15 साल से 400 मीटर रास्ते का इंतजार, बीमार को चारपाई पर ले जाने को मजबूर ग्रामीण
महमूदाबाद । गांवों के विकास और बेहतर सड़क संपर्क के दावों के बीच पहला क्षेत्र के हड़हरमऊ गांव की तस्वीर ग्रामीणों की मुश्किलों की कहानी बयां कर रही है। गांव में करीब 400 मीटर रास्ता पिछले 15 वर्षों से नहीं बन सका है। बारिश के दिनों में यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। हालात इतने खराब हैं कि गांव में किसी के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस के पहुंचने की उम्मीद भी मुश्किल हो जाती है। ऐसे में ग्रामीण मरीज को चारपाई पर लादकर कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक ले जाने को मजबूर हैं।
इसी तरह एक मरीज को चारपाई पर ले जाते हुए वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद गांव की बदहाल सड़क की समस्या फिर चर्चा में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते के निर्माण के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर संबंधित अधिकारियों तक शिकायत की गई, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
बीमार विश्राम को चारपाई पर ले गए ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, गांव निवासी विश्राम की कुछ दिन पहले तबीयत खराब हो गई थी। परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या उसे अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव तक रास्ता खराब होने के कारण वाहन अंदर तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद परिवारजन और अन्य ग्रामीणों ने विश्राम को चारपाई पर लिटाया और उसे कंधे पर उठाकर कीचड़ से भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे।
मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद मरीज को वाहन से अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान किसी ने मरीज को चारपाई पर ले जाते हुए वीडियो बना लिया, जो बाद में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया। वीडियो ने गांव की सड़क की स्थिति और ग्रामीणों की परेशानी को सामने ला दिया।
ग्रामीण बृजभूषण ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। गांव में जब भी कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होता है या उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है तो ग्रामीणों को इसी तरह चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है।
15 वर्षों से अधूरा है रास्ता
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 400 मीटर रास्ते का निर्माण लंबे समय से नहीं हो पाया है। लगभग 15 वर्षों से वे इस समस्या का सामना कर रहे हैं। कई बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक और सांसद से रास्ते के निर्माण की मांग की गई।
ग्रामीण रघुराज, धर्मेंद्र कुमार और श्रीकेशन समेत अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को प्रार्थना पत्र देकर समस्या से अवगत कराया। उन्हें आश्वासन भी मिले, लेकिन जमीन पर रास्ते की स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि बरसात शुरू होते ही रास्ते की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। पानी और कीचड़ के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों के गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है। आपात स्थिति में यह समस्या जानलेवा भी साबित हो सकती है।
एंबुलेंस पहुंचने में होती है परेशानी
गांव की सबसे गंभीर समस्या स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है। ग्रामीणों के मुताबिक, खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाती। मरीज को पहले चारपाई पर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या दूसरे वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।
गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में चारपाई के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से मरीज को ले जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय परेशानी बढ़ा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रास्ते का निर्माण हो जाए तो न केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में सुविधा होगी, बल्कि रोजमर्रा के कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी।
बारिश में विद्यार्थियों की बढ़ जाती है मुश्किल
हड़हरमऊ गांव के लोगों की परेशानी केवल मरीजों तक सीमित नहीं है। बारिश के दिनों में विद्यार्थियों को भी सबसे अधिक दिक्कत होती है। कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल जाने के लिए खराब रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई बार बच्चे रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं और उनके कपड़े व किताबें खराब हो जाती हैं। बारिश के दौरान रास्ता इतना खराब हो जाता है कि पैदल निकलना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क संपर्क बेहतर होने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामों में काफी सुविधा हो सकती है।
शिकायतों के बावजूद नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक में उन्होंने समस्या के समाधान के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं। ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक प्रमुख, विधायक और सांसद तक अपनी समस्या पहुंचाई गई। अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन रास्ते का स्थायी निर्माण नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराया जाए और जल्द से जल्द 400 मीटर रास्ते का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि गांव की यह समस्या किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है।
वीडियो वायरल होने के बाद फिर उठी उम्मीद
मरीज को चारपाई पर ले जाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब प्रशासन इस समस्या का संज्ञान लेगा। ग्रामीण चाहते हैं कि समस्या का समाधान केवल अस्थायी रूप से मिट्टी या खड़ंजा डालकर न किया जाए, बल्कि ऐसा रास्ता बनाया जाए जो बारिश के मौसम में भी आवागमन के योग्य रहे।
15 वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब गांव तक पहुंचने वाला यह 400 मीटर रास्ता पक्का होगा और कब उन्हें मरीजों को चारपाई पर लेकर मुख्य सड़क तक पहुंचाने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा।