बिश्केक। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के बीच यूक्रेन युद्ध और ईरान को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ हमले जारी रखने का संकेत दिया। साथ ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात के दौरान उन्होंने मुश्किल समय में तेहरान को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। इन बयानों को अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के बीच मॉस्को की चुनौतीपूर्ण रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
पुतिन के बयान ऐसे समय आए हैं जब रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ठिकानों पर लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर रहे हैं। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ने मध्य पूर्व में नया संकट पैदा कर दिया है। रूस और ईरान पहले से रणनीतिक सहयोगी हैं और मौजूदा हालात में दोनों की नजदीकी और महत्वपूर्ण होती दिखाई दे रही है।
यूक्रेन के खिलाफ और हमलों का संकेत
पुतिन ने कहा कि रूसी सेना को यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले करने के आदेश दिए गए हैं। उनका दावा है कि रूस की कार्रवाई यूक्रेन के हमलों के जवाब में की जा रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रूसी हमलों से यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती पैदा हो सकती है।
पुतिन का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में यूक्रेन पर रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी देखी गई है। 1 सितंबर को कीव और आसपास के इलाकों पर हुए बड़े रूसी हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत और 21 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी।
2 सितंबर को भी रूसी हमले जारी रहे। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक रूस ने 174 ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, जिसमें निप्रो में दो नागरिकों की मौत हुई और छह लोग घायल हुए। ओडेसा और कीव क्षेत्र भी निशाने पर रहे।
रूस ने बदली हमलों की रणनीति
युद्ध पर नजर रखने वाले इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार रूस ने हाल में अपनी ड्रोन हमले की रणनीति में बदलाव किया है। पहले बड़े हमले मुख्य रूप से रात में होते थे, लेकिन अब दिन और रात दोनों समय लगातार ड्रोन हमलों की लहरें देखने को मिल रही हैं।
27 अगस्त के बाद से विशेष रूप से कीव पर लगातार हमले दर्ज किए गए हैं। 31 अगस्त से 1 सितंबर की रात रूस ने 218 शाहेद श्रेणी के ड्रोन लॉन्च किए, जबकि 1 सितंबर को दिन में भी 99 ड्रोन इस्तेमाल किए गए।
हालांकि युद्ध के मैदान में रूस की प्रगति अभी भी सीमित बताई जा रही है। ISW के आकलन के मुताबिक अगस्त में रूसी सेना की बढ़त की गति कुछ बढ़ी, लेकिन उसका स्प्रिंग-समर अभियान कोई बड़ी ऑपरेशनल सफलता हासिल नहीं कर पाया।
जेलेंस्की पर पुतिन का तीखा हमला
पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने यूक्रेन की रूस के अंदर की जा रही ड्रोन कार्रवाइयों को लेकर जेलेंस्की पर 'राज्य आतंकवाद' का आरोप लगाया।
पुतिन ने सवाल उठाया कि एक तरफ यूक्रेन बातचीत और व्यक्तिगत मुलाकात की मांग कर रहा है और दूसरी तरफ रूस के अंदर हमले कर रहा है। उन्होंने इसी आधार पर तत्काल वार्ता की संभावनाओं को खारिज करने वाला रुख दिखाया।
यूक्रेन की तरफ से भी रूस के भीतर लंबी दूरी के ड्रोन हमले जारी हैं। बेलगोरोद सहित कई रूसी क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। यूक्रेनी नेतृत्व का कहना है कि रूस के लगातार हमलों के जवाब में वह रूसी सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाता रहेगा।
ईरान के समर्थन में खुलकर बोले पुतिन
यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच पुतिन ने ईरान को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। बिश्केक में उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की।
पुतिन ने कहा कि इस मुश्किल दौर में रूस ईरान को आवश्यक सहायता देने का प्रयास कर रहा है और जरूरी सामान की आपूर्ति की जा रही है। पेजेशकियान ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव के खिलाफ रूस के साथ मिलकर काम करने की बात कही।
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव को देखते हुए रूस का यह समर्थन भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। तेहरान पहले से पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और रूस खुद यूक्रेन युद्ध को लेकर व्यापक प्रतिबंधों से घिरा हुआ है।
ऐसे में मॉस्को और तेहरान के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों की पश्चिम विरोधी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
ईरान-रूस सैन्य सहयोग पर भी नजर
