उत्तर प्रदेश :  पांचों एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे 27 इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग लॉजिस्टिक क्लस्टर (आईएमएलसी) अब औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इन क्लस्टरों में औद्योगिक समूहों ने निवेश शुरू कर दिया है और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की ओर से कई निवेशकों को जमीन भी आवंटित की जा चुकी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 16 औद्योगिक समूहों ने पांच आईएमएलसी में कुल 6105 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इन निवेशों से करीब 8 हजार लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया जा रहा है।
आईएमएलसी में निवेश के मामले में उन्नाव और मेरठ सबसे आगे हैं। हालांकि, दोनों जिलों में निवेश का पैटर्न अलग-अलग है। उन्नाव में निवेश करने वाले औद्योगिक समूहों की संख्या कम है, लेकिन यहां निवेश की रकम काफी अधिक है। वहीं मेरठ में निवेश करने वाले समूहों की संख्या अधिक है, लेकिन कुल निवेश उन्नाव की तुलना में कम है। निवेशकों को अब तक करीब 300 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है, जिस पर अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों और लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास की तैयारी है।
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे उन्नाव में विकसित किए जा रहे लॉजिस्टिक कॉरिडोर में चार औद्योगिक समूहों ने 4145.89 करोड़ रुपये का निवेश किया है। क्रॉउन पैकेजिंग इंडिया, कैनपैक इंडिया, यूनाइटेड बेवरीज और ओम लॉजिस्टिक को कुल 166 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने के बाद करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है। उन्नाव में निवेश की बड़ी राशि से यह क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
निवेश के मामले में मेरठ आईएमएलसी दूसरे स्थान पर है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे इस क्लस्टर में छह औद्योगिक समूहों ने कुल 1202.68 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लोहम मैग्नेट्स एंड एनर्जी सॉल्यूशन, लूम सोलर प्राइवेट लिमिटेड, हेदवी कंस्ट्रक्शन, एसएसजी फार्मा, एमएम मेटाकॉर्फ और डीएसएन ट्रेडर्स को 73.81 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन औद्योगिक समूहों के माध्यम से 3000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। निवेश और रोजगार की संभावनाओं के लिहाज से मेरठ आईएमएलसी भी तेजी से विकसित हो रहा है।
इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे फिरोजाबाद में केएन इंजीनियरिंग सॉल्यूशन और अतुल इंजीनियरिंग उद्योग ने 131.19 करोड़ रुपये का निवेश किया है। दोनों कंपनियों को 13.91 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों से करीब 750 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है।
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे हरदोई में माउंट एवरेस्ट बेवरीज और ग्रेनो बेवरीज ने 493.88 करोड़ रुपये का निवेश किया है। दोनों औद्योगिक समूहों को 37.64 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन दोनों इकाइयों से करीब 826 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसी तरह संभल में शिवांस एग्री सॉल्यूशन और नवज्योति मेटल्स ने 131.82 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इन कंपनियों को 8.08 एकड़ भूमि आवंटित की गई है और यहां करीब 900 रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शशांक चौधरी के मुताबिक, आईएमएलसी में निवेशकों ने काफी रुचि दिखाई है। उद्योगों के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाओं के कारण निवेश की प्रक्रिया को गति मिल रही है। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे इन औद्योगिक क्लस्टरों का उद्देश्य उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, परिवहन और लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सरकार की योजना इन क्लस्टरों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की है। फिलहाल उन्नाव, मेरठ, फिरोजाबाद, हरदोई और संभल में जिन निवेशों की शुरुआत हुई है, उन्हें इस दिशा में शुरुआती सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में अन्य आईएमएलसी में भी निवेश बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास और रोजगार के नए केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर सकते हैं।
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