धान के अवैध परिवहन पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई, शासकीय कर्मचारी निलंबित

छग

Update: 2026-01-26 12:53 GMT
Raigarh. रायगढ़। जिले में धान के अवैध परिवहन पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर धान के अवैध परिवहन में संलिप्तता पाए जाने पर एक शासकीय कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई विकासखण्ड धरमजयगढ़ अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुडेकेला में पदस्थ भृत्य रमेश साव के विरुद्ध की गई है। प्रशासन को प्राप्त जानकारी और जांच के दौरान तैयार किए गए पंचनामा एवं संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि रमेश साव ओडिशा राज्य से छत्तीसगढ़ में धान का अवैध रूप से परिवहन कर रहे थे। जांच में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रशासनिक कदम उठाया गया।
कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि रमेश साव एक शासकीय सेवक हैं और उनके द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल शासन के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत है, बल्कि उनके पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को भी दर्शाता है। शासकीय कर्मचारी होते हुए अवैध गतिविधियों में शामिल होना प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक विश्वास दोनों के लिए गंभीर विषय माना गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि रमेश साव का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन है। साथ ही यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान रमेश साव का मुख्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय धरमजयगढ़ निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र होंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा और आगे की विभागीय कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह संदेश दिया है कि धान के अवैध परिवहन और तस्करी के मामलों में किसी भी स्तर पर संलिप्तता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह व्यक्ति शासकीय सेवक ही क्यों न हो। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि जिले में अवैध धान परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई को धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
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