पालघर : रिलीफ हॉस्पिटल में कथित मारपीट और हंगामे के मामले में कार्रवाई आगे बढ़ गई है। पुलिस ने दही-हंडी पथक से जुड़े 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पालघर के विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और निलंबित युवा सेना नेता सायराज पाटिल को हिरासत में लिया गया है। घटना छह सितंबर की तड़के हुई थी। घायल गोविंदाओं के इलाज, अस्पताल से छुट्टी और भुगतान को लेकर शुरू हुआ विवाद कथित तौर पर कर्मचारियों से बदसलूकी तथा मारपीट तक पहुंच गया था।
गिरफ्तारियों की संख्या को लेकर सामने आई रिपोर्टों में अंतर है। ताजा विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को 12 गोविंदाओं की गिरफ्तारी से पहले राहुल घरत गिरफ्तार हो चुका था। इस आधार पर मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 13 बताई गई है, जबकि रोहित गावित और सायराज पाटिल को अलग से हिरासत में लिया गया है। दोनों की हिरासत को औपचारिक गिरफ्तारी के समान नहीं बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, छह सितंबर की सुबह अस्पताल में इलाज करा रहे घायल गोविंदाओं को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि लोगों का एक समूह अस्पताल पहुंचा और डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के साथ बहस करने लगा। इसके बाद कथित मारपीट और हंगामे की शिकायत सामने आई। मामले में 17 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि घटना के दौरान कौन मौजूद था और किस व्यक्ति ने क्या भूमिका निभाई।
ताजा कार्रवाई में पुलिस ने शुक्रवार सुबह नौ लोगों को गिरफ्तार किया और बाद में तीन अन्य लोगों को पकड़ा। अस्पताल तथा आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच के आधार पर कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान की गई। गिरफ्तार 12 आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। यह घटनाक्रम अस्पताल परिसर में हुए कथित व्यवहार के संबंध में जारी जांच का हिस्सा है।
रोहित गावित को मीरा रोड से और सायराज पाटिल को शिर्डी से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, रोहित को पकड़े जाने की परिस्थितियों पर विधायक राजेंद्र गावित का अलग पक्ष प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि रोहित पुलिस के समक्ष स्वयं उपस्थित हुआ था। इस प्रकार पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर दोनों विवरणों में अंतर है। रोहित की भूमिका और उसके खिलाफ आरोपों का निर्धारण संबंधित साक्ष्यों तथा आगे की प्रक्रिया से होगा।
इस मामले में शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत पहले पुलिस के सामने उपस्थित हुआ था और उसे गिरफ्तार किया गया था। घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई तथा उससे जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए गए। हालांकि, संगठनात्मक कार्रवाई और आपराधिक मामले की न्यायिक प्रक्रिया अलग हैं। किसी पदाधिकारी के निलंबन से उसके खिलाफ आरोप स्वतः प्रमाणित नहीं होते। अदालत में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का मूल्यांकन उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाएगा।
घटना की शुरुआती रिपोर्ट में अस्पताल के बिल का विवाद भी सामने आया था। उसमें बताया गया कि घायल दही-हंडी प्रतिभागी के उपचार का कुल बिल 19,866 रुपये था और परिजन दस हजार रुपये चुका चुके थे। शेष भुगतान को लेकर विवाद बढ़ने का आरोप था। उसी रिपोर्ट में अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं दी गई थी। इसलिए कर्मचारियों से कथित मारपीट को बिना प्रमाण व्यापक तोड़फोड़ की घटना बताना उचित नहीं होगा।
मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने जांच के तरीके पर नाराजगी जताई थी। अदालत की टिप्पणी के बाद पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की तलाश पर ध्यान बढ़ा है। अस्पताल में कथित हिंसा का यह प्रकरण चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। उपचार, भुगतान या डिस्चार्ज पर असहमति होने की स्थिति में अस्पताल के भीतर हुई गतिविधियों का पूरा घटनाक्रम समझना जरूरी है। इसी आधार पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
सीसीटीवी फुटेज आरोपियों की पहचान और घटना का क्रम स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन परिसर में दिखाई देने और मारपीट में सक्रिय रूप से शामिल होने के बीच अंतर स्थापित करना आवश्यक रहेगा। कर्मचारियों के विवरण तथा अन्य साक्ष्यों के साथ फुटेज का मिलान प्रत्येक आरोपी की भूमिका समझने में मदद करेगा। अभी गिरफ्तार सभी लोगों के खिलाफ अलग-अलग साक्ष्यों का विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
फिलहाल 12 नई गिरफ्तारियों और दो प्रमुख व्यक्तियों को हिरासत में लिए जाने से मामले में गतिविधियां बढ़ी हैं। पुलिस हिरासत के दौरान पूछताछ और साक्ष्यों का सत्यापन आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगा। अस्पताल में कथित मारपीट के आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत करेगी। जांच से यह स्पष्ट होगा कि विवाद कैसे बढ़ा और शिकायत में नामित प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी।