लखनऊ : उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करने वाले लाखों रसोइयों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रसोइयों के मानदेय में **1000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी** करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के करीब **3.53 लाख रसोइयों** को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार के इस फैसले के बाद रसोइयों का मासिक मानदेय 2000 रुपये से बढ़कर **3000 रुपये प्रति माह** हो जाएगा। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे रसोइयों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
लाखों रसोइयों को मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। प्रदेश के हजारों स्कूलों में लाखों बच्चों के भोजन की व्यवस्था इन्हीं रसोइयों के माध्यम से की जाती है।
सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले बड़ी संख्या में रसोइयों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी। खासतौर पर उन परिवारों को फायदा होगा, जिनकी आय का एक हिस्सा इसी मानदेय पर निर्भर है।
पहले मिलता था 2000 रुपये मानदेय
मिड-डे मील योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों के मानदेय में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई है। पहले उन्हें 1000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया था। इसके बाद 2022 में इसे बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति माह कर दिया गया था।
अब सरकार ने इसमें एक हजार रुपये और जोड़ने का फैसला लिया है, जिससे रसोइयों को हर महीने पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी।
सितंबर से लागू होगा बढ़ा हुआ मानदेय
जानकारी के अनुसार, बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर महीने से लागू किया जाएगा। इसका भुगतान अक्टूबर में मिलने वाले मानदेय के साथ जोड़े जाने की संभावना है। इस बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर हर महीने करीब 35 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त भार आएगा। सालाना स्तर पर यह खर्च लगभग 424 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
मिड-डे मील योजना में अहम भूमिका
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिड-डे मील योजना चलाई जाती है। इस योजना में रसोइयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सुबह से ही स्कूलों में भोजन तैयार करने, साफ-सफाई रखने और बच्चों को समय पर खाना उपलब्ध कराने का काम रसोइये करते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से वे अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे।
सरकार के फैसले को राहत के तौर पर देखा जा रहा
रसोइयों का कहना है कि महंगाई के दौर में 2000 रुपये का मानदेय काफी कम था। दैनिक जरूरतों और परिवार के खर्चों को देखते हुए लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग उठाई जा रही थी।
अब सरकार के फैसले से रसोइयों में खुशी का माहौल है। उनका मानना है कि बढ़ा हुआ मानदेय उनके काम को सम्मान देने की दिशा में एक कदम है।
चुनावी साल से भी जोड़ा जा रहा फैसला
राजनीतिक जानकार इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में रसोइये ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं और उनका सामाजिक प्रभाव भी है।
हालांकि सरकार की ओर से इस फैसले को कर्मचारियों और योजना से जुड़े लोगों को राहत देने वाला कदम बताया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका
रसोइये केवल भोजन बनाने का काम नहीं करते, बल्कि स्कूलों में बच्चों की देखभाल और पोषण व्यवस्था में भी अहम योगदान देते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मिड-डे मील बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और पोषण सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में सरकार का यह फैसला योजना को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।