ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, PDA को बताया कमजोर

Update: 2026-07-28 08:54 GMT

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और एनडीए के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। राजभर ने दावा किया है कि सपा का चर्चित ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण अब कमजोर पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि अब समाजवादी पार्टी के सामने अपने पारंपरिक ‘एमवाई’ यानी मुस्लिम-यादव वोट बैंक को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत अखिलेश यादव को ‘मित्र’ कहकर की और कहा कि इस बार उनकी लड़ाई केवल एनडीए से नहीं बल्कि अपने लोगों से भी है। राजभर ने दावा किया कि जमीनी हालात और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सपा का पीडीए फॉर्मूला पहले जैसा प्रभावी नहीं रह गया है।

राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़कर पीडीए का नारा दिया था, लेकिन अब यह समीकरण बिखरता हुआ दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने मुस्लिम-यादव आधार को बचाए रखने की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुस्लिम वोटों पर अब अन्य राजनीतिक दलों की नजर है, जिससे सपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सुभासपा अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। राजभर के मुताबिक, इससे समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट आधार पर असर पड़ सकता है और आने वाले चुनाव में पार्टी को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ओपी राजभर ने सपा पर कानून व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान प्रदेश में गुंडाराज और माफिया संरक्षण का माहौल रहा। उन्होंने कहा कि सपा शासन में थाने और तहसील पार्टी कार्यालयों की तरह काम करते थे और गैर-यादव पिछड़ों तथा बहुजन समाज के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान कई जिलों में माफिया तंत्र मजबूत हुआ। राजभर ने कहा कि जनता अब पुराने दौर को याद कर रही है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी की राजनीतिक पकड़ कमजोर हो रही है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रहेगी और पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति में भी मुश्किल में पड़ सकती है।

राजभर के इस बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटों का समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। समाजवादी पार्टी ने पीडीए रणनीति के जरिए इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल भी इन समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से राजभर के आरोपों पर तत्काल कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। सपा लगातार दावा करती रही है कि पीडीए का फॉर्मूला प्रदेश में मजबूत है और आगामी चुनाव में यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। पार्टी का कहना है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों का समर्थन उसे लगातार मिल रहा है।

ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव को जमीन पर उतरकर हालात समझने और अपने लोगों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वह एक मित्र के नाते उन्हें सही सलाह दे रहे हैं ताकि प्रदेश को भविष्य में एक मजबूत विपक्ष मिल सके। राजभर ने अपने संदेश का समापन जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण और जय महाराजा सुहेलदेव के नारों के साथ किया।

राजभर के इस बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पीडीए और एमवाई समीकरण को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में अपनी रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

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