पुणे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, समाजवादी विचारक और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रत्नाकर महाजन का निधन हो गया है। वह 80 वर्ष के थे। उनके करीबी सहयोगियों ने शनिवार को बताया कि पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे महाजन ने पुणे स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को पुणे की वैकुंठ श्मशान भूमि में किया जाएगा। महाजन की पहचान राजनीतिक विषयों पर अध्ययनपूर्ण विचार रखने वाले नेता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विचारक के रूप में थी। उन्होंने पार्टी संगठन, विकास नियोजन और वैचारिक गतिविधियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
मूल रूप से इंदापुर तालुका के रहने वाले महाजन उच्च शिक्षा के लिए पुणे आए थे। आगे चलकर यही शहर उनकी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना। शिक्षा से वह डॉक्टर थे, लेकिन समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हुए। उनका सार्वजनिक जीवन केवल दलगत राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विचार, संगठन और संवाद के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहने के साथ वह राजनीतिक घटनाक्रमों का विश्लेषण करने वाले व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते थे।
महाजन के वैचारिक विकास पर जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, एस. एम. जोशी, ना. ग. गोरे और ग. प्र. प्रधान जैसे समाजवादी तथा प्रगतिशील विचारकों का प्रभाव था। महात्मा गांधी और समाज सुधारक आगरकर के विचारों से भी उनका जुड़ाव रहा। आपातकाल के दौरान वह सक्रिय रहे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनके जीवन का यह शुरुआती दौर बाद की सामाजिक एवं राजनीतिक भूमिका की पृष्ठभूमि बना। पेशेवर शिक्षा हासिल करने के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी का रास्ता चुना।
कांग्रेस में महाजन ने प्रवक्ता के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। राजनीतिक बहसों में वह पार्टी का पक्ष रखते थे और विभिन्न मुद्दों पर अपनी समझ के आधार पर प्रतिक्रिया देते थे। उनकी सार्वजनिक पहचान में अध्ययनपूर्ण प्रस्तुति का विशेष स्थान था। प्रवक्ता की भूमिका में उनके सामने केवल राजनीतिक आरोपों का जवाब देने की जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि पार्टी की नीतियों और दृष्टिकोण को लोगों तक पहुंचाने का काम भी था। उन्होंने इस दायित्व को लंबे समय तक निभाया और महाराष्ट्र की राजनीतिक चर्चा में अपनी उपस्थिति बनाए रखी।
उनकी कार्यशैली का उल्लेख करते हुए मराठी मीडिया की रिपोर्टों में संयमित भाषा और तर्कपूर्ण प्रस्तुति को प्रमुख विशेषता बताया गया है। राजनीतिक असहमति के बीच अपनी बात स्पष्ट ढंग से रखने का उनका अंदाज उन्हें अलग पहचान देता था। विशेषकर केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान पार्टी के सामने बढ़ती चुनौतियों के बीच उन्होंने उसका पक्ष रखा। उनके बारे में सामने आए विवरण बताते हैं कि राजनीतिक नैतिकता और वैचारिक प्रतिबद्धता उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलू रहे।
महाजन का योगदान राज्य के विकास नियोजन से भी जुड़ा था। उन्होंने वर्ष 1999 से 2009 के बीच महाराष्ट्र राज्य नियोजन मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इस पद पर रहते हुए वह राज्य की विकास संबंधी योजना प्रक्रिया से जुड़े रहे। करीब एक दशक तक निभाई गई यह भूमिका उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। इससे उनकी पहचान पार्टी प्रवक्ता से आगे बढ़कर विकास और नीति संबंधी विषयों पर काम करने वाले व्यक्ति की भी बनी।
वैचारिक लेखन और संपादन के क्षेत्र में भी महाजन सक्रिय रहे। उन्होंने कांग्रेस के मुखपत्र ‘शिदोरी’ पत्रिका के संपादक के रूप में काम किया। इसके अतिरिक्त वह ‘लोकबोधिनी’ संस्था के अध्यक्ष भी रहे। ये जिम्मेदारियां उनके काम के अलग-अलग पक्ष सामने लाती हैं। राजनीतिक संगठन में अपनी बात रखने के साथ उन्होंने लिखित संवाद और संस्थागत गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। उनके सार्वजनिक जीवन में राजनीति, सामाजिक कार्य और विचारों का परस्पर जुड़ाव दिखाई देता है।
महाजन के जीवन की इन भूमिकाओं को साथ देखने पर उनकी सक्रियता का व्यापक दायरा सामने आता है। एक ओर वह पार्टी के मंच से राजनीतिक विषयों पर बोलते थे, वहीं दूसरी ओर नियोजन मंडल जैसी संस्था में विकास संबंधी जिम्मेदारी निभाते थे। संपादन और सामाजिक संस्था से जुड़ाव ने उनके काम को एक अतिरिक्त आयाम दिया। इसी कारण उनके निधन की खबर केवल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की विदाई तक सीमित नहीं है। यह महाराष्ट्र के सामाजिक और वैचारिक जीवन से जुड़े एक लंबे सार्वजनिक सफर के समाप्त होने की खबर भी है।
सहयोगियों के अनुसार, महाजन पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। उपलब्ध जानकारी में उनकी बीमारी का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। उनके निधन की सूचना शनिवार को सामने आने के साथ अंतिम संस्कार का कार्यक्रम भी साझा किया गया। वैकुंठ श्मशान भूमि में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। डॉक्टर के रूप में शिक्षा प्राप्त करने से लेकर समाजवादी गतिविधियों, कांग्रेस संगठन, विकास नियोजन और संपादन तक पहुंची उनकी यात्रा अनेक जिम्मेदारियों से होकर गुजरी। उनके जाने के साथ इन क्षेत्रों में सक्रिय रहा एक अनुभवी व्यक्तित्व विदा हो गया है।