वाराणसी। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों से नदियों में छोड़े जा रहे पानी के कारण वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने गंगा नदी में नावों के संचालन पर रोक लगा दी है।

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, सोमवार 17 अगस्त की सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 65.8 मीटर दर्ज किया गया। नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है और जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वार्निंग लेवल से अभी नीचे है जलस्तर

वाराणसी में गंगा नदी का चेतावनी स्तर यानी वार्निंग लेवल 70.26 मीटर निर्धारित है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है।

फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसे देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर निचले इलाकों और घाटों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

नाव संचालन पर लगी रोक

गंगा में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार से ही नावों के संचालन पर रोक लगा दी है।

पुलिस का कहना है कि यात्रियों और नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। तेज बहाव के दौरान नाव संचालन जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए अगले आदेश तक नावों के संचालन पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

घाटों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतें।

घाटों पर बढ़ा पानी

गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही वाराणसी के कई घाटों पर पानी ऊपर की ओर पहुंचने लगा है। घाटों की सीढ़ियां धीरे-धीरे जलमग्न हो रही हैं।

गंगा किनारे होने वाली धार्मिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। प्रशासन लगातार घाटों की स्थिति की निगरानी कर रहा है।

वाराणसी में गंगा घाटों का धार्मिक और पर्यटन महत्व काफी अधिक है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाता है।

1978 में पहुंचा था रिकॉर्ड स्तर

वाराणसी में गंगा के जलस्तर का सबसे भयावह रिकॉर्ड वर्ष 1978 में दर्ज किया गया था। उस समय नदी का जलस्तर 73.90 मीटर तक पहुंच गया था।

इतिहास में दर्ज इस रिकॉर्ड को देखते हुए प्रशासन हर बार मानसून के दौरान गंगा के जलस्तर पर विशेष नजर रखता है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

पहाड़ों की बारिश का असर

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का मुख्य कारण पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश और ऊपरी जलाशयों से छोड़ा जा रहा पानी बताया जा रहा है।

उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण गंगा और उसकी सहायक नदियों में पानी बढ़ रहा है, जिसका असर मैदानी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग की टीमें लगातार नदी के जलस्तर की निगरानी कर रही हैं।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर जागरूक किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी रखी गई हैं।

फिलहाल काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में बारिश और पानी की आवक के आधार पर नदी के जलस्तर में और बदलाव देखने को मिल सकता है।

Tags: