मत करनी पड़ सकती है।
इसलिए अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें सड़क की स्थिति की लगातार जानकारी मिलती रहे।
स्थानीय स्तर पर इंजीनियर और विभागीय अधिकारी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जनता की शिकायतों का हो त्वरित समाधान
सड़क खराब होने की जानकारी सबसे पहले वहां से रोज गुजरने वाले लोगों को होती है।
ऐसे में नागरिकों की शिकायतों को सड़क मरम्मत व्यवस्था से जोड़ना उपयोगी हो सकता है।
अगर किसी क्षेत्र में गड्ढे, सड़क धंसने या जलभराव की शिकायत मिलती है तो संबंधित विभाग को उसका सत्यापन कर जल्दी कार्रवाई करनी चाहिए।
शिकायत के समाधान की समयसीमा निर्धारित होने से अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ सकती है।
भारी वाहनों से सड़क को ज्यादा नुकसान
प्रदेश की कई प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव काफी ज्यादा रहता है।
ओवरलोड ट्रक सड़क की सतह और संरचना को सामान्य वाहनों की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर बारिश के कारण सड़क पहले से कमजोर है तो ओवरलोड वाहन उसे तेजी से खराब कर सकते हैं।
इसलिए सड़क मरम्मत के साथ ओवरलोडिंग पर नियंत्रण भी जरूरी है।
परिवहन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय से ऐसी सड़कों की उम्र बढ़ाई जा सकती है।
नई सड़क बनाने से ज्यादा जरूरी रखरखाव
सड़क नेटवर्क का विस्तार विकास के लिए जरूरी है, लेकिन मौजूदा सड़कों का रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अगर सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर खराब हो जाए तो जनता को परेशानी के साथ सरकारी धन का भी नुकसान होता है।
इसीलिए सड़क निर्माण परियोजनाओं में रखरखाव की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
कई परियोजनाओं में ठेकेदार की निश्चित अवधि तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी होती है।
अगर ऐसी अवधि में सड़क खराब होती है तो संबंधित अनुबंध के अनुसार मरम्मत कराई जानी चाहिए।
सड़क सुरक्षा से जुड़ा है मामला
गड्ढामुक्त सड़क केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाइक चालकों के लिए गड्ढे विशेष रूप से खतरनाक होते हैं।
बारिश में गड्ढे पानी से भर जाने पर उनकी गहराई दिखाई नहीं देती। अचानक वाहन का पहिया गड्ढे में जाने से चालक नियंत्रण खो सकता है।
इसी तरह बड़े गड्ढे से बचने के लिए अचानक लेन बदलना भी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
इसलिए सड़क सुधार को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़कर देखना जरूरी है।
काम पूरा होने के बाद भी हो जांच
सड़क मरम्मत के बाद गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी होगी।
अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि गड्ढों को केवल ऊपर से सामग्री डालकर बंद तो नहीं कर दिया गया।
अगर नीचे का हिस्सा कमजोर है तो कुछ दिनों में वही स्थान दोबारा टूट सकता है।
जरूरत के अनुसार खराब हिस्से को काटकर साफ करने, बेस मजबूत करने और फिर नई सामग्री लगाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
गुणवत्ता नियंत्रण से सरकार के खर्च का भी बेहतर उपयोग होगा।
खराब सड़क मिली तो संबंधित विभाग जवाबदेह
मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर तभी दिखाई देगा जब संबंधित विभागों की जवाबदेही स्पष्ट होगी।
हर सड़क के लिए जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारी की पहचान होनी चाहिए।
अगर किसी सड़क की शिकायत लगातार मिल रही है और उसके बावजूद मरम्मत नहीं होती तो संबंधित स्तर पर जवाब मांगा जा सकता है।
इससे विभागों के बीच जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की प्रवृत्ति को भी कम किया जा सकता है।
बारिश खत्म होते ही तेज होगा काम
मानसून के दौरान लगातार बारिश होने पर स्थायी सड़क मरम्मत करना कई बार तकनीकी रूप से मुश्किल होता है।
गीली सतह पर किया गया पैचवर्क लंबे समय तक नहीं टिकता।
इसलिए मौसम साफ होने के बाद बड़े स्तर पर सड़क सुधार कार्य शुरू करना ज्यादा प्रभावी होता है।
हालांकि बेहद खतरनाक गड्ढों को मानसून के दौरान भी अस्थायी रूप से सुरक्षित करना जरूरी है ताकि दुर्घटना न हो।
मौसम अनुकूल होते ही उनकी स्थायी मरम्मत की जा सकती है।
सीएम योगी का साफ संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश का मुख्य उद्देश्य मानसून के बाद प्रदेश की सड़क व्यवस्था को जल्द सामान्य करना है।
बारिश से खराब हुई सड़कों की पहचान, गड्ढों की मरम्मत, जल निकासी और गुणवत्ता की निगरानी इस अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
सरकार के सामने चुनौती केवल सड़कें जल्दी ठीक करने की नहीं बल्कि ऐसा काम कराने की भी होगी जो अगले कुछ महीनों में फिर खराब न हो।
अगर संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से सर्वे और मरम्मत का काम पूरा करते हैं तो लाखों वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।
अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद जमीन पर कितनी तेजी से काम शुरू होता है और **बारिश में टूटी तथा गड्ढों में बदली सड़कों को कितने समय में दुरुस्त किया जाता है।**
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