सीजीएमएससी 2023 के दर से टेंडर न स्वीकृत कर 2026 में 30 फीसदी अधिक नया टेंडर
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल और स्वास्थ्य सचिव के निर्देशों को एमडी सीजीएमएससी पालन नहीं कर रहे, हितेश साहू को मिली लिपापोती की जिम्मेदारी
टेंडर की प्रक्रिया में सभी कलम को पूर्णता भरना आवश्यक है लेकिन किसी भी कंपनी ने सभी काम की पूर्ति नहीं की
टेंडर के नियम के अनुसार सरकारी बिक्री आदेश ड्रग कोड होना अति आवश्यक जो किसी भी कंपनी ने उपयोग नहीं किया
त्रस्ञ्ज संबंधित सभी दस्तावेज़ कंपनियों को जमा करने के लिए अनिवार्य है जो किसी भी कंपनी ने पूर्ण नहीं किया
टेंडर प्रक्रिया कि अनुसार ऑडिट रिपोर्ट जिसमें सरकारी आदेश के अनुसार खरीदी बिक्री के आंकड़े हो उसको जमा करना भी अति आवश्यक था जो किसी भी कंपनी ने अभी तक नहीं जमा किया
आयुर्वेदिक दवाओं की वैलिड लाइसेंस प्रोडक्शन वैलिड लाइसेंस भी अनिवार्य प्रस्तुत करना था जो किसी भी कंपनी ने पूर्ण नहीं किया

रायपुर (जसेरि)। सीजीएमएससी अपनी कारगुजारियों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहा है। अमानक दवाईयों की खरीदी हो या अस्पताल के उपकरण और फर्नीचर खऱीदी मामले में 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर भ्रष्ट और अक्षम अधिकारियों मनमानी का अड्डा बना हुआ है। आयुर्वेदिक दवा खरीदी मामले में भ्रष्टाचार औऱ विवाद उजागर होने के बाद विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उस मामले का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य सचिव को दिए कार्यवाही के निर्देश का न तो एमडी सीजीएमएससी ने पालन किया और न ही कोई कार्रवाई हुई उल्टे आयुर्वेदिक निविदा मामले आरोपी को लीपापोती और अपा6ों को पात्र बनाने के ठेका दे दिया गया। वर्ष 2023 के दर और 2026 के दर में 25 से 30 प्रतिशत अधिक खर्च आएगा। िजससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।

मामला 2023 का था जिसमें रेट कांटेक्ट डेढ़ साल पहले समाप्त हो गया है। पूरे प्रदेश में आयुर्वेदिक दवाइयां की कमी लगातार देखी जा रही है जिसको गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव के 2024 में दिए गए निर्देश के अनुसार सीजी एमएससी के प्रबंध संचालक के द्वारा 2023 के रेट कांटेक्ट को एक वर्ष एक्सटेंशन करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य सचिव को भेजा गया था । जिसको स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य मंत्री वित्त सचिव और वित्त मंत्री के द्वारा परीक्षण करने के उपरांत 6 महीने का एक्सटेंशन सीजी एमएससी के एमडी को प्रदान किया गया परंतु सीजी एमएससी के एमडी की गलत नियत और अक्षम कार्य क्षमता के चलते एक माह बीत जाने के बाद भी उस एक्सटेंशन आदेश का पालन नहीं हुआ ।
आयुर्वेदिक दवाइयां की खरीदी नहीं हो पा रही
जीवन रक्षक आयुर्वेदिक दवाइयां की खरीदी नहीं होने के कारण मरीजों को आयुर्वेदिक दवाई नहीं मिलने से हाहाकार मच गया । अखबारों में लगातार आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाई की कमी से मरीजों की हालात बिगड़ती गई तो दवा खरीदी करने निविदी प्रकाशित की गई िजसमें भी बड़ा खेल हुआ। सीजीएमएससी के द्वारा आयुर्वेदिक दवाई बनाने वाली जितनी भी कंपनियां निविदा में भाग ली है उन सभी कंपनियों के दस्तावेज अधूरे फर्जी थे। जिसके कारण वर्तमान में चार निविदा जारी की गई है औऱ सारी निविदा कम दर होने पर निरस्त करना था परंतु सीजी एमएससी के प्रबंध संचालक के द्वारा समितियां और कर्मचारियों अधिकारियों के ऊपर दबाव डालकर उन अपात्र कंपनियों को पात्र