महाराष्ट्र

गणेश उत्सव पर पर्यावरण का ध्यान, CM करेंगे बैठक

Kavita2
30 July 2026 9:54 AM IST
गणेश उत्सव पर पर्यावरण का ध्यान, CM करेंगे बैठक
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 31 जुलाई को गणेश उत्सव से जुड़े सभी संबंधित पक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील पर चर्चा की जाएगी, जिसमें उन्होंने नागरिकों से गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियां स्थापित करने का आग्रह किया था।

राज्य सरकार की ओर से यह जानकारी बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पीठ के समक्ष दी गई। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच को महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक का उद्देश्य गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों पर विचार करना है।

एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में की गई अपील को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बैठक में गणेश मूर्ति निर्माण से जुड़े कारीगरों, धार्मिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में नागरिकों से अपील की थी कि वे त्योहारों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने को प्राथमिकता दें। उन्होंने गणेश उत्सव के दौरान मिट्टी से बनी मूर्तियों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही थी, ताकि नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सके।

गणेश उत्सव महाराष्ट्र का सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करते हैं। उत्सव के समापन के बाद मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से पर्यावरण संबंधी चिंताएं उठती रही हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीओपी से बनी मूर्तियां पानी में आसानी से घुलती नहीं हैं, जिससे विसर्जन के बाद जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा मूर्तियों पर इस्तेमाल किए जाने वाले रासायनिक रंग भी जल प्रदूषण का कारण बन सकते हैं। इसी वजह से कई वर्षों से पर्यावरण संगठनों और प्रशासन की ओर से मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

महाराष्ट्र सरकार की प्रस्तावित बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में यह तय करने पर विचार किया जा सकता है कि पर्यावरण अनुकूल गणेश मूर्तियों को अधिक से अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए और मूर्ति निर्माताओं को किस तरह प्रोत्साहित किया जाए।

मूर्ति बनाने वाले कारीगरों के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। कई कलाकार वर्षों से पीओपी की मूर्तियां बनाते आए हैं। यदि सरकार पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देती है, तो कारीगरों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हो सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मूर्ति निर्माण से जुड़े लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रखी जा सकेगी।

बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वह सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है, ताकि गणेश उत्सव की आस्था भी बनी रहे और प्रकृति को नुकसान भी न पहुंचे।

हर वर्ष गणेश उत्सव के दौरान मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश मंडल सक्रिय रहते हैं। ऐसे में पर्यावरण अनुकूल उपायों को लागू करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती भी होती है। इसके लिए जनजागरूकता, बेहतर व्यवस्था और लोगों की भागीदारी जरूरी मानी जा रही है।

31 जुलाई को होने वाली मुख्यमंत्री की बैठक के बाद सरकार की ओर से आगे की रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। बैठक में मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था, पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों को बढ़ावा देने, नियमों के पालन और लोगों को जागरूक करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट को दी गई जानकारी के बाद सभी की नजरें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए गए फैसले आने वाले गणेश उत्सव के आयोजन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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