नोएडा। जेवर में शुरू हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल हवाई यात्रियों के लिए नया विकल्प नहीं है, बल्कि दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़े बदलाव का आधार बन रहा है। एयरपोर्ट के आसपास वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, कार्गो, मैन्युफैक्चरिंग, होटल, रिटेल और दूसरी सेवाओं में निवेश बढ़ने की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर हवाई और सड़क संपर्क के कारण जेवर तथा यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र आने वाले वर्षों में NCR के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में शामिल हो सकते हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जून 2026 में वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू किया था। इसके साथ जेवर सीधे देश के विमानन नेटवर्क से जुड़ गया। एयरपोर्ट के पहले चरण की यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों सालाना बताई गई है। हालांकि विशेषज्ञों की नजर यात्री सेवाओं के साथ इसके कार्गो और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर भी है, क्योंकि NCR में होने वाले माल परिवहन का बड़ा हिस्सा गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा है।
कार्गो बनेगा आर्थिक गतिविधियों का अहम आधार
एयरपोर्ट पर मल्टीमॉडल कार्गो हब विकसित किया गया है। एयरपोर्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस कार्गो हब में इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल के साथ वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जोन को जोड़ा गया है। इसमें ट्रांसशिपमेंट सेंटर और फ्रेट फॉरवर्डर तथा लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए वेयरहाउसिंग सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य देश के मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को तेज और बेहतर माल परिवहन सुविधा देना है।
इस व्यवस्था से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ई-कॉमर्स, खाद्य उत्पाद और जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों से जुड़े उद्योगों को फायदा मिलने की संभावना है। पहले जिन कंपनियों को एयर कार्गो के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक माल पहुंचाना पड़ता था, उनके लिए जेवर एक वैकल्पिक कार्गो गेटवे उपलब्ध करा सकता है।
एक विश्लेषण के मुताबिक IGI एयरपोर्ट के करीब 75 प्रतिशत कार्गो का स्रोत NCR है और इसके हिंटरलैंड कार्गो में गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के जरिए इस माल का एक हिस्सा नजदीकी एयर कार्गो सुविधा तक पहुंचाया जा सकता है।
वेयरहाउसिंग सेक्टर में बढ़ सकती है मांग
नोएडा एयरपोर्ट का बड़ा आर्थिक असर वेयरहाउसिंग सेक्टर पर दिखाई देने की उम्मीद है। नाइट फ्रैंक की 2025 की वेयरहाउसिंग रिपोर्ट में भी कहा गया है कि जेवर एयरपोर्ट NCR के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को बदलने वाला प्रमुख कारक बन सकता है। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, MSME क्लस्टर और निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग के लिए जमीन आवंटन तथा 3PL, ई-कॉमर्स और हल्की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बढ़ती रुचि इस बदलाव को गति दे रही है।
एयरपोर्ट के आसपास गोदाम बनने का एक प्रमुख कारण माल को कम समय में कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाना है। कंपनियां अपने वितरण केंद्र और वेयरहाउस एयरपोर्ट तथा एक्सप्रेसवे के करीब रखती हैं तो माल परिवहन में लगने वाला समय कम हो सकता है। ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी बड़े फुलफिलमेंट सेंटर और वितरण केंद्र विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे बनेगा महत्वपूर्ण औद्योगिक कॉरिडोर
जेवर की भौगोलिक स्थिति भी इस आर्थिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा है, जिससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अलावा मथुरा और आगरा की ओर सड़क संपर्क मिलता है। इसके साथ क्षेत्र को दूसरे एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और प्रस्तावित मल्टीमॉडल परिवहन परियोजनाओं से जोड़ने की योजनाएं हैं।
ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट हब के विकास की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। जमीन से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए कदम उठाए गए हैं। इस परियोजना के विकसित होने से सड़क और रेल आधारित माल परिवहन को एयर कार्गो नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक निवेश भी पकड़ रहा रफ्तार
