उत्तर प्रदेश: मेरठ में पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक दलित किसान नेता ने आरोप लगाया है कि एसएसपी कार्यालय में उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी आंख में गंभीर चोट आई। मामले में आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
मामला किसान नेता दिग्विजय भाटी से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि वह किसी मामले को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे, जहां बातचीत के दौरान विवाद हो गया। किसान नेता का दावा है कि इसके बाद उनके साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिटाई के दौरान उनकी आंख में गंभीर चोट आई और खून निकलने लगा।
दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस कार्यालय में ही पीटा गया और बाद में थाने ले जाकर भी मारपीट की गई। उनका कहना है कि इस घटना के दौरान उनके साथी मोहित जाटव के साथ भी कथित तौर पर मारपीट हुई। हालांकि पुलिस अधिकारियों की ओर से आरोपों को खारिज किया गया है और पूरे मामले की जांच की बात कही गई है।
इस मामले में एसएसपी अविनाश पांडेय पर भी आरोप लगाए गए हैं। किसान नेता का कहना है कि पुलिस अधिकारियों के सामने उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं एसएसपी पक्ष का कहना है कि घटना के वास्तविक तथ्यों की जांच जरूरी है और लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई। समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) ने जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच में घटना के सभी पहलुओं, मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी।
वहीं, यह मामला मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच गया है। शिकायत में पुलिस कार्रवाई और कथित मारपीट को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अब जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और कौन जिम्मेदार है।
पुलिस विभाग में किसी भी व्यक्ति के साथ हिरासत या कार्यालय में मारपीट को गंभीर मामला माना जाता है। कानून के अनुसार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए कार्रवाई करनी होती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी होती है ताकि दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जा सके।
इस विवाद के बीच पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं पुलिस विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल डीआईजी स्तर की जांच शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है कि इसमें क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
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