चूहे के बिल में मिला खतरनाक नागों का झुंड

Update: 2026-07-31 10:21 GMT

उत्तर प्रदेश, कुशीनगर: लक्ष्मीपुर गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मकान परिसर में बने चूहे के बिल से एक साथ 28 कोबरा के बच्चे और एक विशाल सर्प बाहर निकला। जहरीले सांपों के इतने बड़े समूह को देखकर ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे सर्प मित्र ने करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद सभी सांपों को सुरक्षित पकड़ लिया और उन्हें जंगल में छोड़ दिया। समय रहते हुए किए गए इस रेस्क्यू से एक बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव निवासी कृष्णा शुक्ला के मकान परिसर में गुरुवार को अचानक चूहे के बिल से एक कोबरा का बच्चा बाहर निकलता दिखाई दिया। परिवार के लोगों ने जब उसे देखा तो वे घबरा गए। उन्होंने सावधानी बरतते हुए इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी। शुरुआत में एक सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर डिब्बे में बंद कर दिया गया, लेकिन बिल के आसपास लगातार हलचल दिखाई देने लगी। इससे आशंका हुई कि अंदर और भी सांप मौजूद हो सकते हैं।

इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी जानकारी कोटवा निवासी सर्प मित्र हरेंद्र कुशवाहा को दी। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सर्प मित्र ने बताया कि बिल के अंदर काफी संख्या में सांप होने की संभावना थी, इसलिए बिना जल्दबाजी किए पूरी सतर्कता के साथ अभियान चलाया गया।

रेस्क्यू के दौरान जैसे-जैसे बिल की खुदाई की गई, उसमें से एक के बाद एक कोबरा के बच्चे निकलने लगे। कुछ समय बाद कुल 28 कोबरा के बच्चों के साथ एक विशाल सर्प भी बाहर निकाला गया। इतने अधिक संख्या में जहरीले सांप मिलने से मौके पर मौजूद ग्रामीणों में डर और हैरानी दोनों का माहौल था। बड़ी संख्या में लोग इस रेस्क्यू अभियान को देखने के लिए मौके पर जुट गए।

सर्प मित्र हरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि कोबरा के बच्चे बेहद जहरीले होते हैं और अगर समय रहते उन्हें नहीं पकड़ा जाता तो वे आसपास के घरों या आबादी वाले क्षेत्र में फैल सकते थे। इससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने और सावधानी से किए गए प्रयास के कारण सभी सांपों को सुरक्षित बचाया जा सका।

रेस्क्यू पूरा होने के बाद सभी सांपों को वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बाद में उन्हें वाल्मीकि नगर के जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान वन्यजीवों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

ग्रामीणों ने सर्प मित्र की इस पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि अगर समय पर रेस्क्यू नहीं किया जाता तो इतनी बड़ी संख्या में मौजूद कोबरा के बच्चे गांव में फैल सकते थे और किसी भी समय कोई अप्रिय घटना हो सकती थी।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से भी अपील की है कि गांवों में ऐसे मामलों को देखते हुए जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग जहरीले जीवों के मिलने पर उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना दें। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में सांप अक्सर सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों और आसपास के इलाकों में पहुंच जाते हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

लक्ष्मीपुर गांव में हुआ यह रेस्क्यू अभियान इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है कि सभी जहरीले सांपों को सुरक्षित तरीके से हटाकर जंगल में पहुंचा दिया गया।

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