नशामुक्त समाज के लिए जागरूकता अभियान

Update: 2026-08-02 13:14 GMT

मेरठ। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फार विकसित भारत-संकल्प अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिसे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. हरे कृष्ण ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब देश का युवा वर्ग नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी क्षमता को अनुसंधान, नवाचार, खेल और समाज सेवा जैसे सकारात्मक कार्यों में लगाएं। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनके स्वस्थ रहने से ही समाज और राष्ट्र मजबूत बन सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रेक्षागृह परिसर में ललित कला विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुई। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी चित्रकला और कलाकृतियों के माध्यम से नशे के नुकसान और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को दर्शाया। प्रदर्शनी में दिखाया गया कि किस तरह नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। उपस्थित अतिथियों और विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी की सराहना की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. रवि राणा ने नशे के गंभीर प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि परिवार, समाज और देश के विकास पर भी नकारात्मक असर डालता है। उन्होंने बताया कि तंबाकू, शराब और अन्य मादक पदार्थ धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे हृदय, फेफड़े, यकृत, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।

डॉ. रवि राणा ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने मित्रों एवं परिवार के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि नशे की आदत व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर देती है। इसके कारण मानसिक तनाव, अवसाद, हिंसात्मक प्रवृत्ति, सड़क दुर्घटनाएं और कई सामाजिक अपराध बढ़ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक नशा कई बार व्यक्ति की जान तक ले सकता है।

कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ. डीके चौहान ने विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन अपनाने और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा यदि स्वस्थ आदतों को अपनाएंगे तो वे अपने साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर प्रो. वीरपाल सिंह ने नशा मुक्ति को आत्मिक शुद्धि और सामाजिक उत्थान से जोड़ते हुए सभी को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्ति केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। वहीं, कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह ने ध्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक मजबूती और आत्म नियंत्रण का अभ्यास कराया।

इस दौरान सभी उपस्थित लोगों को ‘नशा मुक्त युवा फार विकसित भारत-संकल्प अभियान’ की शपथ भी दिलाई गई। विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन को ऑनलाइन माध्यम से सुना गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नशे के दुष्परिणामों पर आधारित प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति भी दी। नाटक के माध्यम से बताया गया कि नशा किस तरह व्यक्ति के सपनों, परिवार की खुशियों और समाज के भविष्य को बर्बाद कर सकता है। इसके अलावा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति के जरिए स्वस्थ जीवन, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में डॉ. केके शर्मा, डॉ. वैशाली पाटिल, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. आराधना, डॉ. गार्गी, डॉ. रजनी श्रीवास्तव, डॉ. निर्लेप कौर, डॉ. वंदना और डॉ. अंजली शर्मा सहित कई शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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