मुंबई : नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच के एंटी-नारकोटिक्स सेल (एएनसी) ने जोगेश्वरी वेस्ट से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने घर से ड्रग्स बेचने का आरोप है। एएनसी की आजाद मैदान यूनिट ने शुक्रवार, 11 सितंबर को अक्सा मस्जिद रोड स्थित परिसर में छापा मारकर मेफेड्रोन यानी एमडी और एमडीएमए टैबलेट बरामद कीं। नशीले पदार्थों की अनुमानित कीमत लगभग सवा करोड़ रुपये बताई गई है। इस बरामदगी के बाद मामले में ड्रग्स की आपूर्ति से जुड़े लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, आजाद मैदान यूनिट को जानकारी मिली थी कि जोगेश्वरी वेस्ट में एक व्यक्ति अपने आवास से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बेच रहा है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने संबंधित स्थान पर कार्रवाई की। परिसर की तलाशी के दौरान नशीले पदार्थ मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई किसी सड़क पर संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी लेने के बजाय, घर से बिक्री किए जाने की सूचना पर की गई थी। इसलिए इस मामले में संबंधित परिसर की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

बरामदगी के विस्तृत विवरण के अनुसार, पुलिस को 417 ग्राम मेफेड्रोन मिली, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा तीन एमडीएमए टैबलेट जब्त की गईं। इनका कुल वजन 2.04 ग्राम और अनुमानित कीमत 88 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस ने परिसर से 25 हजार रुपये नकद और एक आईफोन 15 भी बरामद किया। नकदी में 500 रुपये के 50 नोट शामिल थे। एक अधिकारी के अनुसार, नशीले पदार्थों और अन्य जब्त सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 1.26 करोड़ रुपये है।

इस तरह मामले में केवल एक प्रकार का नशीला पदार्थ मिलने की बात सामने नहीं आई है। मेफेड्रोन के साथ एमडीएमए टैबलेट की बरामदगी भी दर्ज की गई है। दोनों की मात्रा और कीमत अलग-अलग बताई गई है। शुरुआती खबर में लगभग सवा करोड़ रुपये की ड्रग्स मिलने का उल्लेख था, जबकि विस्तृत विवरण में नकदी और मोबाइल सहित पूरे जब्त सामान का मूल्य लगभग 1.26 करोड़ रुपये बताया गया है। नशीले पदार्थों की कीमत और कुल जब्ती के मूल्य के बीच यह अंतर खबर के आंकड़ों को समझने के लिए जरूरी है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, धारा 8(सी) के साथ धारा 21(सी) लगाई गई है। एएनसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को ड्रग्स कहां से मिलती थीं और कथित आपूर्ति व्यवस्था में दूसरे कौन लोग शामिल थे। फिलहाल इस कार्रवाई में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। अन्य व्यक्तियों की पहचान या गिरफ्तारी के बारे में विवरण उपलब्ध नहीं है। 


मामले का प्रमुख पहलू घर से कथित बिक्री का आरोप है। पुलिस को मिली सूचना में आवास को नशीले पदार्थ बेचने की जगह बताया गया था और तलाशी में वहीं से ड्रग्स बरामद होने की बात कही गई है। हालांकि, आरोपी कितने समय से इस गतिविधि में शामिल था, बिक्री का तरीका क्या था और उसके संपर्क में कितने लोग थे, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। इसलिए कथित कारोबार के आकार या अवधि को लेकर फिलहाल कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

ड्रग्स के स्रोत का पता चलने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद खेप आरोपी तक किस रास्ते पहुंची। इसके साथ ही दूसरे व्यक्तियों की भूमिका सामने आने पर कथित आपूर्ति नेटवर्क की तस्वीर अधिक साफ हो सकती है। अभी उपलब्ध जानकारी बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित है। इसे किसी बड़े गिरोह के पूरी तरह उजागर होने के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी। एएनसी की आगे की पड़ताल में आपूर्ति से जुड़े संपर्कों और आरोपी की कथित भूमिका के बारे में अतिरिक्त तथ्य सामने आने की संभावना है।

नकदी और मोबाइल की बरामदगी भी मामले के रिकॉर्ड का हिस्सा है। हालांकि, प्रकाशित विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जब्त रुपये ड्रग्स की बिक्री से प्राप्त हुए थे या मोबाइल में किसी संदिग्ध लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है। केवल सामान मिलने के आधार पर उसके इस्तेमाल के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इन वस्तुओं का कथित कारोबार से संबंध स्थापित हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी आगे सामने आने वाले जांच विवरण से ही स्पष्ट होगी।

गिरफ्तार व्यक्ति का नाम, उम्र और उसके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इसी तरह अदालत में पेशी, हिरासत की अवधि या आरोपी के पक्ष का उल्लेख भी नहीं है। फिलहाल पुलिस का आरोप है कि वह अपने घर से नशीले पदार्थ बेच रहा था। उसके खिलाफ दर्ज मामले में आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

जोगेश्वरी वेस्ट की इस कार्रवाई में सूचना के आधार पर की गई तलाशी से बड़ी कीमत की ड्रग्स बरामद हुई हैं। आजाद मैदान यूनिट के सामने अब बरामद खेप के स्रोत और कथित आपूर्ति में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का काम है। आगे के खुलासों से यह पता चलेगा कि यह मामला एक व्यक्ति की गतिविधि तक सीमित था या इसके पीछे आपूर्ति की अधिक व्यापक व्यवस्था काम कर रही थी।

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