बनाने के लिए कहा गया। इसी क्रम में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय एक बड़ा घोटाला हुआ था । जिसमें लैब, केमिकल, अस्पतालों के मशीनरी फर्नीचर व दवाइयां की खरीदी से संबंधित था, जिस पर 10000 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार सीजीएमएससी के माध्यम से हुआ था । मोक्षित कॉरपोरेशन दुर्ग एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की । जिस पर कई अधिकारी व्यापारी जेल में है । यहां इस बात का उल्लेख करना अति आवश्यक है कि तत्कालीन निविदा के दस्तावेजों में हेरा फेरीऔर गोपनीयता भंग करने वाले हितेश साहू उस समय सर्वेसर्वा था जो अंदाधुंध कमाई कर 50 करोड़ का आसामी बन गया। और वही वर्तमान में भी इस पद पर बैठा हुआ है और लगातार भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा है। मोक्षित कारपोरेशन के विरुद्ध जो घोटाला हुआ था उसका सरगना हितेश साहू ही था और वही अब इस मामले में सरकारी गवाह बनकर सरकार औऱ जांच एजेंसी की आंकों में धूल झोंक रहा है।
सीजीएमएससी आयुर्वेदिक दवाई खरीदी मामले में मंत्री और सरकार के आदेशों की अवहेलनाओं को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गंभीरता से लेकर ठोस करवाई के निर्देश दिए है। आयुर्वेदिक दवाईयां की ख़रीद संबंधी टेंडर घोटाले में कई अधिकारी औऱ -कर्मचारी शामिल है। जिन पर आज तक कार्रवाई ही नहीं हुई है।
मोक्षित कारपोरेशन दवाई घोटाले में गवाह नं.15 हितेष साहू जो अब माफी गवाह बनकर वर्तमान विभाग की सभी टेंडर प्रतिक्रिया को निष्पादन कर रहा है। और अपात्र कंपनियों को निविदा पास करने हेतु नया टेंडर प्लान भी सरकार के खिलाफ बनाया जबकि पुराने टेंडर के हिसाब से ही विभागीय मंत्री और सचिव ने आदेश दिया था। जिसमें सरकार के करोड़ों रूपए की बचत हो रही थी। किसके दबाव में साहू और अधिकारी मिलकर नए टेंडर का खेल खेले। यह भी जानकारी मिली है कि एमडी द्वारा समिति के उपर दवाब डालकर अपात्र कंपनियों को पात्र किया जा रहा।
आजानी फार्मास्युटिकल
अषौधि हेल्थ केयर
भूषण फार्मास्युटिकल
दीन दलाय इंडस्ट्रीज
हिमालयन रिसर्च लेब्रोटरी
जमना हर्बल रिसर्च
जमना फार्मास्युटिकल
बैजनाथ फार्मास्युटिकल
पेटलॉड महानरोग्य मंडल फार्मास्युटिकल
रोहनपाल प्राइवेट लिमि
हिमालयन ड्रग्स कंपनी
उपकरण फार्मास्युटिकल
ये सभी कंपनियां नए टेंडर में शामिल है। और सभी के टेंडर अनिवार्यता शर्तों के अधीन दस्तावेज जमा नहीं किए और जो दस्तावेज लगाए गए वह अपूर्ण है। उसके बावजूद एमडी की दबाव पूर्ण नीति के तहत टेंडर कमेटी को अपात्र संस्थाओं को टेंडर जारी करने का मौखिक आदेश दिया गया। जिससे 25 फीसदी से ज्यादा रेंट कांटेक्ट होने के कारण प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि होने का अनुमान है।
> सचिव वित्त एवं सचिव स्वास्थ्य के आदेश की अवहेलना
> अपात्र कम दस्तावेज , गलत दस्तावेजों वाली कंपनियों को पात्र करने के लिए समितियों पर दबाव व उमके साथ दुर्व्यवहार करना
> 2023 के दर पर न लेकर 2026 के दर में लेने की तैयारी , बड़ा भ्रष्टाचार करने की तैयारी, इस प्रक्रिया से सरकार को करोड़ों का नुकसान होगा
> टीपीओ हितेश साहू जो मोक्षित कार्पोरेशन के कई हजार करोड़ के भ्रष्टाचार का सरगना आज भी निविदा प्रक्रिया का प्रमुख बना हुआ है।
> सीजीएमएससी बना भ्रष्टाचार का अड्डा
> अधिक दर पर आयुर्वेदिक दवा खरीदी कर मोटी कमीशनखोरा कर रहे वहां के नेता अधिकारी -कर्मचारी
> अपात्र कंपनियों को एमडी के द्वारा समिति के ऊपर दबाव डालकर कराया जा रहा पात्र
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