झांसी। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में शुरू हुई महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सुपर स्पेशियलिटी विंग में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार देर रात अस्पताल की चौथी मंजिल स्थित आईसीयू में अचानक फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा गिर गया। घटना के समय आईसीयू में मरीज भर्ती थे। गनीमत रही कि गिरते मलबे की चपेट में कोई मरीज नहीं आया और बड़ा हादसा टल गया।

फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में आईसीयू में भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराया गया और आईसीयू को फिलहाल बंद कर दिया गया। घटना के बाद अस्पताल की निर्माण गुणवत्ता और भवन के रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

आईसीयू में मची अफरा-तफरी

शुक्रवार देर रात चौथी मंजिल के आईसीयू में मरीजों के इलाज का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक फॉल्स सीलिंग का हिस्सा नीचे आ गिरा। सीलिंग गिरने की आवाज सुनकर वहां मौजूद मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति संभाली। मरीजों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आईसीयू में भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद प्रभावित आईसीयू को बंद कर दिया गया।

मरीजों के लिए राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, जिस स्थान पर मरीजों का इलाज चल रहा हो, वहां सीलिंग गिरने की घटना अपने आप में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अगले दिन यूरोलॉजी वार्ड में भी हादसा

आईसीयू की घटना के बाद अगले ही दिन अस्पताल के यूरोलॉजी वार्ड में भी फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना सामने आई। बताया गया कि एक महिला मरीज के बेड के पास अचानक सीलिंग का हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया।

महिला मरीज इस घटना में बाल-बाल बच गई। हालांकि, उसके साथ मौजूद तीमारदार की पीठ पर सीलिंग का मलबा गिर गया। इससे अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में चिंता और बढ़ गई।

एक ही परिसर में लगातार दो दिनों में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाओं ने अस्पताल की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी सामने आ चुकी हैं घटनाएं

सुपर स्पेशियलिटी विंग में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं। इससे पहले भी भूतल की ओपीडी और द्वितीय तल के बैठक कक्ष में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

लगातार अलग-अलग हिस्सों में सीलिंग गिरने से भवन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर तब, जब यह भवन मरीजों के इलाज के लिए बनाया गया है और इसमें आईसीयू जैसे संवेदनशील चिकित्सा क्षेत्र भी संचालित होते हैं।

300 करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सुपर स्पेशियलिटी विंग का निर्माण करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था और वर्ष 2019 में इसे शुरू किया गया। इतने बड़े निवेश से तैयार चिकित्सा भवन में बार-बार फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं मरीजों और उनके परिजनों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन के किसी भी हिस्से में निर्माण संबंधी कमी या रखरखाव की समस्या मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भवन में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और फॉल्स सीलिंग की फिटिंग की जांच किस स्तर पर की गई थी। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण है कि भवन के नियमित रखरखाव और सुरक्षा निरीक्षण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

फॉल्स सीलिंग का वजन गिरने की स्थिति में मरीजों को गंभीर चोट पहुंचा सकता है। अस्पताल के आईसीयू और वार्ड जैसे स्थानों में मरीज अक्सर बिस्तर पर होते हैं और अचानक ऐसी घटना होने पर उनके लिए खुद को बचाना मुश्किल होता है।

जांच और स्थायी समाधान की जरूरत

लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए प्रभावित हिस्सों का तकनीकी निरीक्षण कराना जरूरी माना जा रहा है। केवल गिरी हुई सीलिंग की मरम्मत करने के बजाय पूरे भवन में फॉल्स सीलिंग, फिटिंग और संबंधित संरचनाओं की व्यापक जांच की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि सीलिंग गिरने के पीछे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नमी, फिटिंग की कमजोरी या रखरखाव में कमी जैसे कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके परिजन चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित वातावरण की भी उम्मीद करते हैं। आईसीयू जैसे संवेदनशील विभाग में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना को सामान्य नहीं माना जा सकता।

Tags: