गाजियाबाद: गाजियाबाद की आदित्य वर्ल्ड सिटी में मूलभूत सुविधाओं को लेकर निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर मेंटेनेंस ऑफिस पहुंचे और वहां घेराव कर प्रदर्शन किया। निवासियों का आरोप है कि नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क देने के बावजूद उन्हें पेयजल, बिजली, सड़क, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने समस्याओं के जल्द समाधान की मांग करते हुए व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
आदित्य वर्ल्ड सिटी गाजियाबाद के NH-24 क्षेत्र में विकसित एक बड़ी आवासीय टाउनशिप है। यहां कई आवासीय परियोजनाएं हैं और बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। परियोजना की अपनी वेबसाइट भी इसे हजारों परिवारों वाली टाउनशिप के रूप में प्रस्तुत करती है। ऐसे में यहां बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकती हैं।
निवासियों का कहना है कि उनकी परेशानी कोई एक दिन की नहीं है। लंबे समय से अलग-अलग सुविधाओं को लेकर शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिल रहा। आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई समस्याएं बनी रहती हैं और लोगों को बार-बार मेंटेनेंस कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी नाराजगी के कारण बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर कार्यालय के बाहर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने साफ पानी की आपूर्ति, निर्बाध बिजली व्यवस्था, आंतरिक सड़कों की स्थिति और सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। स्थानीय रिपोर्ट में भी पेयजल, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर असंतोष का जिक्र किया गया है।
निवासियों का कहना है कि किसी भी आवासीय सोसाइटी में नियमित मेंटेनेंस शुल्क का उद्देश्य सामान्य क्षेत्रों और आवश्यक सुविधाओं का संचालन बनाए रखना होता है। यदि उसके बावजूद पानी, बिजली, सड़क या सफाई जैसी सुविधाएं प्रभावित हों तो लोगों का नाराज होना स्वाभाविक है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रबंधन समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा बताए।
लोगों का आरोप है कि कई बार मेंटेनेंस टीम से संपर्क करने पर उन्हें आश्वासन तो मिल जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई देता। इसी वजह से इस बार लोगों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। सोसाइटी परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। हालांकि विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश की गई। निवासियों का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं बल्कि अपनी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाना है।
निवासियों ने आरोप लगाया कि खराब या अपर्याप्त पेयजल व्यवस्था से परिवारों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है। पानी की गुणवत्ता और नियमित उपलब्धता किसी भी रिहायशी इलाके की सबसे जरूरी आवश्यकताओं में शामिल है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी टाउनशिप में पानी की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
बिजली व्यवस्था भी प्रदर्शन के दौरान उठाए गए प्रमुख मुद्दों में रही। निवासियों ने आरोप लगाया कि बिजली से जुड़ी समस्याओं और आपूर्ति में बाधा के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई परिवारों का कहना था कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि बिजली से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान हो सके।
आंतरिक सड़कों और यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। आदित्य वर्ल्ड सिटी के आसपास सड़क संपर्क से जुड़ी परेशानी पहले भी सामने आ चुकी है। जुलाई 2026 में NHAI ने आदित्य वर्ल्ड सिटी और वेव सिटी की नेशनल हाईवे से एक मुख्य कनेक्टिविटी को हादसे की आशंका के चलते बंद कर दिया था, जिससे हजारों निवासियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा।
उस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में आवागमन पहले से ही निवासियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका था। अब सोसाइटी के अंदर भी सड़क और अन्य सुविधाओं को लेकर विरोध ने स्थानीय बुनियादी ढांचे के सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है।
निवासियों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना नौकरी पर जाने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और सुचारू सड़क व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि सड़कें खराब हों या आवागमन में बार-बार समस्या आए तो इसका असर सीधे दैनिक जीवन पर पड़ता है।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। बड़ी आबादी वाली टाउनशिप में नियमित कचरा उठान, सामान्य क्षेत्रों की सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना मेंटेनेंस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वच्छता में लापरवाही होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
गाजियाबाद की कई आवासीय सोसाइटियों में मेंटेनेंस और आरडब्ल्यूए से जुड़े विवाद पहले भी प्रशासन के सामने आते रहे हैं। पिछले वर्ष जिला प्रशासन ने आरडब्ल्यूए और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से जुड़ी शिकायतों, कॉमन एरिया मेंटेनेंस, लिफ्ट सुरक्षा और कथित अधिकारों के दुरुपयोग जैसे मामलों की जांच के लिए एक समिति भी बनाई थी।
