अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के डिडौली क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गांव पतई खालसा में कथित तौर पर कुत्तों का झुंड घर के खुले आंगन में चारपाई पर सो रहे डेढ़ साल के बच्चे गवनीश को उठाकर ले गया। घटना उस समय हुई जब बच्चे की मां किरन रात में शौचालय गई हुई थी और परिवार के अन्य सदस्य कुछ दूरी पर सो रहे थे। अचानक हुई घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई और बच्चे की तलाश शुरू की गई।
जानकारी के अनुसार, डिडौली क्षेत्र के गांव पतई खालसा निवासी भूकन सैनी की बेटी किरन की शादी अमरोहा के कल्याणपुरा निवासी मनोज के साथ हुई है। शुक्रवार शाम किरन तीज का त्योहार मनाने अपने मायके पतई खालसा पहुंची थी। उसके साथ उसके दोनों बेटे गोलू और डेढ़ वर्षीय गवनीश भी आए थे।
दिनभर परिवार में तीज को लेकर उत्साह का माहौल रहा। रात होने पर परिवार के सदस्य घर में सो गए। गोलू और गवनीश अपनी मां किरन की चारपाई पर बरामदे में सो रहे थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य उनसे थोड़ी दूरी पर सोए हुए थे।
बताया गया कि भूकन सैनी के मकान के मुख्य हिस्से में गेट नहीं लगा है और आंगन भी खुला हुआ है। रात करीब 11 बजे किरन घर के बाहरी हिस्से में बने शौचालय में गई। इसी दौरान कथित तौर पर कुत्तों का एक झुंड खुले आंगन से घर के अंदर घुस आया।
चारपाई पर सो रहा था मासूम
उस समय डेढ़ साल का गवनीश अपने भाई गोलू के साथ चारपाई पर सो रहा था। परिवार के सदस्यों को शुरुआत में कुत्तों के घर में घुसने का पता नहीं चला। आरोप है कि कुत्तों ने चारपाई पर सो रहे गवनीश को उठा लिया और उसे लेकर घर से बाहर निकल गए।
कुछ ही देर में जब परिवार को बच्चे के गायब होने का पता चला तो घर में हड़कंप मच गया। जिस चारपाई पर दोनों बच्चे सो रहे थे, वहां गवनीश के नहीं मिलने से परिजन घबरा गए। परिवार के लोग तुरंत बच्चे की तलाश में बाहर निकले।
रात का समय होने के कारण बच्चे को खोजने में भी परेशानी हुई। घटना की जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंची तो ग्रामीण भी बच्चे की तलाश में जुट गए। घर के आसपास और गांव के विभिन्न हिस्सों में उसकी खोज शुरू की गई।
तीज मनाने मायके आई थी किरन
किरन अपने दोनों बेटों के साथ खुशी-खुशी तीज मनाने मायके आई थी। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि रात होते-होते परिवार के सामने ऐसी घटना आ जाएगी। घटना के बाद त्योहार की खुशियां चिंता और मातम जैसे माहौल में बदल गईं।
परिवार के लिए सबसे बड़ा सदमा यह था कि बच्चा घर के भीतर चारपाई पर सो रहा था। मां कुछ समय के लिए शौचालय गई और इसी बीच यह घटना हो गई। घर का आंगन खुला होने और गेट नहीं लगे होने के कारण कुत्तों के झुंड के आसानी से अंदर प्रवेश करने की बात सामने आई है।
घटना ने ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटे बच्चों के लिए कुत्तों का झुंड विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। रात में खुले मकानों और आंगनों में सोने वाले परिवारों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
आवारा कुत्तों को लेकर बढ़ी चिंता
अमरोहा सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। कुत्तों के झुंड के आक्रामक होने की स्थिति में बच्चों, बुजुर्गों और अकेले चलने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
पतई खालसा की इस घटना के बाद गांव के लोगों में भी चिंता का माहौल है। ग्रामीणों के सामने अब अपने बच्चों और पशुओं की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय स्तर पर आवारा कुत्तों की संख्या अधिक होने की स्थिति में संबंधित विभागों से प्रभावी कदम उठाने की मांग भी उठ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों को खुले स्थान पर अकेला छोड़ने से बचना चाहिए, खासकर उन इलाकों में जहां आवारा कुत्तों की आवाजाही अधिक हो। रात के समय घर के प्रवेश मार्ग को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
परिवार के लिए भयावह बनी रात
शुक्रवार की रात भूकन सैनी के परिवार के लिए बेहद भयावह साबित हुई। परिवार के सदस्य कुछ ही दूरी पर सो रहे थे, लेकिन कथित तौर पर कुत्तों का झुंड घर में घुस आया और मासूम को उठा ले गया। घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
बच्चे के गायब होने की जानकारी मिलते ही परिवार के लोगों ने शोर मचाया। इसके बाद पड़ोस के लोग भी घरों से बाहर निकल आए और तलाश शुरू की। रात में टॉर्च और अन्य साधनों की मदद से आसपास के इलाकों में बच्चे को खोजा गया।
घटना के बाद सबसे ज्यादा सदमे में बच्चे की मां किरन और परिवार के अन्य सदस्य हैं। किरन दोनों बच्चों को लेकर तीज मनाने मायके पहुंची थी। परिवार में त्योहार को लेकर खुशी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में पूरा माहौल बदल गया।
खुले घरों में सुरक्षा की जरूरत
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में खुले आंगन और बिना गेट वाले मकानों की सुरक्षा को लेकर भी ध्यान खींचा है। गर्मी और उमस के दौरान कई परिवार बरामदे या खुले आंगन में चारपाई डालकर सोते हैं। ऐसे में आवारा जानवरों के प्रवेश का खतरा बना रहता है।
विशेष रूप से छोटे बच्चों को जमीन या खुले बरामदे में अकेला सुलाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। घर के प्रवेश मार्ग पर गेट या अन्य सुरक्षित अवरोध होने से जानवरों के अंदर आने का खतरा कम किया जा सकता है।
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय निकायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। नसबंदी, टीकाकरण और कुत्तों की आबादी के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे उपायों के जरिए दीर्घकालिक स्तर पर समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
फिलहाल पतई खालसा की घटना से गांव में भय और चिंता का माहौल है। परिवार के लिए तीज की खुशियां अचानक एक भयावह घटना में बदल गईं। डेढ़ वर्षीय गवनीश को कथित तौर पर घर के भीतर चारपाई से कुत्तों के झुंड द्वारा उठा ले जाने की घटना ने ग्रामीणों को भी झकझोर दिया है।