आगरा। जिले में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने अब सभी श्रेणी की सरकारी जमीन का व्यापक ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। नजूल भूमि, शत्रु संपत्ति, चरागाह समेत अन्य सरकारी जमीन का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। खास बात यह होगी कि पहले हो चुके सत्यापन की पहली बार क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रिकॉर्ड में रिक्त दर्ज सरकारी भूमि वास्तव में मौके पर भी खाली है या उस पर किसी ने कब्जा कर रखा है।
प्रशासन की इस कवायद के तहत यदि किसी सरकारी भूमि पर कब्जा पाया जाता है तो संबंधित कब्जेदार का नाम दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि भूमि पर कब्जा होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने उसे रिकॉर्ड में रिक्त क्यों दिखाया। ऐसे मामलों में लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी तैयार की जाएगी।
डीएम मनीष बंसल की नई पहल
जिलाधिकारी मनीष बंसल की ओर से शुरू की जा रही इस पहल का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करना और उनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। प्रशासन का मानना है कि केवल राजस्व अभिलेखों में सरकारी जमीन को दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि जमीन वास्तव में सरकारी कब्जे में और अतिक्रमण से मुक्त हो।
इसी वजह से पहले से किए गए सत्यापन को दोबारा जांचने की योजना बनाई गई है। क्रॉस चेकिंग के दौरान अभिलेखों में दर्ज स्थिति और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा।
हर दिन मिल रही आठ से 10 शिकायतें
सरकारी भूमि पर कब्जे से संबंधित शिकायतों की लगातार बढ़ती संख्या इस अभियान की बड़ी वजह बताई जा रही है। कलक्ट्रेट से लेकर जिले की छह तहसीलों में प्रतिदिन औसतन आठ से 10 शिकायतें ऐसी पहुंच रही हैं, जिनमें सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाया जाता है।
इन शिकायतों में नजूल, चरागाह और अन्य सरकारी श्रेणी की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले सामने आने की बात कही जाती है। शिकायतों की लगातार संख्या ने प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सरकारी भूमि का मौजूदा सत्यापन पूरी तरह प्रभावी है।
अब प्रशासन रिकॉर्ड के साथ मौके की स्थिति का मिलान करके वास्तविक तस्वीर सामने लाने की तैयारी में है।
तहसीलों में रखे जाएंगे अलग-अलग रजिस्टर
सरकारी भूमि की निगरानी को व्यवस्थित करने के लिए प्रत्येक तहसील में अलग-अलग श्रेणी की जमीन के रजिस्टर तैयार किए जाएंगे। करीब आधा दर्जन श्रेणियों की सरकारी भूमि का अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इन रजिस्टरों में भूमि का विवरण, उसका क्षेत्रफल, वर्तमान स्थिति और उपलब्धता जैसी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे भविष्य में किसी सरकारी जमीन की स्थिति की जानकारी हासिल करना आसान होगा।
रिकॉर्ड व्यवस्थित होने के बाद अधिकारियों के लिए यह पता लगाना भी आसान होगा कि कौन सी जमीन खाली है, कहां सरकारी योजना के लिए भूमि उपलब्ध है और किस जमीन पर किसी तरह का अतिक्रमण है।
खाली जमीन का होगा उपयोग
प्रशासन की योजना सिर्फ सरकारी जमीन से कब्जे हटाने तक सीमित नहीं है। ऑडिट के दौरान यदि बड़ी मात्रा में ऐसी भूमि सामने आती है जो वास्तव में खाली है, तो उसका उपयोग गरीबों के आवास और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
इससे सरकारी भूमि को निष्क्रिय पड़े रहने के बजाय जनहित में इस्तेमाल करने का रास्ता खुलेगा। गरीब परिवारों के लिए आवासीय योजनाओं के अलावा जरूरत के अनुसार अन्य सार्वजनिक योजनाओं में भी उपयुक्त भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
कब्जे के साथ जिम्मेदारी भी तय होगी
अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकारी जमीन पर कब्जा मिलने की स्थिति में केवल कब्जेदार की पहचान नहीं की जाएगी, बल्कि रिकॉर्ड में भूमि की स्थिति दर्ज करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी।
यदि किसी जमीन पर लंबे समय से कब्जा था और इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे रिक्त दिखाया गया, तो प्रशासन यह पता करेगा कि सत्यापन के दौरान यह स्थिति सामने क्यों नहीं आई। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
इससे सरकारी भूमि के सत्यापन में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
शिकायतों के निस्तारण में मिलेगी मदद
प्रशासन को उम्मीद है कि सरकारी भूमि का व्यवस्थित ऑडिट होने के बाद कब्जे से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में भी तेजी आएगी। शिकायत मिलने पर अधिकारियों के पास संबंधित भूमि का रिकॉर्ड और मौके की स्थिति दोनों उपलब्ध होंगे।
इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है और बार-बार एक ही जमीन की स्थिति की जांच करने की जरूरत कम होगी।
सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर जोर
सरकारी भूमि किसी भी जिले की महत्वपूर्ण संपत्ति होती है। इसके अतिक्रमण से न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि भविष्य में विकास योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता भी प्रभावित होती है।
प्रशासन की नई पहल में रिकॉर्ड को अपडेट करने के साथ जमीन की वास्तविक स्थिति जानने पर जोर दिया जा रहा है। इससे सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और उनके योजनाबद्ध इस्तेमाल का रास्ता साफ हो सकता है।