नोएडा : गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है। थाना सेक्टर-24 क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर पॉक्सो (POCSO) मामले में प्रभावी विवेचना, मजबूत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी के चलते अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर कुल 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस फैसले को ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत गौतमबुद्धनगर पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला वर्ष 2022 में थाना सेक्टर-24 में दर्ज किया गया था। मुकदमा अपराध संख्या 64/2022 के अंतर्गत आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रारंभ से ही साक्ष्य जुटाने, पीड़ित पक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अभियोजन की मजबूत तैयारी पर विशेष ध्यान दिया।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की मॉनिटरिंग सेल, थाना सेक्टर-24 पुलिस और अभियोजन इकाई ने संयुक्त रूप से इस मुकदमे की लगातार निगरानी की। न्यायालय में समयबद्ध तरीके से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए और गवाहों के बयान प्रभावी ढंग से दर्ज कराए गए, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।
माननीय न्यायालय ने मुकुल कुमार पुत्र कन्हैया लाल, निवासी डी-6, सेक्टर-22, थाना सेक्टर-24, गौतमबुद्धनगर को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत सात वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत दो वर्ष के कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड का आदेश भी न्यायालय ने दिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी निर्धारित अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आदेश के अनुसार धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए जुर्माने का भुगतान न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास, धारा 10 के तहत एक माह तथा धारा 506 के तहत भी एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सजा दिलाने में मॉनिटरिंग सेल, विवेचक अधिकारी और अभियोजन अधिकारियों की समन्वित कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने पूरे मुकदमे के दौरान हर सुनवाई पर नजर रखी और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी स्तर पर कानूनी प्रक्रिया में देरी न हो। इसी रणनीति के कारण आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार हुआ और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध माना।
गौतमबुद्धनगर पुलिस ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में त्वरित विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह, गवाहों की सुरक्षा और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से अपराधियों को कठोर सजा दिलाने का अभियान लगातार जारी रहेगा।
पुलिस कमिश्नरेट ने यह भी दोहराया कि ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य केवल अपराध दर्ज करना नहीं, बल्कि अपराधियों को न्यायालय से शीघ्र और कठोर दंड दिलाना है। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ-साथ समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों में भी कानून का भय पैदा होता है।
इस फैसले को महिला एवं बाल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे सभी मामलों में प्रभावी पैरवी जारी रखी जाएगी, ताकि अपराधियों को कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके और समाज में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हो।