मुंबई : गणेशोत्सव के दौरान निकलने वाले भोजन और जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी और लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने हाथ मिलाया है। इस पहल के तहत मंडल के प्रसाद कक्ष और अन्नछत्र से निकलने वाले गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा। बायोमेथेनेशन प्रक्रिया से तैयार ऊर्जा का उपयोग अस्पताल परिसरों में किया जाएगा। योजना का उद्देश्य त्योहार के दौरान उत्पन्न कचरे का बेहतर प्रबंधन करते हुए उससे बिजली बनाना है।
गणेशोत्सव के दौरान मंडल के प्रसाद कक्ष और अन्नछत्र से रोजाना लगभग आठ से दस मीट्रिक टन भोजन तथा अन्य जैविक कचरा निकलने का अनुमान है। इस मात्रा को ध्यान में रखते हुए कचरे को अलग करने, इकट्ठा करने और प्रसंस्करण संयंत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि, प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की वास्तविक मात्रा उत्सव के दौरान स्पष्ट होगी। आठ से दस टन का आंकड़ा अनुमानित है और इसे रोजाना सुनिश्चित प्रसंस्करण की मात्रा नहीं माना जा सकता।
इस व्यवस्था का पहला महत्वपूर्ण चरण स्रोत पर कचरे का पृथक्करण होगा। प्रसाद कक्ष और अन्नछत्र में भोजन तथा जैविक सामग्री को दूसरे प्रकार के कचरे से अलग रखा जाएगा। इससे प्रसंस्करण संयंत्रों तक उपयुक्त गीला कचरा पहुंचाने में मदद मिलेगी। भोजन के अवशेषों में प्लास्टिक, पैकेजिंग या अन्य अनुपयुक्त सामग्री मिलने पर वैज्ञानिक प्रसंस्करण प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल कचरा एकत्र करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसे शुरुआत से ही सही तरीके से अलग रखना भी आवश्यक रहेगा।
अलग किए गए गीले कचरे को विशेष वाहनों के जरिए इकट्ठा कर बीएमसी के बायोमेथेनेशन संयंत्रों में भेजा जाएगा। इसके लिए नायर अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और सायन अस्पताल स्थित संयंत्रों का इस्तेमाल करने की योजना है। पारंपरिक निस्तारण में भेजे जाने वाले जैविक कचरे को इस व्यवस्था के तहत ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। संग्रह से लेकर प्रसंस्करण तक नियमित समन्वय जरूरी होगा, ताकि प्रतिदिन निकलने वाली सामग्री समय पर निर्धारित स्थानों तक पहुंच सके।
इस पहल को ‘प्रसाद टू पावर’ नाम दिया गया है। योजना में कम से कम 80 मीट्रिक टन जैविक कचरा प्रोसेस करने और लगभग 7,744 यूनिट बिजली बनाने का अनुमान रखा गया है। वास्तविक उत्पादन प्राप्त कचरे की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और संयंत्रों की संचालन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए बिजली का यह आंकड़ा संभावित उत्पादन है, पहले से हासिल उपलब्धि नहीं।
बायोमेथेनेशन में जैविक सामग्री का नियंत्रित परिस्थितियों में विघटन करके बायोगैस तैयार की जाती है। इस गैस का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था भोजन और दूसरे जैविक अवशेषों को इसी प्रक्रिया में शामिल करेगी। यह गीले कचरे को केवल हटाने की गतिविधि से आगे बढ़कर उसके उपयोग की योजना है। इसके लिए संयंत्रों की क्षमता और प्राप्त सामग्री के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। उत्सव में निकलने वाला पूरा मिश्रित कचरा इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त नहीं होगा।
तैयार बिजली का इस्तेमाल अस्पताल परिसरों की जरूरतों में किया जाएगा। इस तरह सार्वजनिक उत्सव से निकलने वाली जैविक सामग्री को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े परिसरों के उपयोग में लाने का प्रयास होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि इससे अस्पतालों की पूरी बिजली जरूरत पूरी हो जाएगी। पहल को अस्पतालों के ऊर्जा उपयोग में योगदान देने वाली व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका वास्तविक योगदान प्रसंस्करण और बिजली उत्पादन के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
योजना में प्रसाद वितरण और सामूहिक भोजन की व्यवस्था से निकलने वाले अवशेषों को व्यवस्थित रूप से संभालने पर जोर है। बड़ी मात्रा में भोजन परोसे जाने वाले आयोजनों में कचरा नियमित अंतराल पर निकलता है। ऐसे में संग्रह की निरंतरता महत्वपूर्ण होती है। यदि पृथक्करण, परिवहन और प्रसंस्करण के चरण एक दूसरे से जुड़े रहें, तो सामग्री को उपयोगी संसाधन में बदलने की प्रक्रिया सुचारु हो सकती है। इस पहल की सफलता में मंडल और नगर निकाय दोनों की भूमिका रहेगी।
यह सहयोग अन्य बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी अनुभव उपलब्ध करा सकता है। त्योहारों में कचरा प्रबंधन की योजना आयोजन शुरू होने से पहले बनाने से जिम्मेदारियां स्पष्ट होती हैं। कौन सी सामग्री अलग रखी जाएगी, उसे कौन एकत्र करेगा और कहां भेजा जाएगा, इन बिंदुओं पर समन्वय आवश्यक है। लालबागचा राजा मंडल और बीएमसी की व्यवस्था से मिलने वाले वास्तविक परिणाम बताएंगे कि ऐसी पहल को दूसरे आयोजनों में किस स्तर पर अपनाया जा सकता है। फिलहाल उसका व्यापक विस्तार घोषित नहीं है।
गणेशोत्सव में इस पहल के परिणामों का आकलन वास्तविक कचरा संग्रह, प्रसंस्करण और बिजली उत्पादन के आधार पर होगा। अनुमानित मात्रा और हासिल उपलब्धि के बीच अंतर स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण रहेगा। बीएमसी तथा मंडल का सहयोग त्योहार के जैविक कचरे को अस्पतालों के लिए ऊर्जा में बदलने की दिशा में कदम है। अब स्रोत पर पृथक्करण से लेकर संयंत्रों के संचालन तक व्यवस्था का प्रभाव उत्सव के दौरान सामने आएगा।