अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का एक विस्तृत बयान जारी कर मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी है। इस बयान में उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई बड़े दावे किए हैं।
चंपत राय ने अपने बयान में दावा किया कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई बड़े फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की प्रमुख भूमिका रही। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी के चयन से लेकर कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं तक में नृपेंद्र मिश्रा के निर्णयों को प्राथमिकता दी गई।
9 पन्नों के बयान में रखी अपनी बात
चंपत राय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद को लेकर चर्चा चल रही थी। चंपत राय ने अपने बयान में कई बिंदुओं के जरिए मंदिर निर्माण प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों का विवरण दिया है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। ट्रस्ट में 15 सदस्यों को शामिल किया गया और नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण समिति की जिम्मेदारी दी गई।
चंपत राय ने दावा किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े सभी प्रमुख फैसले निर्माण समिति की बैठकों में लिए जाते थे और नृपेंद्र मिश्रा इन फैसलों में सबसे अहम भूमिका निभाते थे।
L&T और अन्य कंपनियों के चयन पर किया दावा
अपने बयान में चंपत राय ने दावा किया कि मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चयन में नृपेंद्र मिश्रा की अहम भूमिका रही। उन्होंने यह भी कहा कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को चुना गया।
उन्होंने मंदिर परिसर के अन्य निर्माण कार्यों के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म के चयन का जिक्र भी किया और दावा किया कि इस प्रक्रिया में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
फैसलों में किसी और की राय को महत्व नहीं मिलने का दावा
चंपत राय ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कई मामलों में नृपेंद्र मिश्रा के फैसलों को ही प्राथमिकता दी गई और अन्य लोगों के सुझावों को ज्यादा महत्व नहीं मिला।
उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण समिति की नियमित बैठकें होती थीं और अधिकांश निर्णय इन्हीं बैठकों में लिए जाते थे। उनके अनुसार, निर्माण कार्य से जुड़ा कोई भी बड़ा कदम समिति की चर्चा के बाद ही आगे बढ़ा।
नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर क्यों उठे सवाल?
नृपेंद्र मिश्रा पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के तौर पर वह शुरुआत से ही निर्माण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
मंदिर निर्माण की तकनीकी, प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
चढ़ावा विवाद के बाद सामने आया बयान
राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े मामले में चंपत राय पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद चंपत राय ने अपना विस्तृत बयान जारी किया और मंदिर निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर सफाई दी।
उन्होंने अपने बयान में यह बताने की कोशिश की कि मंदिर निर्माण में फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और किन लोगों की क्या भूमिका रही।
राम मंदिर निर्माण का ऐतिहासिक महत्व
अयोध्या में बन रहा राम मंदिर देश के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स में से एक है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ था और इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाली।
मंदिर निर्माण के हर चरण पर देशभर की नजर रही है। यही वजह है कि इससे जुड़े किसी भी बयान या विवाद पर व्यापक चर्चा शुरू हो जाती है।
आगे बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा
चंपत राय के बयान के बाद राम मंदिर निर्माण से जुड़े निर्णयों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, उनके दावों पर अभी नृपेंद्र मिश्रा या अन्य संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट से जुड़े सभी फैसलों को लेकर आने वाले समय में और जानकारी सामने आ सकती है।
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