लखनऊ: नगर निगम मुख्यालय का किसानों ने घेराव किया है। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले 300 से अधिक महिला-पुरुष नगर निगम मुख्यालय पहुंचे हैं। नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। मौके पर पुलिस बल तैनात है। किसानों का कहना है कि जब मांगें नहीं हो जाएंगी, यहीं पर डटे रहेंगे।
किसानों का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण राधा ग्राम में सुरेश कुमार लोधी निवासी लोध पुरवा, ठाकुरगंज की मौत हो गई थी।
परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य की नौकरी दी जाए। घटना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, क्योंकि अभी तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। दरअसल, ठाकुरगंज इलाके के राधा ग्राम में नाले का स्लैब टूटा होने के कारण 11 जुलाई को 40 साल के सुरेश लोधी बह गए थे। 28 घंटे बाद उनका एक किलोमीटर दूर शव मिला था। मामले में जेई को निलंबित किया गया था। एई को नोटिस जारी हुआ था। सफाई करने वाले ठेकेदार और स्थानीय पार्षद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
मोहम्मद हलीम भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक से जुड़े हैं। उनका कहना है कि बारिश में सीवर की बड़ी समस्या है। नालों की सही ढंग से सफाई नहीं हो रही है। जहां किसानों की जमीनों का अधिग्रहण हुआ है, वहां ढंग से सफाई तक नहीं की जाती है। सफाई कर्मी आते हैं और बिना सफाई किए वापस लौट जाते हैं। कैफ सिद्दीकी का कहना है कि नगर निगम से जुड़ीं तमाम समस्याएं हैं। शिकायत के बाद स्थानीय पार्षद फोन उठाना ही बंद कर देते हैं। नगर निगम के अधिकारी सुनते नहीं हैं फिर ऐसे में क्या किया जाए। कल रावत ने कहा कि शहर में स्थिति खराब है। नाले में आदमी बह जा रहे हैं। किसान अपने साथ जनरेटर लाउडस्पीकर और साउंड लेकर पहुंचे हैं। इस दौरान जय जवान जय किसान नगर निगम प्रशासन होश में आओ नारे भी लगा रहे हैं।
मौके पर किस ज्ञापन लेकर पहुंचे हैं। इस दौरान पुलिस के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत भी हुई। किसानों ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में आने वाले गांव का विकास नहीं किया जा रहा है। किसानों की भूमि किसी भी योजना में अधिकृत की गई हो उन सभी पीड़ित किसानों का हाउस टैक्स एवं वाटर टैक्स आरक्षण के आधार पर माफ किया जाए। ग्राम पहाड़पुर और छोटा पहाड़पुर के किसानों के कई कब्रिस्तान की भूमि पर नगर निगम द्वारा शव दहन करने से रोका जा रहा है। जब तक वैकल्पिक व्यवस्था न होने तक, इसकी अनुमति दी जाए। जिन 84 गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया है, उन गांवों में सफाई, नाली, सीवर और गांव का सुंदरीकरण कराया जाए।
नगर निगम के अंतर्गत आने वाले कई गांव में अभी तक वाटर लाइन भी नहीं डाली गई है। बावजूद इसके 25 से 30 हजार रुपए वाटर टैक्स किसानों को भेजा जा रहा है। यह गलत है किसानों का पुराना टैक्स माफ किया जाए और जो अभी जल्द में ही टैक्स भेजा गया है उसे आधा करके जमा करवाया जाए।