नवी मुंबई : महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के सचिव के कार्यालय में घुसकर उन पर पाउडर फेंकने, बदसलूकी करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, तीनों संभाजी ब्रिगेड से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना सीबीडी बेलापुर स्थित आयोग के कार्यालय में हुई। आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक होने के मुद्दे पर विरोध जताने पहुंचे इन लोगों ने अधिकारी को निशाना बनाया। मामले में गिरफ्तारी के बाद घटना की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिकाओं की जांच जारी है।
आरोपियों की पहचान अहिल्यानगर जिले के जामखेड़ निवासी श्रीकृष्ण उर्फ अन्नासाहेब आदिनाथ सावंत, उम्र 50 वर्ष, मुंबई के साकीनाका निवासी सुहास लक्ष्मण राणे, उम्र 50 वर्ष, और कल्याण वेस्ट निवासी योगेश शांतिलाल पाटिल, उम्र 34 वर्ष, के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि कार्यालय में हुई घटना के संबंध में तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। फिलहाल उन पर लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
घटना शुक्रवार को आयोग के मुख्यालय में हुई। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी प्रश्नपत्र लीक मामले से संबंधित कुछ सबूत सौंपने और पुस्तक भेंट करने के बहाने सचिव से मिलने पहुंचे थे। इसी मुलाकात के दौरान सचिव महेंद्र हरपाळकर पर कथित तौर पर काला पाउडर फेंका गया। कार्यालय में अधिकारी से मिलने के लिए पहुंचे लोगों पर इस तरह का आरोप लगने से मुलाकात की अनुमति और उसके दौरान हुए घटनाक्रम का महत्व बढ़ गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अधिकारी के साथ बदसलूकी भी की और प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को लेकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस प्रकरण में विरोध का विषय और कार्यालय के भीतर कथित व्यवहार दो अलग पहलू हैं। परीक्षा की निष्पक्षता से संबंधित शिकायतों की जांच अपनी प्रक्रिया के तहत होती है, जबकि अधिकारी पर पाउडर फेंकने तथा धमकाने के आरोपों का निर्धारण घटना से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर होगा।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में पहले भी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आयोग ने संबंधित भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया था। इससे परीक्षा की गोपनीयता और अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का मुद्दा चर्चा में आया। कार्यालय की ताजा घटना इसी व्यापक विवाद की पृष्ठभूमि में हुई है।
हालांकि, प्रश्नपत्र लीक मामले और सचिव के कार्यालय में हुई घटना के आरोपों को आपस में मिलाकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। किसी परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगने से संबंधित कार्यालय के प्रत्येक अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वतः स्थापित नहीं होती। सचिव पर लगाए गए आरोपों और उनके खिलाफ कथित धमकी की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में सचिव की प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में व्यक्तिगत संलिप्तता की पुष्टि नहीं की गई है।
ताजा मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि मुलाकात के दौरान किस आरोपी ने क्या किया और अधिकारी को धमकी किन शब्दों में दी गई। तीनों की मौजूदगी तथा कथित गतिविधियों का क्रम उनकी भूमिकाओं को समझने में उपयोगी होगा। अभी पुलिस की ओर से घटना का विस्तृत साक्ष्य विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए प्रत्येक आरोपी को समान भूमिका में प्रस्तुत करने के बजाय उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और आगे सामने आने वाले प्रमाणों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सरकारी कार्यालय के भीतर हुई इस घटना से अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल भी सामने आता है। नागरिकों तथा संगठनों के प्रतिनिधियों का शिकायतें लेकर कार्यालय पहुंचना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसी मुलाकातों में शिकायत सुनने और कामकाज जारी रखने के लिए सुरक्षित वातावरण आवश्यक होता है। इस मामले में आरोप है कि अधिकारी से मिलने के अवसर का इस्तेमाल विरोध के दौरान उन्हें निशाना बनाने के लिए किया गया। हालांकि, सुरक्षा में किसी विशिष्ट चूक की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
परीक्षाओं से जुड़े विवाद अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालते हैं। भर्ती प्रक्रिया रद्द होने या दोबारा परीक्षा आयोजित होने से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की योजनाएं प्रभावित होती हैं। इसी वजह से प्रश्नपत्र की गोपनीयता, शिकायतों के निस्तारण और जवाबदेही से संबंधित सवाल महत्वपूर्ण हैं। लेकिन कार्यालय में हुई कथित घटना उन सवालों का समाधान नहीं करती। परीक्षा विवाद में तथ्य सामने लाने और अधिकारी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जांच के लिए संबंधित प्रक्रियाओं का अपना महत्व बना हुआ है।
फिलहाल पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आगे घटना से संबंधित साक्ष्य, अधिकारी का विवरण और आरोपियों की भूमिकाएं मामले की दिशा तय करेंगी। प्रश्नपत्र लीक विवाद के बीच हुई इस घटना ने आयोग को फिर चर्चा में ला दिया है। अब कार्यालय में कथित बदसलूकी और धमकी के आरोपों पर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।