उत्तर प्रदेश : अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी में उसे सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए जेल में बंद उसके बड़े भाई मोहम्मद अली अहमद और मोहम्मद उमर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से सशर्त कस्टडी पैरोल मिली है। अदालत की अनुमति के बाद दोनों को अलग-अलग जेलों से कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाया जा रहा है। अली को झांसी जेल से और उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज ले जाया जा रहा है।
अली अहमद को लेकर झांसी से प्रयागराज जा रहे सुरक्षा काफिले के रूट में अचानक बदलाव किया गया। पहले तय कार्यक्रम के मुताबिक अली को झांसी-खजुराहो हाईवे के रास्ते प्रयागराज ले जाया जाना था, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते अंतिम समय में रूट बदल दिया गया। इसके बाद काफिला झांसी-कानपुर मार्ग से प्रयागराज के लिए रवाना हुआ। इसी दौरान उरई के बाहर बड़ागांव क्षेत्र में अली का काफिला करीब दो मिनट के लिए अचानक रोक दिया गया।
काफिले के अचानक रुकने से आसपास मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए हलचल मच गई। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी और अन्य जवान पूरी तरह अलर्ट नजर आए। करीब छह गाड़ियों का काफिला कुछ देर रुकने के बाद दोबारा प्रयागराज की ओर रवाना हो गया। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रूट में बदलाव किया गया है। रास्ते में भी आवश्यकतानुसार सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
बड़ागांव से रवाना होने के बाद अली का काफिला झांसी-कानपुर मार्ग से आगे बढ़ा और यमुना पुल पार करते हुए कानपुर देहात की ओर पहुंच गया। पुलिस और प्रशासन की ओर से पूरे रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आबान के अंतिम संस्कार को देखते हुए प्रयागराज में भी पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है।
दरअसल, आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके दोनों बड़े भाइयों ने हाईकोर्ट में पैरोल की मांग की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद मोहम्मद उमर और अली अहमद को सशर्त कस्टडी पैरोल की अनुमति दी। अदालत ने उन्हें अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने और अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में निभाने की इजाजत दी है।
कोर्ट ने पैरोल के दौरान कई शर्तें भी लगाई हैं। दोनों भाइयों को किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा या जुलूस में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा वे मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया से बातचीत नहीं कर सकेंगे। जनाजे और अंतिम संस्कार के दौरान भी उनकी गतिविधियों पर पुलिस की निगरानी रहेगी।
अदालत ने दोनों भाइयों को अपने परिवार के कुछ सदस्यों से मुलाकात की अनुमति भी दी है। कस्टडी पैरोल के दौरान उमर और अली अपनी बुआ परवीन कुरैशी और छोटे भाई अहजम अहमद से करीब एक घंटे तक मुलाकात कर सकेंगे। यह मुलाकात पुलिस की मौजूदगी में तय स्थान पर होगी। अंतिम संस्कार और निर्धारित मुलाकात की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को वापस उनकी संबंधित जेलों में भेज दिया जाएगा।
अदालत की ओर से दी गई अनुमति के तहत दोनों भाइयों को केवल धार्मिक रस्मों में शामिल होने और निर्धारित परिजनों से मुलाकात की इजाजत है। उन्हें किसी राजनीतिक गतिविधि, सार्वजनिक कार्यक्रम या भीड़ को संबोधित करने की अनुमति नहीं दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
आबान की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। उसके अंतिम संस्कार में परिवार के करीबी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, अली और उमर को कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज लाए जाने के कारण पुलिस-प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं। काफिले के रूट में बदलाव और रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल अली अहमद का काफिला प्रयागराज की ओर बढ़ रहा है, जबकि उमर को भी लखनऊ से कड़ी सुरक्षा के बीच लाया जा रहा है। दोनों भाइयों के आबान के जनाजे में शामिल होने के बाद उन्हें अदालत के निर्देशों के अनुसार वापस जेल भेजा जाएगा।
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