यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर, यमुना एक्सप्रेसवे की स्पीड लिमिट पर हाईकोर्ट की मुहर
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्टेज कैरिज बसों के लिए निर्धारित 60 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति सीमा को वैध ठहराया है। कोर्ट ने ओवरस्पीडिंग के आधार पर जारी ई-चालानों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष सड़क की परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी केंद्र सरकार द्वारा तय अधिकतम सीमा से कम गति सीमा निर्धारित कर सकता है।
जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह सड़क की स्थिति, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों की गति सीमा तय कर सके।
याचिका में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्टेज कैरिज बसों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर कुछ श्रेणी के वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। ऐसे में 60 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा और उसके आधार पर जारी चालान उचित नहीं हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार की 6 अप्रैल 2018 की अधिसूचना में एक्सप्रेसवे पर कुछ वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा तय की गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक वाहन को हर एक्सप्रेसवे पर उसी गति से चलने का अधिकार मिल जाता है।
खंडपीठ ने कहा कि सड़क की भौगोलिक स्थिति, यातायात का दबाव, सुरक्षा मानक और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गति सीमा कम की जा सकती है। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।
अदालत ने यह भी माना कि एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। तेज गति से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है।
यमुना एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें और अन्य व्यावसायिक वाहन चलते हैं। तेज रफ्तार के कारण कई बार यहां गंभीर सड़क हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए गति सीमा तय की गई है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब यमुना एक्सप्रेसवे पर स्टेज कैरिज बसों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा लागू रहेगी। निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने पर जारी किए जाने वाले ई-चालान भी वैध माने जाएंगे।
फैसले से परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को भी मजबूती मिली है, क्योंकि अब ओवरस्पीडिंग के मामलों में कार्रवाई को लेकर कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि गति सीमा का पालन कराने का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि यात्रियों और सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।