सोनभद्र। शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर रानीबारी में चढ़ावे, दानपात्र, अमानती धनराशि और मंदिर की संपत्तियों के रखरखाव तथा आय-व्यय को लेकर लगाए गए आरोपों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी सोनभद्र ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है। समिति मंदिर से जुड़े वित्तीय लेनदेन, चढ़ावे और संपत्तियों के रखरखाव समेत विभिन्न बिंदुओं की जांच करेगी।

मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं और आय-व्यय को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच उच्चस्तरीय जांच के आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन की ओर से गठित जांच समिति अब आरोपों से जुड़े तथ्यों और अभिलेखों की पड़ताल करेगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे और दान की राशि का लेखा-जोखा किस प्रकार रखा जाता है और मंदिर की संपत्तियों की देखरेख एवं आय का संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद कार्रवाई

मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से निर्देश मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच समिति गठित की है। इससे पहले मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर लगाए गए आरोप प्रशासन के संज्ञान में आए थे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब पूरे प्रकरण की जांच उच्चस्तर पर कराने का निर्णय लिया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों से जानकारी लेकर मामले की वास्तविक स्थिति सामने रखेगी। जांच के दौरान मंदिर से संबंधित आय के स्रोत, खर्च, दानपात्रों से प्राप्त राशि और अमानती धनराशि सहित अन्य वित्तीय पहलुओं की जांच की जा सकती है।

चढ़ावे और दानपात्र पर भी नजर

मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली राशि और दानपात्र से प्राप्त धन मंदिर की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इस राशि के संग्रह, गिनती, रिकॉर्ड और उपयोग को लेकर पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है।

जांच समिति यह देख सकती है कि दानपात्रों से प्राप्त राशि का नियमित रूप से हिसाब रखा गया या नहीं। इसके अलावा राशि को सुरक्षित रखने, बैंक में जमा करने और मंदिर की व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

अमानती धनराशि का भी होगा परीक्षण

मंदिर से जुड़े मामले में अमानती धनराशि को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में जांच समिति के सामने यह महत्वपूर्ण बिंदु होगा कि अमानत के रूप में रखी गई राशि का रिकॉर्ड किस तरह तैयार किया गया और उसका संचालन किन नियमों के तहत किया गया।

समिति संबंधित दस्तावेजों और खातों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि अमानती धनराशि का पूरा हिसाब उपलब्ध है या नहीं। इसके साथ ही धनराशि के रखरखाव और उससे संबंधित प्रक्रिया की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।

मंदिर की संपत्तियों की भी होगी पड़ताल

मंदिर की संपत्तियों के रखरखाव और उनसे होने वाली आय को लेकर लगाए गए आरोप भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल होंगे। समिति यह देख सकती है कि मंदिर के नाम दर्ज संपत्तियों का रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित है और उनका रखरखाव किस प्रकार किया जा रहा है।

यदि मंदिर की किसी संपत्ति से आय प्राप्त होती है तो उसका लेखा-जोखा भी जांच के दायरे में आ सकता है। प्रशासन यह भी देख सकता है कि संपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं।

मंदिर की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, रखरखाव पर होने वाले खर्च और उससे प्राप्त होने वाली आय का मिलान किए जाने की संभावना है। इससे आरोपों की वास्तविकता सामने लाने में मदद मिल सकती है।

आय-व्यय के रिकॉर्ड की होगी जांच

मंदिर की कुल आय और खर्च का हिसाब भी जांच का अहम हिस्सा होगा। समिति मंदिर की आय के विभिन्न स्रोतों और खर्च की मदों का परीक्षण कर सकती है। इसके लिए संबंधित रजिस्टर, रसीदें, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

जांच में यह भी देखा जा सकता है कि मंदिर के खर्च के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। यदि आय-व्यय में किसी प्रकार का अंतर मिलता है तो उसके कारणों की जानकारी संबंधित जिम्मेदार लोगों से ली जा सकती है।

पारदर्शिता की बढ़ेगी उम्मीद

मंदिर धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होने के कारण यहां होने वाले चढ़ावे और दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को विशेष महत्व दिया जाता है। उच्चस्तरीय जांच शुरू होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी उम्मीद जगी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

प्रशासन की ओर से गठित समिति अपनी जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों से जानकारी ले सकती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल जांच समिति के सामने आरोपों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करना सबसे महत्वपूर्ण होगा। जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कहीं वित्तीय या प्रशासनिक स्तर पर अनियमितता हुई है या नहीं।

यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी के तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित पक्षों को भी राहत मिल सकती है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा समिति गठित किए जाने से अब मंदिर की आय-व्यय और संपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच औपचारिक रूप से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

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