मुंबई। मानसून की सक्रियता के बीच मुंबई के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाली सात प्रमुख झीलों में पानी का भंडार लगातार बढ़ रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार सुबह तक मुंबई की सातों झीलों में कुल जल भंडारण क्षमता का 88.55 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है।
लगातार हो रही बारिश के कारण झीलों के जलस्तर में सुधार देखने को मिल रहा है। मानसून की शुरुआत में जल भंडार को लेकर चिंता बनी हुई थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई अच्छी बारिश ने स्थिति को बेहतर कर दिया है। जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने से मुंबई में आने वाले महीनों के लिए पेयजल उपलब्धता को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
मुंबई को पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से सात झीलों से होती है। इनमें तुलसी, विहार, तानसा, मोडक सागर, मध्य वैतरणा, भातसा और अपर वैतरणा जैसी प्रमुख झीलें शामिल हैं। इन जलाशयों में जमा पानी शहर की करोड़ों आबादी की प्यास बुझाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
BMC हर दिन इन झीलों के जलस्तर और पानी के भंडारण की स्थिति की निगरानी करता है। हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग द्वारा जारी आंकड़े शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था की स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, बारिश की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो झीलों में पानी का स्तर और बेहतर हो सकता है।
मुंबई में हर साल मानसून के दौरान झीलों में पानी भरने की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाती है। शहर की बढ़ती आबादी और पानी की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होना बेहद जरूरी है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो गर्मियों में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में झीलों में तेजी से बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
इस साल मानसून की शुरुआत में कई बार बारिश की कमी के कारण जल भंडारण को लेकर चिंता जताई गई थी। हालांकि, बाद में हुई लगातार बारिश ने जलाशयों की स्थिति में सुधार किया। पहाड़ी इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश का सीधा असर झीलों के जलस्तर पर पड़ा है।
BMC अधिकारियों का कहना है कि शहर में पेयजल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए जल संसाधनों की नियमित निगरानी की जा रही है। झीलों में पानी की उपलब्धता के आधार पर ही पूरे साल की जल आपूर्ति योजना तैयार की जाती है। पर्याप्त जल भंडारण होने से गर्मी के मौसम में पानी की कमी की आशंका कम हो जाती है।
मुंबई जैसे महानगर में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। यहां लाखों परिवारों के साथ-साथ उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संस्थानों को भी पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में झीलों में पर्याप्त पानी जमा होना शहर की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अच्छी बारिश ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पानी का सही प्रबंधन और संरक्षण भी जरूरी है। बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए भविष्य में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा। नागरिकों से भी समय-समय पर पानी की बचत करने की अपील की जाती है।
BMC की ओर से समय-समय पर लोगों को पानी का सोच-समझकर उपयोग करने की सलाह दी जाती है। प्रशासन का मानना है कि जल भंडार में सुधार के बावजूद पानी की बर्बादी रोकना जरूरी है, ताकि पूरे साल शहर में संतुलित जल आपूर्ति बनाए रखी जा सके।
फिलहाल मुंबई के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि मानसून की बारिश ने झीलों को भरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सातों जलाशयों में 88.55 प्रतिशत जल भंडारण पहुंचने के बाद शहर में पेयजल संकट की चिंता काफी हद तक कम हुई है।
आने वाले दिनों में भी BMC की नजर बारिश और झीलों के जलस्तर पर बनी रहेगी। यदि मानसून सामान्य रहा और जलाशयों में पानी की आवक जारी रही, तो मुंबई को पूरे वर्ष बेहतर जल आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।