Lucknow लखनऊ: प्रसिद्ध लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने एक कार्यक्रम के दौरान पूछे गए सवाल पर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जब उनसे पूछा गया कि यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले तो वे क्या करेंगी, तो उन्होंने भावुक और तीखा जवाब देते हुए कहा— “अगर पुलिस मुझे गिरफ्तार कर ले, फाँसी पर चढ़ा दे, या एनकाउंटर कर दे… मैं क्या कर सकती हूँ? मैं कौन हूँ? वे गोली मार देंगे तो मर जाऊँगी, फाँसी देंगे तो लटक जाऊँगी… आप लोग बस हेडलाइन चलाइएगा— ‘नेहा सिंह राठौर को फाँसी दे दी गई’।’ उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ उनके समर्थक इसे कलाकारों पर बढ़ते दबाव और डराने-धमकाने का परिणाम बता रहे हैं, जबकि विरोधियों के अनुसार यह ‘‘नाटकीय बयानबाजी’’ है।
नेहा सिंह राठौर का नाम हाल के वर्षों में कई बार विवादों में आया है। उनके राजनीतिक व्यंग्य गीत—विशेषकर ‘‘यूपी में का बा’’ और ‘‘बिहार में का बा’’—ने उन्हें लोकप्रिय भी बनाया और सत्ता प्रतिष्ठान की नाराजगी का कारण भी। कई मौकों पर उन पर ‘‘कानून-व्यवस्था को लेकर भ्रामक छवि बनाने’’ और ‘‘राजनीतिक माहौल भड़काने’’ जैसे आरोप लगे। नेहा ने कहा कि एक कलाकार का काम समाज के मुद्दों को उठाना है, लेकिन जब वही आवाज सत्ता को पसंद नहीं आती, तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा, “मैं एक कलाकार हूँ। मेरे गाने जनता की आवाज हैं। अगर मेरी बात किसी को चुभती है, तो इसका मतलब है कि सच बोलने का असर हो रहा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें डराने की कोशिश की गई। ‘‘नोटिस देने से लेकर पूछताछ तक—सब हुआ है,’’ उन्होंने कहा। नेहा ने मंच से यह भी सवाल उठाया कि क्या कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति पर अंकुश लगा देना चाहिए। ‘‘क्या कलाकारों को गाना बंद कर देना चाहिए? सवाल पूछना बंद कर देना चाहिए? अगर सरकार इतने सवालों से डरती है, तो यह लोकतंत्र पर सवाल है,’’ उन्होंने कहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेहा का यह बयान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है, क्योंकि वे किसानों, मजदूरों, महिलाओं और निम्न वर्ग से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रही हैं।
विपक्षी दलों ने नेहा के बयान को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर कई नेताओं ने लिखा कि ‘‘एक कलाकार को अपनी सुरक्षा को लेकर इतना असुरक्षित महसूस करना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है’’। हालाँकि, सत्ताधारी दल के समर्थकों का कहना है कि कानून सबके लिए समान है और किसी को भी ‘‘नाटकीय बयानों’’ के जरिए सरकार को बदनाम करने का अधिकार नहीं है। फिलहाल, नेहा सिंह राठौर का यह बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल है और देशभर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर फिर बहस छिड़ गई है।