चित्रकूट में मंदाकिनी नदी से तबाही बरकरार, हनुमान धारा का पुल बहा
बाढ़ से सबसे बड़ा नुकसान सड़क और पुलों को हुआ है
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी से तबाही बरकरार, हनुमान धारा का पुल बहा
चित्रकूट: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित धार्मिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। शनिवार को नदी का जलस्तर 135.200 मीटर तक पहुंच गया था, जो 2003 के पुराने हाई फ्लड लेवल 134.500 मीटर से भी ऊपर था। रविवार सुबह सात बजे नदी खतरे के निशान 126.500 मीटर से करीब 1.20 मीटर ऊपर बह रही थी। पानी कम होने के साथ रामघाट और आसपास के इलाकों में बाढ़ से हुई तबाही साफ दिखाई देने लगी है।
हनुमान धारा जाने वाला पुल बहा
बाढ़ से सबसे बड़ा नुकसान सड़क और पुलों को हुआ है। रामघाट के लंका तिराहा से हनुमान धारा की ओर जाने वाला प्रमुख पुल मंदाकिनी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त होकर बह गया। इससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई घाट और संपर्क मार्ग भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
स्थानीय लोगों के लिए अब एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है। पानी उतरने के बाद कई जगह सड़कों पर कीचड़ और मलबा जमा है। बाढ़ के दौरान घरों और दुकानों में पानी घुसने से सामान को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
400 दुकानों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
रामघाट और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों पर भी बाढ़ की बड़ी मार पड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 400 दुकानें बाढ़ के पानी की चपेट में आईं। कई दुकानों में रखा सामान खराब हो गया। बाढ़ ने चित्रकूट की सामान्य आवाजाही और कारोबार दोनों को प्रभावित किया है।
भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी-बेड़ी पुलिया मार्ग पर बने पुल की एप्रोच रोड के कुछ हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही तत्काल रोक दी। एनएचएआई और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर तकनीकी जांच और मरम्मत कार्य में जुटी हैं।
रामघाट पर ड्रोन से निगरानी
प्रशासन ने रामघाट और निर्मोही अखाड़ा समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। चित्रकूट पुलिस ड्रोन कैमरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों और नदी के बहाव पर नजर रख रही है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
पानी घटा तो सामने आई बर्बादी
मंदाकिनी का जलस्तर कम होना राहत की बात है, लेकिन अब पुनर्वास की बड़ी चुनौती सामने है। प्रभावित इलाकों में बिजली, पेयजल, भोजन और सुरक्षित आवास की व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई है। पानी उतरने के बाद घरों और गलियों में जमा कीचड़ तथा गंदगी को हटाने के साथ संक्रमण से बचाव भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बाढ़ ने चित्रकूट के उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों हिस्सों को प्रभावित किया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रभावित चित्रकूट क्षेत्र का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों को सहायता का भरोसा दिलाया।
फिलहाल मंदाकिनी के जलस्तर में गिरावट के साथ हालात में सुधार के संकेत हैं, लेकिन टूटे पुल, क्षतिग्रस्त सड़कें, कीचड़ से भरे घर-दुकान और बाधित संपर्क बता रहे हैं कि चित्रकूट को सामान्य स्थिति में लौटने में अभी समय लगेगा।