लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर बड़ी राजनीतिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो हर साल 16 अगस्त को वीरांगना अवंतीबाई लोधी के सम्मान में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा। सरकार की ओर से उनकी स्मृति में कार्यक्रम और समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।
अखिलेश यादव रविवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर आयोजित विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने वीरांगना की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान समाजवादी पार्टी के कई नेता, लोधी समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सपा प्रमुख ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। अखिलेश ने उनकी तुलना स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नायिकाओं से करते हुए कहा कि इतिहास में उनकी बहादुरी और संघर्ष को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया और उसके अगले दिन ऐसी वीरांगना की जयंती है, जिन्होंने आजादी के संघर्ष को मजबूत करने का काम किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक क्रांतिकारियों को फांसी दी गई और कई लोगों ने अपना बलिदान दिया, लेकिन इन बलिदानों के बावजूद स्वतंत्रता की लड़ाई कमजोर नहीं हुई।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर 16 अगस्त को केवल अवकाश ही घोषित नहीं किया जाएगा, बल्कि रानी अवंतीबाई लोधी की स्मृति में सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोधी समाज के लोगों को भरोसा दिलाया कि सत्ता में आने पर समाज को राजनीतिक सम्मान, अधिकार और उचित भागीदारी दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा।
सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में पार्टी के पीडीए फॉर्मूले का भी उल्लेख किया। पीडीए से समाजवादी पार्टी का आशय पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से है। अखिलेश ने कहा कि पीडीए की लड़ाई उन सभी लोगों की है, जो पीड़ित, वंचित और सरकारी सहायता से दूर हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इन वर्गों को एकजुट करके सामाजिक न्याय की लड़ाई आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
अखिलेश ने कहा कि चुनाव में समाजवादी पार्टी सभी दावेदारों को टिकट नहीं दे सकी, लेकिन जिन पीडीए उम्मीदवारों को मौका दिया गया, उन्होंने अपनी ताकत साबित की। उन्होंने दावा किया कि पीडीए उम्मीदवारों का चुनावी प्रदर्शन बेहतर रहा और इस रणनीति ने पार्टी को राजनीतिक रूप से मजबूत किया है।
भाजपा पर हमला करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, गरीब और युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया। उन्होंने पिछले वर्षों में अलग-अलग स्थानों पर हुए युवा आंदोलनों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि युवाओं के विरोध के कारण कई सरकारों को अपने फैसले वापस लेने पड़े और गलतियां स्वीकार करनी पड़ीं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर उभरे एक राजनीतिक समूह का उल्लेख करते हुए भाजपा पर उसकी आवाज दबाने का आरोप भी लगाया। यह अखिलेश यादव का राजनीतिक दावा है और संबंधित सोशल मीडिया खाते पर कार्रवाई के कारण की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अखिलेश ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि रामराज्य लाने का दावा करने वाले लोग अब धार्मिक संपत्ति से जुड़े मामलों में सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा की ओर से इन ताजा आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक दृष्टि से अखिलेश यादव की यह घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में लोधी समाज का कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव है। सपा पीडीए रणनीति के माध्यम से विभिन्न पिछड़े वर्गों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सार्वजनिक अवकाश और राजनीतिक हिस्सेदारी का वादा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।