गोरखपुर : भारतीय रेलवे में अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले सैलून को लेकर लिया गया बड़ा फैसला अब बदल दिया गया है। रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों के सैलून यानी विशेष निरीक्षण कोच को आम यात्रियों या निजी संस्थाओं के लिए बुकिंग पर देने की योजना को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद अब इन सैलून की सुविधा पहले की तरह रेलवे अधिकारियों के निरीक्षण और विभागीय कार्यों के लिए ही इस्तेमाल की जाएगी।
रेलवे बोर्ड ने कुछ समय पहले विचार किया था कि खाली पड़े सैलून को निजी बुकिंग के जरिए आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है। इसके तहत निजी कंपनियों, पर्यटन समूहों या अन्य लोगों को शुल्क लेकर इन विशेष कोचों में यात्रा की सुविधा देने की योजना पर चर्चा हुई थी। इस पहल का उद्देश्य रेलवे की संपत्तियों का बेहतर उपयोग और अतिरिक्त राजस्व जुटाना बताया गया था।
हालांकि अब रेलवे बोर्ड ने इस प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया है। अधिकारियों के मुताबिक, सैलून का मुख्य उद्देश्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रेल नेटवर्क, परियोजनाओं और परिचालन व्यवस्था का निरीक्षण करना है। ऐसे में इनके निजी इस्तेमाल को लेकर कई स्तरों पर विचार किया गया और अंत में इसे आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
रेलवे सैलून सामान्य यात्री कोच से काफी अलग होते हैं। इनमें अधिकारियों के रहने, बैठक करने और यात्रा के दौरान काम करने की विशेष सुविधाएं मौजूद होती हैं। इनका उपयोग रेलवे के महाप्रबंधकों, मंडल रेल प्रबंधकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान किया जाता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सैलून का इस्तेमाल केवल आरामदायक यात्रा के लिए नहीं बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी निरीक्षण के उद्देश्य से किया जाता है। अधिकारी दूर-दराज के इलाकों में जाकर रेलवे ट्रैक, स्टेशन, निर्माण कार्य और अन्य परियोजनाओं की स्थिति का जायजा लेते हैं। इस दौरान सैलून उनके लिए एक चलते-फिरते कार्यालय की तरह काम करता है।
प्राइवेट बुकिंग की योजना सामने आने के बाद रेलवे के अंदर और बाहर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति से कमाई बढ़ाने का अच्छा तरीका बताया था, जबकि कुछ ने सवाल उठाए थे कि इससे रेलवे अधिकारियों के निरीक्षण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
रेलवे बोर्ड के ताजा फैसले के बाद अब साफ हो गया है कि सैलून की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ये कोच रेलवे अधिकारियों के उपयोग के लिए ही उपलब्ध रहेंगे। रेलवे प्रशासन का मानना है कि इनका मूल उद्देश्य बनाए रखना जरूरी है ताकि अधिकारी फील्ड स्तर पर बेहतर निगरानी कर सकें।
भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा परिवहन नेटवर्क है और इसके संचालन में लगातार निरीक्षण और निगरानी की अहम भूमिका होती है। रेलवे अधिकारी समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करते हैं और सैलून के माध्यम से उन्हें लंबी दूरी की यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं मिलती हैं।
हालांकि रेलवे लगातार अपनी संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और राजस्व बढ़ाने के नए विकल्पों पर काम करता रहता है। भविष्य में भी ऐसी योजनाओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल सैलून को निजी बुकिंग के लिए उपलब्ध कराने का फैसला रोक दिया गया है।
रेलवे बोर्ड के इस निर्णय के बाद अधिकारियों के विशेष सैलून की पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। अब ये कोच केवल रेलवे के निरीक्षण और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही इस्तेमाल किए जाएंगे।