बलिया। सफलता किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। इसे सच साबित किया है राजकीय इंटर कॉलेज के कला अध्यापक डॉ. इफ्तिखार खान ने। सीमित संसाधनों और शुरुआती उपेक्षा के बावजूद उन्होंने कला के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और नवाचार किए। उनकी इसी उपलब्धि और उत्कृष्ट योगदान के लिए शिक्षक दिवस के अवसर पर पांच सितंबर को राष्ट्रपति उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित करेंगी।

58 वर्षीय डॉ. इफ्तिखार खान के लिए कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था। शुरुआत में लोग उन्हें कला अध्यापक के रूप में कम और केवल एक पेंटर के तौर पर अधिक जानते थे। कई लोगों ने उनकी कला को लेकर सवाल उठाए और यह तक कहा कि पेंटिंग से आखिर कितनी तरक्की हो सकती है। कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि कौआ, बिल्ली या दूसरी सामान्य आकृतियां तो कंपनियों से बनकर किसी भी वस्तु पर आ सकती हैं।

इन टिप्पणियों ने उन्हें शुरुआत में निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने आलोचनाओं को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कला को केवल चित्र बनाने तक सीमित रखने के बजाय इसमें नए प्रयोग शुरू किए।

उपहास को बनाया प्रेरणा

डॉ. इफ्तिखार खान के लिए शुरुआती दौर संघर्षपूर्ण रहा। कला को लेकर समाज में मौजूद सीमित सोच के कारण उन्हें कई बार लोगों की बातों का सामना करना पड़ा। एक कलाकार के लिए यह स्थिति निराश करने वाली हो सकती थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया।

उन्होंने तय किया कि कला के क्षेत्र में ऐसा काम किया जाए, जिसे देखकर लोग इसकी उपयोगिता और महत्व को समझ सकें। इसके बाद उन्होंने लगातार नवाचार पर ध्यान दिया। पारंपरिक कला के साथ नए प्रयोगों को जोड़ा और विद्यार्थियों को भी रचनात्मक तरीके से कला से जोड़ने का प्रयास किया।

उनका मानना रहा कि कला केवल कागज पर तस्वीर बनाने तक सीमित नहीं है। यह सोच विकसित करने, कल्पनाशक्ति को बढ़ाने और किसी विषय को नए दृष्टिकोण से देखने का माध्यम भी है।

विद्यार्थियों में विकसित की रचनात्मक सोच

शिक्षक के रूप में डॉ. इफ्तिखार खान ने कला शिक्षा को रोचक और प्रयोगात्मक बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपनी कल्पना के अनुसार प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

उनकी कोशिश रही कि छात्र कला को केवल परीक्षा का विषय न मानें, बल्कि उसे अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाएं। अलग-अलग सामग्रियों और तरीकों के इस्तेमाल से उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि रचनात्मकता के लिए महंगे संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती।

नवाचार ने दिलाई अलग पहचान

कला के क्षेत्र में उनके लगातार किए गए नवाचारों ने उन्हें दूसरे शिक्षकों से अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अपनी कला को शिक्षा से जोड़ते हुए ऐसे प्रयोग किए, जिनसे विद्यार्थियों में सीखने की रुचि बढ़ी।

उनका मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल किताबों में लिखी जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाना नहीं है। एक अच्छा शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने का काम भी करता है। इसी सोच के साथ उन्होंने कला को शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाया।

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयन

डॉ. इफ्तिखार खान की वर्षों की मेहनत और कला शिक्षा में योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। शिक्षक दिवस पर पांच सितंबर को राष्ट्रपति उन्हें सम्मानित करेंगी। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि उनके विद्यालय, विद्यार्थियों और पूरे शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए चयन के बाद उनके सहकर्मियों और विद्यार्थियों में भी खुशी का माहौल है। उनके लिए यह सम्मान वर्षों की मेहनत, संघर्ष और प्रयोगों का परिणाम माना जा रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

डॉ. इफ्तिखार खान की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो शुरुआत में संसाधनों की कमी या लोगों की आलोचना के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं। उन्होंने दिखाया कि किसी क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए परिस्थितियों के अनुकूल होने का इंतजार करने के बजाय परिस्थितियों को चुनौती देना जरूरी है।

जब लोग उनकी कला का मजाक उड़ाते थे, तब उन्होंने उसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने लगातार काम किया और नए प्रयोगों के माध्यम से अपनी उपयोगिता साबित की। यही कारण है कि आज वही कला उनके लिए राष्ट्रीय सम्मान का कारण बनी है।

कला को बनाया जीवन का उद्देश्य

डॉ. इफ्तिखार खान ने कला को सिर्फ नौकरी का हिस्सा नहीं माना, बल्कि इसे अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। वर्षों तक विद्यार्थियों के बीच काम करते हुए उन्होंने कला के प्रति नई सोच विकसित करने का प्रयास किया।

उनका सफर बताता है कि प्रतिभा को पहचान मिलने में समय लग सकता है, लेकिन निरंतर प्रयास और नए विचार अंततः अपनी जगह बनाते हैं। शुरुआती उपहास से लेकर राष्ट्रपति सम्मान तक का उनका सफर संघर्ष, धैर्य और रचनात्मकता की मिसाल है।

पांच सितंबर को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करना डॉ. इफ्तिखार खान के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। कभी पेंटिंग को लेकर उपहास झेलने वाले इस शिक्षक ने अपने काम और नवाचार से साबित कर दिया कि कला केवल तस्वीर बनाने की विधा नहीं, बल्कि समाज और शिक्षा में बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।

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