उत्तर प्रदेश

Railways' का नेक्स्ट जेनरेशन PRS शुरू, काउंटर पर कम होगा इंतजार

Ratna Netam
2 Aug 2026 6:28 PM IST
Railways का नेक्स्ट जेनरेशन PRS शुरू, काउंटर पर कम होगा इंतजार
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उत्तर प्रदेश : आशीष श्रीवास्तव, गोरखपुर। भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए टिकट आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 40 साल पुरानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) व्यवस्था को अब धीरे-धीरे नेक्स्ट जेनरेशन पीआरएस से बदला जा रहा है। रेलवे ने नए सिस्टम का बीटा वर्जन लागू कर दिया है और दक्षिण भारत की एक इंटरसिटी ट्रेन में टिकट बुकिंग का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। रेलवे का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट बुकिंग की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज, सरल और पारदर्शी हो जाएगी।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान आरक्षण प्रणाली लंबे समय से पुराने कोड आधारित सिस्टम पर काम कर रही है। इसमें टिकट बनाने के लिए कर्मचारियों को कई कमांड और शॉर्ट कोड याद रखने पड़ते हैं। इस वजह से कई बार टिकट बनाने में ज्यादा समय लगता है और सिस्टम पर दबाव बढ़ने से परेशानी भी आती है। खासतौर पर तत्काल टिकट बुकिंग के समय यात्रियों को सर्वर धीमा होने या लंबी कतार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नए नेक्स्ट जेनरेशन पीआरएस में इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक बनाया गया है। इसमें ब्राउजर और माउस आधारित क्लिक इंटरफेस उपलब्ध होगा, जिससे कर्मचारियों को कमांड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टिकट बनाने की प्रक्रिया आसान होने के साथ-साथ समय में भी कमी आएगी। अभी रेलवे काउंटर पर एक टिकट तैयार करने में औसतन करीब दो मिनट का समय लगता है, लेकिन नई प्रणाली लागू होने के बाद यह समय घटकर लगभग एक मिनट रह जाने की उम्मीद है।

रेलवे के अनुसार, अगस्त 2026 से देशभर की ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से नए रिजर्वेशन सिस्टम में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए पहले चरण में तकनीकी परीक्षण और कर्मचारियों को नए सिस्टम की ट्रेनिंग दी जा रही है। रेलवे का लक्ष्य है कि यात्रियों को आरक्षण के दौरान होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके और टिकट सेवा को ज्यादा प्रभावी बनाया जाए।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका आधुनिक सर्वर होगा। रेलवे ने इसे क्लाउड तकनीक पर आधारित बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था की क्षमता करीब 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक प्रक्रिया करने की होगी। इससे त्योहारों, छुट्टियों और तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान आने वाली सर्वर संबंधी समस्याओं में काफी कमी आने की संभावना है।

नई व्यवस्था में यात्रियों के लिए भी सुविधा बढ़ाई जाएगी। अब रेलवे काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों को भी मोबाइल पर टिकट की जानकारी एसएमएस या क्यूआर कोड के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे यात्रियों को टिकट संभालकर रखने की परेशानी कम होगी और डिजिटल सुविधा को बढ़ावा मिलेगा।

इधर, गोरखपुर में रेलवे से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया। डोमिनगढ़ और जगतबेला रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे पुल संख्या-153 के नीचे से गुजरने वाले डोमिनगढ़-डोहरिया मार्ग को बंद किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और डोमिनगढ़ लिंक मार्ग को जाम कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि इस रास्ते से स्थानीय लोग रोजाना आवागमन करते हैं। बड़े वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए पहले से ही बैरियर लगाए गए हैं, ऐसे में रास्ता पूरी तरह बंद करना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद एसडीएम सदर की मौजूदगी में प्रशासन, रेलवे अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत हुई।

वार्ता के बाद सहमति बनी कि अंडरपास बनने तक रास्ता खुला रहेगा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पुल के नीचे से गुजरने वाले वाहनों के कारण सुरक्षा खतरा बना रहता है। यदि कोई बड़ा वाहन पुल के गर्डर से टकराता है तो गंभीर हादसा हो सकता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से रास्ता बंद किया गया था।

रेलवे की नई टिकट व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर यातायात से जुड़े फैसले यह दिखाते हैं कि रेलवे एक ओर जहां तकनीक के जरिए यात्रियों की सुविधा बढ़ाने पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा मानकों को भी प्राथमिकता दे रहा है। नेक्स्ट जेनरेशन पीआरएस लागू होने के बाद यात्रियों को तेज टिकट बुकिंग और बेहतर डिजिटल सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

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