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लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को बड़ी हिस्सेदारी मिली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में यूपी के आठ नेताओं को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। खास बात यह है कि प्रदेश से **दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दो राष्ट्रीय महासचिव, दो राष्ट्रीय सचिव और दो राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष** बनाए गए हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इन नियुक्तियों को भाजपा की संगठनात्मक और सामाजिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नई टीम में अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा और 403 विधानसभा सीटों वाला राज्य है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के आठ नेताओं को प्रमुख पद देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेखा वर्मा और तारिक मंसूर बने उपाध्यक्ष
उत्तर प्रदेश से **रेखा वर्मा और प्रोफेसर तारिक मंसूर** को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। रेखा वर्मा भाजपा की अनुभवी नेताओं में शामिल हैं और इससे पहले भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। मंसूर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी हैं। भाजपा में उनकी भूमिका को मुस्लिम समुदाय, विशेषकर पसमांदा वर्ग के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जाता है।
दोनों नेताओं के जरिए भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व के साथ सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है।
स्मृति ईरानी समेत दो राष्ट्रीय महासचिव
उत्तर प्रदेश के खाते में राष्ट्रीय महासचिव के दो पद भी आए हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री **स्मृति ईरानी** का है। अमेठी से पूर्व सांसद स्मृति ईरानी की संगठन में बड़ी वापसी हुई है।
स्मृति ईरानी राष्ट्रीय राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में राहुल गांधी को हराने के बाद उनका राजनीतिक कद काफी बढ़ा था। अब उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।
राष्ट्रीय महासचिव पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बेहद महत्वपूर्ण पद होता है। अलग-अलग राज्यों के प्रभार से लेकर चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार तक में महासचिवों की बड़ी भूमिका रहती है।
दो राष्ट्रीय सचिव भी उत्तर प्रदेश से
भाजपा की नई टीम में उत्तर प्रदेश के दो नेताओं को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी दी गई है। इन नियुक्तियों से राष्ट्रीय संगठन में यूपी की मौजूदगी और मजबूत हुई है।
राष्ट्रीय सचिव संगठन और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें विभिन्न प्रदेशों में संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के नेताओं को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने से प्रदेश संगठन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दो मोर्चों की कमान भी यूपी के पास
उत्तर प्रदेश के लिए एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा के दो राष्ट्रीय मोर्चों की जिम्मेदारी भी प्रदेश से जुड़े नेताओं को मिली है। इसमें अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान **कुंवर बासित अली** को सौंपी गई है।
बासित अली उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष रह चुके हैं। अब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने उनका कद बढ़ाया है। उनके सामने देशभर में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
मोर्चा संगठनों के जरिए भाजपा अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास करती है। ऐसे में राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष की जिम्मेदारी चुनावी रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होती है।
2027 से पहले सामाजिक समीकरण पर नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ संगठन को मजबूत करने में जुटी है। राष्ट्रीय टीम में यूपी को बड़ी हिस्सेदारी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
रेखा वर्मा के जरिए महिला और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व, तारिक मंसूर और बासित अली के जरिए मुस्लिम समुदाय तक पहुंच और स्मृति ईरानी जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे को संगठन में सक्रिय करने से पार्टी ने कई समीकरणों को एक साथ साधने का प्रयास किया है।
यूपी क्यों है भाजपा के लिए इतना अहम?
उत्तर प्रदेश का चुनावी महत्व केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। राज्य की 80 लोकसभा सीटें केंद्र की सत्ता का रास्ता तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि भाजपा राष्ट्रीय संगठन में यूपी को हमेशा प्रमुखता देती रही है।
नितिन नबीन की नई टीम में दो उपाध्यक्ष, दो महासचिव, दो सचिव और दो मोर्चा अध्यक्ष के रूप में यूपी की हिस्सेदारी इस बात का संकेत है कि पार्टी 2027 की चुनावी लड़ाई को लेकर अभी से संगठनात्मक तैयारी तेज कर रही है।
आने वाले समय में इन राष्ट्रीय पदाधिकारियों को अलग-अलग राज्यों और चुनावी अभियानों की जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं। फिलहाल आठ महत्वपूर्ण पदों के साथ उत्तर प्रदेश नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में मजबूत हिस्सेदारी हासिल करने में सफल रहा है।
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