रेल सुरक्षा में ऐतिहासिक सुधार: 2026-27 में अब तक सिर्फ 2 बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं

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Update: 2026-07-29 17:09 GMT
New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। भारतीय रेल ने सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रेन दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। आधुनिक तकनीक, मजबूत अवसंरचना, उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली, बेहतर ट्रैक रखरखाव और स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' के विस्तार के चलते वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक केवल दो बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेल में
सुरक्षा सर्वोच्च
प्राथमिकता है और पिछले एक दशक में इस दिशा में किए गए निवेश तथा सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में जहां 135 बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या घटकर केवल 16 रह गई, जो लगभग 88 प्रतिशत की कमी है।

इसके बाद वर्ष 2026-27 में जून तक केवल दो बड़ी दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। इसी तरह परिणामी दुर्घटना सूचकांक भी वर्ष 2014-15 के 0.11 से घटकर वर्ष 2025-26 में 0.01 रह गया, जो लगभग 91 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यह सूचकांक ट्रेनों के कुल परिचालन किलोमीटर के अनुपात में दुर्घटनाओं की संख्या को दर्शाता है और रेलवे परिचालन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। रेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार बजट में बढ़ोतरी कर रही है। वर्ष 2013-14 में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर 39,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इस धनराशि का उपयोग आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, ट्रैक नवीनीकरण, पुलों के रखरखाव, नई तकनीक और सुरक्षा उपकरणों की स्थापना में किया जा रहा है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि 30 जून 2026 तक देशभर के 6,671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ट्रैक सर्किटिंग जैसी आधुनिक प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं। इससे सिग्नलों और ट्रैक की निगरानी पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और स्वचालित हो गई है। इसके अलावा 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग व्यवस्था लागू की गई है, जिससे रेल और सड़क यातायात के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हुआ है। रेलवे ने लोको पायलटों की सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाने के लिए सभी लोकोमोटिव में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए हैं। कोहरे वाले इलाकों में जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे चालक दल को आगे आने वाले सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी समय रहते मिल जाती है। वहीं सिग्नलों से पहले रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं ताकि कम दृश्यता में भी लोको पायलटों को आवश्यक संकेत मिल सकें।

रेल पटरियों की गुणवत्ता में भी बड़े स्तर पर सुधार किया गया है। रेलवे अब 60 किलोग्राम क्षमता वाली उच्च गुणवत्ता की रेल, प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर, फ्लैश बट वेल्डिंग और आधुनिक ट्रैक मशीनों का उपयोग कर रहा है। रेलों में दरार और वेल्ड की खामियों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासोनिक फॉल्ट डिटेक्शन परीक्षण नियमित रूप से किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप वर्ष 2013-14 में जहां वेल्ड विफलताओं की संख्या 3,699 थी, वह वर्ष 2025-26 में घटकर केवल 272 रह गई। इसी अवधि में रेल पटरियों में दरारों की संख्या भी 2,548 से घटकर 208 हो गई, जो 92 प्रतिशत की कमी है। रेलवे ने कोचों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पारंपरिक आईसीएफ कोचों को चरणबद्ध तरीके से एलएचबी कोचों से बदलना जारी रखा है। वर्ष 2014 के बाद अब तक 49 हजार से अधिक एलएचबी कोच तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा सभी मानवरहित ब्रॉड गेज लेवल क्रॉसिंग जनवरी 2019 तक समाप्त कर दी गई हैं।

रेलवे पुलों का नियमित निरीक्षण, कोचों में अग्नि सुरक्षा प्रणाली, धुआं पहचान प्रणाली तथा यात्रियों के लिए अग्नि सुरक्षा संबंधी निर्देश भी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना रहे हैं। भारतीय रेल की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा परियोजना 'कवच' भी तेजी से विस्तार कर रही है। यह स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो निर्धारित गति सीमा से अधिक होने पर स्वतः ब्रेक लगा देती है और सिग्नल उल्लंघन जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करती है। इसका पहला परीक्षण वर्ष 2016 में हुआ था और वर्ष 2020 में इसे राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया। रेल मंत्रालय के अनुसार 16 जुलाई 2024 को आरडीएसओ द्वारा अनुमोदित कवच वर्जन 4.0 अब भारतीय रेल के विविध नेटवर्क के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। इसमें अधिक सटीक लोकेशन ट्रैकिंग, बड़े यार्डों में बेहतर सिग्नल पहचान, ऑप्टिकल फाइबर आधारित स्टेशन-टू-स्टेशन इंटरफेस और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा समन्वय जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं।

20 जुलाई 2026 तक कवच 4.0 का सफल संचालन 2,569 रूट किलोमीटर पर शुरू हो चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के 1,423 किलोमीटर और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के 1,146 किलोमीटर लंबे व्यस्त रेल मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा देशभर के 21,858 रूट किलोमीटर पर कवच कार्यान्वयन का काम जारी है। रेलवे अब तक 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा चुका है, 1,668 दूरसंचार टावर स्थापित किए जा चुके हैं और 988 स्टेशनों पर स्टेशन डेटा सेंटर बनाए गए हैं। साथ ही 7,327
लोकोमोटिव
और 1,200 ईएमयू तथा एमईएमयू ट्रेनों में कवच लगाने का कार्य भी चल रहा है। रेल मंत्रालय ने बताया कि कवच तकनीक के सफल संचालन के लिए अब तक 94 हजार से अधिक तकनीशियनों, इंजीनियरों, लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जून 2026 तक इस परियोजना पर 3,874 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 2,066 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आधुनिक तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचे, बेहतर रखरखाव और प्रशिक्षित मानव संसाधन के संयोजन से भारतीय रेल लगातार अधिक सुरक्षित बन रही है। आने वाले वर्षों में कवच प्रणाली और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपायों का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा, जिससे यात्रियों को और अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद रेल यात्रा उपलब्ध हो सके।
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