एयरपोर्ट के आसपास केवल लॉजिस्टिक्स कंपनियां ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां भी निवेश कर रही हैं। मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के आसपास करीब 15 हजार करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश और इससे लगभग 10 हजार रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान बताया गया था।
इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, डेटा सेंटर, रक्षा उत्पादन, खिलौना निर्माण, परिधान और अन्य उद्योगों के लिए विकसित किए जा रहे क्लस्टर इस क्षेत्र के औद्योगिक स्वरूप को बदल सकते हैं। कंपनियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण एयरपोर्ट के साथ सड़क और माल परिवहन की दूसरी सुविधाओं का एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होना है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
नोएडा एयरपोर्ट से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। एयरपोर्ट संचालन के अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, सुरक्षा, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, कार्गो और एविएशन सेवाओं में रोजगार बढ़ सकता है। मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में एयरपोर्ट से जुड़ी सेवाओं में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और लॉजिस्टिक्स तथा कार्गो में करीब 50 हजार अतिरिक्त अवसर पैदा होने का अनुमान दिया गया था। ये दीर्घकालिक अनुमान हैं और वास्तविक रोजगार एयरपोर्ट के विस्तार, निवेश तथा कारोबारी गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
जेवर के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउस बनने से केवल उच्च कौशल वाली नौकरियां ही नहीं, बल्कि ड्राइवर, मशीन ऑपरेटर, पैकेजिंग कर्मचारी, गोदाम कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, तकनीशियन और रखरखाव कर्मचारियों की मांग भी बढ़ सकती है।
इसके अलावा सप्लाई चेन मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स, कोल्ड चेन और ऑटोमेटेड वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे गौतमबुद्ध नगर के साथ बुलंदशहर, अलीगढ़ और आसपास के जिलों के युवाओं को भी रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं।
होटल और रिटेल सेक्टर को भी फायदा
एयरपोर्ट के आसपास यात्रियों और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, किराये के वाहन, शॉपिंग सेंटर और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में होटल परियोजनाओं के लिए भी निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं।
व्यापारिक यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या बढ़ने पर हॉस्पिटैलिटी उद्योग को सीधा फायदा मिल सकता है। इसके साथ एयरपोर्ट कर्मचारियों और आसपास विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाली आबादी के कारण आवासीय, खुदरा और दैनिक सेवाओं की मांग भी बढ़ने की संभावना है।
जेवर में जमीन की कीमतों पर भी असर
एयरपोर्ट और आसपास की परियोजनाओं का असर जमीन की कीमतों पर पहले ही दिखाई दे रहा है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार जेवर क्षेत्र में कुछ जगह जमीन के बाजार भाव एयरपोर्ट परियोजना से पहले की तुलना में तीन से पांच गुना तक बढ़ चुके हैं। इससे एक तरफ जमीन मालिकों को बढ़ी कीमतों का फायदा मिला है, वहीं विकास परियोजनाओं के लिए भूमि जुटाने की लागत भी बढ़ी है।
हालांकि संपत्ति की बढ़ती कीमतों को आर्थिक विकास का अकेला पैमाना नहीं माना जा सकता। क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए उद्योगों का वास्तविक संचालन, परिवहन नेटवर्क, कौशल विकास और स्थानीय रोजगार महत्वपूर्ण होंगे।
कुल मिलाकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का असर रनवे और टर्मिनल तक सीमित नहीं रहने वाला है। जेवर में कार्गो हब, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्लस्टर, होटल और अन्य कारोबारी गतिविधियों का नेटवर्क विकसित होने से NCR की आर्थिक गतिविधियों का एक नया केंद्र उभर सकता है। एयरपोर्ट से जुड़े निवेश और रोजगार के कई आंकड़े अभी अनुमान आधारित हैं, लेकिन क्षेत्र में हो रहे औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं संकेत देती हैं कि जेवर आने वाले वर्षों में NCR के महत्वपूर्ण आर्थिक और माल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।