रूस और ईरान का सहयोग केवल कूटनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीक और हथियारों को लेकर सहयोग की कई रिपोर्ट सामने आई हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की 1 सितंबर की जांच के मुताबिक रूस ने कथित रूप से ईरान को उन्नत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक विकसित करने में गुप्त मदद की है। रिपोर्ट में 'C430L' नाम के एक कार्यक्रम का जिक्र किया गया है, जिसमें रूसी मिसाइल विशेषज्ञों की भूमिका बताई गई है। यह कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ था और 2026 तक सहयोग जारी रहने के संकेत मिले हैं।
दूसरी ओर ईरान ने रूस को ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई थी, जिसने रूस को घरेलू स्तर पर ऐसे हथियारों की उत्पादन क्षमता विकसित करने में मदद की। रूस इन ड्रोन का यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर चुका है।
अमेरिका के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे पुतिन
पुतिन के ताजा बयान से कुछ दिन पहले CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को का दौरा किया था। यह 2021 के बाद किसी CIA निदेशक की पहली ज्ञात रूस यात्रा थी।
अमेरिकी खुफिया आकलनों से परिचित सूत्रों के मुताबिक वॉशिंगटन में चिंता है कि रूस ईरान युद्ध में अमेरिका की व्यस्तता को अपने लिए रणनीतिक अवसर के रूप में देख सकता है। CIA प्रमुख ने कथित तौर पर रूस को यूक्रेन युद्ध में बड़े स्तर पर तनाव बढ़ाने से होने वाले परिणामों को लेकर आगाह किया था।
लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद पुतिन ने यूक्रेन पर हमले जारी रखने और ईरान को सहायता देने की बात कही। इसलिए उनके बयान को पश्चिमी दबाव के बावजूद रूसी नीति में तत्काल बदलाव नहीं होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोप भी रूस पर बढ़ा रहा दबाव
यूरोपीय देशों ने भी रूस के खिलाफ दबाव बढ़ाया है। यूरोपीय संघ ने रूस के यूक्रेन युद्ध से संबंधित करीब 2,600 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों को सितंबर 2026 तक बढ़ाया हुआ है। इनमें संपत्तियां फ्रीज करने, यात्रा प्रतिबंध और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने पर रोक जैसे कदम शामिल हैं।
इसके अलावा जर्मनी ने हाल में लीपजिग-हाले एयरपोर्ट पर विस्फोटकों से लैस ड्रोन के कथित हमले के प्रयास के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। रूस पर लगे आरोपों के बाद जर्मनी ने बॉन में रूसी वाणिज्य दूतावास बंद करने समेत कई कूटनीतिक कदमों की घोषणा की।
पश्चिम के सामने रूस-ईरान की बढ़ती नजदीकी
मौजूदा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू रूस और ईरान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देश अलग-अलग मोर्चों पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के दबाव का सामना कर रहे हैं।
ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिका के साथ संघर्ष में उलझा है, जबकि रूस चार साल से ज्यादा समय से यूक्रेन युद्ध लड़ रहा है। ऐसी स्थिति में दोनों देशों के बीच सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग पश्चिमी देशों के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है।
SCO शिखर सम्मेलन में भी ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों की आलोचना सामने आई। संगठन के नेताओं की संयुक्त घोषणा में ईरानी क्षेत्र पर हुए हमलों और एकतरफा दबाव वाले उपायों का विरोध किया गया।
क्या और तेज होगा यूक्रेन युद्ध?
पुतिन के बयान से फिलहाल युद्ध समाप्त होने के बजाय तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। रूस लगातार यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमले कर रहा है, जबकि यूक्रेन रूस के भीतर ऊर्जा और सैन्य प्रतिष्ठानों को लंबी दूरी के ड्रोन से निशाना बना रहा है।
इसके बावजूद युद्ध के मैदान में कोई भी पक्ष निर्णायक सफलता हासिल करता दिखाई नहीं दे रहा। रूस की जमीनी बढ़त सीमित है और यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की हमले की क्षमता बढ़ा रहा है।
ऐसे में पुतिन की ताजा घोषणाओं का संदेश स्पष्ट है—मॉस्को फिलहाल पश्चिमी दबाव के कारण अपनी रणनीति बदलने के मूड में नहीं है। यूक्रेन पर हमले जारी रखने की घोषणा और ईरान को खुले समर्थन ने एक साथ यूरोप और अमेरिका के सामने रूस की चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है।
आने वाले दिनों में सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि रूस यूक्रेन पर अपने हमलों को किस स्तर तक बढ़ाता है और ईरान को दी जाने वाली रूसी सहायता किस रूप में सामने आती है। दोनों मोर्चों पर तनाव बढ़ने की स्थिति में इसका असर केवल यूरोप और मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।