गरीबों के राशन की बड़ी कालाबाजारी का खुलासा, 378 बोरी PDS चावल और 6 बोरी चना जब्त
छग
Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन की कालाबाजारी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य विभाग ने जगदलपुर शहर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 378 बोरी पीडीएस चावल और 6 बोरी पीडीएस चना जब्त किया है। जब्त खाद्यान्न की अनुमानित कीमत 7.50 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान विभाग ने एक ट्रक को भी जब्त किया है, जिसमें राशन का चावल लोड किया जा रहा था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने बस्तर में पीडीएस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार खाद्य विभाग को सूचना मिली थी कि जगदलपुर के अनुपमा चौक स्थित भवानी चाट भंडार के पीछे एक गोदाम में बड़ी मात्रा में पीडीएस का चावल अवैध रूप से रखा गया है और उसे ट्रक में भरकर कहीं भेजने की तैयारी की जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गोदाम में छापेमार कार्रवाई की। जांच के दौरान अधिकारियों ने गोदाम से 378 बोरी पीडीएस चावल और 6 बोरी पीडीएस चना बरामद किया। कुल मिलाकर करीब 186 क्विंटल चावल जब्त किया गया। मौके पर मौजूद ट्रक क्रमांक CG 04 LC 9409 में भी राशन का चावल लोड किया जा रहा था। विभाग ने ट्रक को भी जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सिटी कोतवाली पुलिस के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
प्राथमिक पूछताछ में गोदाम संचालक मोहम्मद जिलानी ने दावा किया कि वह हाट-बाजार और फुटकर खरीद के माध्यम से चावल खरीदकर व्यापारियों को बेचता है। हालांकि खाद्य विभाग उसके इस दावे की गहन जांच कर रहा है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी राशन दुकानों से गरीबों के लिए आवंटित पीडीएस चावल आखिर खुले बाजार तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। खाद्य विभाग का मानना है कि यह मामला केवल एक गोदाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पीडीएस खाद्यान्न की खरीद, परिवहन और बिक्री में किन लोगों की भूमिका रही है। गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
इससे पहले बुधवार को भी खाद्य विभाग ने एक पिकअप वाहन से 80 बोरी पीडीएस चावल जब्त किया था, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये आंकी गई थी। लगातार दो बड़ी जब्तियों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बस्तर में गरीबों के राशन की कालाबाजारी लंबे समय से संगठित तरीके से की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरकारी राशन खुले बाजार तक पहुंच रहा है, तो यह केवल स्थानीय स्तर की लापरवाही नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच केवल गोदाम संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राशन वितरण श्रृंखला के प्रत्येक स्तर की पड़ताल आवश्यक है। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीडीएस खाद्यान्न की कालाबाजारी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विभाग का कहना है कि गरीबों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में खाद्य निरीक्षक घनश्याम राठौर, सहायक खाद्य निरीक्षक दिव्या रानी, पायल वर्मा सहित विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।