बाल संप्रेक्षण गृह से 10 से अधिक नाबालिग आरोपी फरार, पुलिस तलाश में जुटी
छग
Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बाल संप्रेक्षण गृह से सोमवार की सुबह 10 से अधिक आरोपी बालक फरार हो गए। ये सभी बालक गंभीर अपराधों के आरोपियों के रूप में यहां रखे गए थे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलगांव थाना पुलिस ने तुरंत तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और फरार बालकों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह घटना सुबह लगभग 10 बजे हुई, जब बालक अचानक संप्रेक्षण गृह के सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए बाहर निकल गए। बालकों की संख्या और उनकी गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में सघन चेकिंग और नाकेबंदी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी बालक की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, लेकिन सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है।
दुर्ग बाल संप्रेक्षण गृह में यह पहला मौका नहीं है जब ऐसी घटनाएं हुई हों। पिछले वर्षों में भी कई बार सुरक्षा में चूक के मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों और अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बाल संप्रेक्षण गृह में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, यह घटना प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करती है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि फरार बालकों की पहचान और उनके अपराध इतिहास की जांच कर उन्हें जल्द ही पकड़ा जाएगा। आसपास के इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चल रहा है और स्थानीय लोगों से भी किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने का आग्रह किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि बालकों की सुरक्षा और पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बाल संप्रेक्षण गृहों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारियों के प्रशिक्षण और निगरानी उपकरणों में सुधार अनिवार्य है। ऐसे मामलों से न केवल बालक खुद जोखिम में पड़ते हैं, बल्कि समाज में असुरक्षा की भावना भी बढ़ती है। दुर्ग जिले में यह घटना स्थानीय प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जल्द ही एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाए जाने की संभावना है, जो बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा खामियों और फरार होने वाले बालकों के व्यवहार का विस्तृत अध्ययन करेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से बच्चों के पुनर्वास पर भी असर पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और सामाजिक सुधार पर भी ध्यान दिया जाए। फिलहाल, पुलिस सभी संभव प्रयास कर रही है ताकि फरार बालकों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित हो।