यह व्यापक पृष्ठभूमि बताती है कि तेजी से विकसित हो रहे गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में सोसाइटी प्रबंधन और निवासियों के बीच सुविधाओं तथा जिम्मेदारी को लेकर विवाद एक महत्वपूर्ण शहरी मुद्दा बनता जा रहा है।
आदित्य वर्ल्ड सिटी के निवासियों का कहना है कि उन्होंने यहां घर खरीदते समय बेहतर जीवनशैली और आवश्यक सुविधाओं की उम्मीद की थी। उनकी मांग है कि प्रबंधन उन्हीं सुविधाओं को नियमित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराए जिनके लिए उनसे शुल्क लिया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रबंधन से लिखित रूप में समाधान देने की भी मांग की। उनका कहना है कि यदि केवल मौखिक आश्वासन दिया जाएगा तो पहले जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। इसलिए पानी, बिजली, सड़क और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं के लिए एक निश्चित कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
निवासियों ने मेंटेनेंस राशि के इस्तेमाल को लेकर अधिक पारदर्शिता की जरूरत भी बताई। उनका कहना है कि यदि निवासी हर महीने तय शुल्क जमा करते हैं तो उन्हें यह जानकारी भी मिलनी चाहिए कि राशि किन सेवाओं और कार्यों पर खर्च की जा रही है।
प्रदर्शन में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भी भागीदारी देखी गई। उनका कहना था कि रोजमर्रा की सुविधाओं में कमी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जो अधिकांश समय सोसाइटी परिसर में रहते हैं। बच्चों की सुरक्षा, पार्क और सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव जैसे मुद्दे भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
लोगों का कहना है कि बड़े-बड़े आवासीय प्रोजेक्ट केवल फ्लैट और इमारतें खड़ी करने तक सीमित नहीं होने चाहिए। वास्तविक गुणवत्ता तब तय होती है जब वहां रहने वाले लोगों को लंबे समय तक बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रबंधन मिलता रहे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन के सामने यह भी कहा कि शिकायत निवारण की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। कई लोगों का आरोप है कि शिकायतों पर जवाब मिलने और काम पूरा होने में काफी समय लग जाता है। निवासियों ने हेल्पलाइन, शिकायत नंबर और तय समयसीमा वाली व्यवस्था की मांग की।
आदित्य वर्ल्ड सिटी में बड़ी संख्या में परिवारों के रहने के कारण यहां किसी भी प्रमुख सुविधा के प्रभावित होने का असर व्यापक हो सकता है। आधिकारिक प्रोजेक्ट विवरण के मुताबिक टाउनशिप में कई आवासीय प्रोजेक्ट और हजारों परिवार हैं।
इसी कारण निवासियों का कहना है कि प्रबंधन को समस्याओं का समाधान अस्थायी मरम्मत के बजाय दीर्घकालिक योजना से करना चाहिए। पानी की सप्लाई, बिजली बैकअप, सड़क मरम्मत और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करेंगे और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन भी कर सकते हैं। उनका कहना है कि वे लंबे समय से समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाते आ रहे हैं और अब स्थायी समाधान चाहते हैं।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार पहले पैदल मार्च निकालने की भी तैयारी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद निवासियों ने शांतिपूर्ण तरीके से मेंटेनेंस कार्यालय के पास अपनी मांगें उठाईं।
निवासियों का कहना है कि यह मामला केवल सुविधाओं का नहीं बल्कि जवाबदेही का भी है। उनका तर्क है कि मेंटेनेंस एजेंसी या प्रबंधन यदि निवासियों से भुगतान लेता है तो उसके साथ सेवा की गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
टाउनशिप में रहने वाले परिवारों की मांग है कि पानी की समस्या के लिए नियमित सप्लाई शेड्यूल बनाया जाए। बिजली व्यवस्था के लिए तकनीकी टीम चौबीस घंटे उपलब्ध हो और बार-बार आने वाली शिकायतों का स्थायी समाधान किया जाए।
आंतरिक सड़कों के रखरखाव के साथ स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने की मांग उठी। लोगों का कहना है कि रात के समय खराब स्ट्रीट लाइट सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करती है, इसलिए इसे प्राथमिकता से ठीक किया जाना चाहिए।
निवासियों ने सोसाइटी के सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव की भी मांग की। उनका कहना है कि पार्क, बच्चों के खेलने की जगह और अन्य सामान्य क्षेत्र साफ और सुरक्षित होने चाहिए। बड़ी टाउनशिप में इन सुविधाओं की गुणवत्ता सीधे रहने वालों के जीवन स्तर से जुड़ी होती है। प्रदर्शन के बाद प्रबंधन और निवासियों के बीच बातचीत से समस्या का समाधान निकलेगा या विरोध और तेज होगा, इस पर अब स्थानीय लोगों की नजर है। फिलहाल निवासियों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल आश्वासन के बजाय मौके पर दिखाई देने वाला सुधार चाहते हैं।
गाजियाबाद और एनसीआर में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं। इन परियोजनाओं के साथ पानी, सीवेज, सड़क, पार्किंग, सुरक्षा, लिफ्ट और बिजली जैसी सुविधाओं के दीर्घकालिक रखरखाव की चुनौती भी बढ़ी है। इस कारण सोसाइटी प्रबंधन और निवासियों के बीच स्पष्ट जवाबदेही की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। आदित्य वर्ल्ड सिटी की घटना भी इसी व्यापक चुनौती की ओर इशारा करती है। हजारों लोगों के रहने वाली किसी भी टाउनशिप में सुविधाओं की गुणवत्ता सीधे उनके जीवन को प्रभावित करती है। ऐसे में शिकायतों का समय पर समाधान न होने पर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
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