Khairagarh. खैरागढ़। राजनांदगांव रेंज में नक्सल उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे सघन अभियान को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने बकरकट्टा थाना क्षेत्र के लमरा जंगल के भीतर दो अलग-अलग स्थानों से नक्सलियों द्वारा मिट्टी के नीचे छुपाए गए भारी डंप बरामद किए हैं। यह कार्रवाई हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अभियुक्तों से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर की गई। 8 दिसंबर को एमएमसी जोन के 12 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे थे।
पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि बकरकट्टा क्षेत्र के लमरा जंगल में नक्सलियों ने हथियार, विस्फोटक और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियां छुपाई हुई हैं। यह जानकारी सुरक्षा बलों के लिए निर्णायक साबित हुई। सूचना मिलने के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने विशेष तलाशी अभियान शुरू किया। घने जंगल और दुर्गम भूभाग में कई घंटों की खोजबीन के बाद दो अलग-अलग स्थानों पर गहरे दबे डंप पाए गए। इन डंप से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, नक्सली साहित्य और दैनिक उपयोग की सामग्रियां बरामद हुईं।
बरामद सामग्री की विस्तृत सूची इस प्रकार है:
इंसास LMG रायफल – 01
.303 रायफल – 02 (58 जिंदा राउंड सहित)
12 बोर गन – 01 (25 राउंड)
BGL – 01 (04 जिंदा व 01 खाली सेल)
नक्सली वर्दी – 02 सेट
पोच – 02
पिट्ठू – 02
इसके अलावा तिरपाल, मेडिकल सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और नक्सली साहित्य भी बरामद हुआ। सुरक्षा बलों का मानना है कि बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि नक्सली निकट भविष्य में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। समय पर मिली गोपनीय जानकारी और तत्पर कार्रवाई ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया। राजनांदगांव रेंज में लगातार हो रहे आत्मसमर्पण, खुफिया पकड़ की वृद्धि और अभियान की तीव्रता ने नक्सली ढांचे को कमजोर किया है।
इस मामले में मिली सफलता यह साबित करती है कि सुरक्षा बलों की सतर्कता और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली जानकारियां नक्सलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो रही हैं। सुरक्षा बलों ने आगे बताया कि नक्सली डंप में बरामद सामग्री का विश्लेषण करने के बाद आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। इसके साथ ही इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है, ताकि भविष्य में नक्सली गतिविधियों की कोई भी संभावना समय रहते पकड़ी जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई नक्सली नेटवर्क को तोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से नक्सलियों का मनोबल कमजोर हो रहा है और उनकी आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण पाया जा रहा है। खैरागढ़ में इस सफलता से यह संदेश भी गया है कि सरकारी सुरक्षा प्रयास और खुफिया जानकारी का सही उपयोग नक्सली गतिविधियों को समय रहते रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में पैनी निगरानी बनाए रखी है और ग्रामीणों को भी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देने की अपील की गई है।