Balrampur. बलरामपुर। छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर बलरामपुर जिले के समीप हुई भीषण सड़क दुर्घटना को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना में यात्रियों की मृत्यु को अत्यंत दुखद बताते हुए दिवंगतों के परिजनों के प्रति अपनी गहन संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही बचाव और राहत कार्य तत्काल प्रारंभ कर दिए गए। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं और आपसी समन्वय के साथ राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो तथा घायलों को शीघ्र और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस भीषण दुर्घटना में कुल 87 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 27 घायलों का उपचार कार्मेल अस्पताल में किया जा रहा है, जबकि 60 घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ द्वारा घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गंभीर रूप से घायल यात्रियों के उपचार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर घायलों को हायर सेंटर रेफर किया जाए और इलाज में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दी जाए। राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और घायल यात्रियों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्घटनाएं बेहद पीड़ादायक होती हैं और इनसे सबक लेते हुए भविष्य में सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा दुर्घटना स्थल पर यातायात को नियंत्रित किया गया और राहत कार्यों को सुचारू रूप से संचालित किया गया। जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, यात्रियों की सावधानी और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश भी दिए हैं, ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।