सपा के PDA फॉर्मूले पर दिनेश शर्मा का निशाना, बोले चुनावी प्रेम नहीं होना चाहिए
Lucknow लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) की राजनीति और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजनीति में बार-बार शब्दों और परिभाषाओं के बदलने से जनता भ्रमित होती है और इसका असर चुनावों में देखने को मिलता है।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिनेश शर्मा ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में जहां तेजी से अर्थ बदलते हैं, वहां जनता भी इसका जवाब देने के लिए तैयार हो जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक विचारधारा और अभियान में स्थिरता जरूरी होती है।
दिनेश शर्मा ने सपा के PDA को लेकर कहा कि शुरुआत में इसमें अलग-अलग अर्थ जोड़े गए। उन्होंने कहा कि पहले P को पीड़ित बताया गया, इसके बाद PDA की परिभाषा में पिछड़ा जोड़ा गया और बाद में इसमें पंडित शब्द को शामिल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी वर्ग के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना है तो वह केवल चुनावी समय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
भाजपा सांसद ने कहा कि समाज के सभी वर्गों के प्रति समान भावना और सम्मान लगातार बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किसी वर्ग को जोड़ने की कोशिश और चुनाव खत्म होने के बाद उसे नजरअंदाज करना जनता को पसंद नहीं आता।
उन्होंने कहा कि राजनीति में जनता सब कुछ देखती और समझती है। मतदाता यह तय करते हैं कि कौन सा दल वास्तव में उनके साथ खड़ा है और कौन केवल चुनावी समय में मुद्दे उठाता है। दिनेश शर्मा के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सपा और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। PDA के मुद्दे पर दोनों दल लगातार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने PDA को प्रदेश में सामाजिक न्याय और भागीदारी का मुद्दा बताया है, जबकि भाजपा नेता इसे लेकर सपा की रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।